बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

लाल लंबी टांगों वाला गजपांव

लाल लंबी टांगों वाला गजपांव या टिंगुड़

@ Manoj Kumar at Giddhi Pokhar, Nalanda
@ Manoj Kumar at Giddhi Pokhar, Nalanda
Black-winged Stilt (Himantopus himantopus)

 स्थानीय नाम : बंगाल में इसे लाल गोन, लाल ठेंगी, लम गोरा कहा जाता है, जबकि पंजाबी में लामलट्टा, मराठी में शेकटा, बिहारी में सरगैन या सरगाइन, तमिल में पाविल्ला कल उल्लान और सिंध में गुस्लिंग।

@ Manoj Kumar at Giddhi Pokhar, Nalanda
पहचान : शरीर के अनुपात में सबसे लंबी टांगों वाला पक्षी गज पांव नदी या पानी के अन्य स्रोतों के किनारे पाया जाने वाला बड़ा ही आम पक्षी है। यह 25 सें.मी. के आकार का पतला और बहुत ही ख़ूबसूरत पक्षी है जिसके पंख काले, सलेटी भूरे और शरीर बगुला की तरह सफेद होता है। इसकी काले रंग की चोंच लंबी और पतली होती है। सबसे पहले हमारी नज़र इसकी टांग पर पड़ती है, जो काफ़ी लंबी और लाल रंग की होती है। लंबी टांगों के कारण ही इसे गज (मीटर) पांव कहा जाता है। नर और मादा के रंग में अंतर होता है। प्रजनन के समय पंख का रंग गहरा हरा हो जाता है। झील, पोखर आदि में ये जोड़ों की झुंड में होते हैं।

वितरण : यह पूरे भारत में पाया जाता है। इसके अलावा बांगलादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यानमार में भी पाया जाता है। ये निवासी (Resident) और स्थानीय प्रवासी पक्षी हैं। ये सर्दियों के आगंतुक हैं।

@ Manoj Kumar at Giddhi Pokhar, Nalanda
स्वभाव : दलदली इलाक़े, झील, तालाब, पोखर, खारे खेतों और ज्वार से बने कीचड़ भरी जगहों पर पाया जाता है। Stilt एक लकड़ी होती है जिस पर पांव रखकर चलते हैं। इसकी Stilt टांग इसे गहरे जल में आराम से चलने में सहायक होती हैं। यहां यह पानी की सतह पर केंचुए, कोमल कवचधारी जीव, जलीय कीट आदि का शिकार करता है। कीचड़ या तलहटी में स्थित कीड़े, मोलस्क सीप, आदि को खाते समय ये सिर और गरदन को पानी के भीतर घुसा लेते हैं, जबकि इनका शरीर बाहर रहता है। तैरने में भी ये माहिर होते हैं। ये तेजी से नहीं उड़ पाते। उड़ते समय इनकी पतली गरदन आगे विस्तारित रहती है, जबकि लंबी लाल पतली टांग पीछे की ओर। ये उड़ते समय तीव्र बिप्‌-बिप्‌ कि आवाज़ करते हैं। गुस्से में ये चरचराने वाली चिक-चिक-चिक की चीखती हुई आवाज़ निकालते हैं।

नीड़न : इनके घोंसला बनाने का समय आमतौर पर अप्रैल से अगस्त के बीच होता है। इनका घोंसला झील या तालाब या पानी के स्रोत के निकट होता है। ज़मीन पर रहने वाले इनके शत्रुओं का ध्यान घोंसलों की तरफ़ आकर्षित न हो इसलिए ये घोंसले मिट्टी कुरेद कर एक छोटे से गड्ढ़े के रूप में बनाते हैं। या फिर किसी ऊंचे प्लेटफ़ॉर्म पर पानी के बीच पत्थरों से घेर कर ये घोंसला बनाते हैं जिसे ये फूस, पत्ते से घेर देते हैं। ये 3 से 4 अंडे देते हैं जो हलके बादामी रंग के होते हैं। नर और मादा दोनों मिलकर अंडे सेते हैं और चूजों की देखभाल करते हैं।

@ Manoj Kumar at Giddhi Pokhar, Nalanda


संदर्भ
1) The Book of Indian Birds – Salim Ali
2) A pictorial Guide to the Birds of the Indian Sub-continent – Salim Ali
3) Pashchimbanglar Pakhi – Pranabesh Sanyal, BiswajIt Roychowdhury
4) The Book Of Indian Birds – Salim Ali
5) Birds of the Indian Subcontinent – Richard Grimmett, Carol Inskipp and Tim Inskipp
6) Latin Names of Indian Birds – Explained – Satish Pande
7) हमारे पक्षी – असद आर. रहमानी
8) The Birds – R. L. Kotpal

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही प्यारी श्रंखला है, पक्षियों के बारे में जान कर आनन्द आ रहा है।

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  2. इस श्रंखला को पुनः प्रारम्भ किया बहुत आभार !!बहुत बढ़िया जानकारी मिल जाती है ...!!

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13-02-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. बहुत अच्छा लग रहा है अपने जीव जंतुओं को जानना ... लाम लट्टा की बेहतर जानकारी ...

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  6. पक्षियों के बारे में सरस जानकारी भरा यह पोस्ट बहुत ही अच्छा लगा। हम अपने आस-पास ऐसे कई पक्षियों को देखते हैं पर हमें उनकी जाती या प्रजाति के बारे में कुछ भी पता नही होता। इस पोस्ट के अध्यन से हमें पक्षि-जगत के बारे में ज्ञानपरक जानकारी प्राप्त होती है। शानदार प्रस्तुति से साक्षात्कार हुआ । मेरे नए पोस्ट "सपनों की भी उम्र होती है "पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है।

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