मंगलवार, 10 नवंबर 2009

लघुकथा


26-04-10 एस झा कुत्ते की मौत
03-05-10 एस झा जल्लाद
10-05-10 एस झा आधुनिक
17-05-10 एस झा दूसरा रूप
24-05-10 एस झा विभेद
31-05-10 एस झा पशु
14-06-10 एस झा मंहगाई
12-07-10 एस झा धर्म
19-07-10 एस झा मूलवासी –(लघुकथा) --- सत्येन्द्र झा
03-08-10 एस झा तेरा जूता तेरे सर (लघुकथा)
10-08-10 एस झा केंद्र (लघुकथा-सत्येन्द्र झा)
17-08-10 एस झा इमेज
24-08-10 एस झा लघुकथा -- दोष किसका..... ?
21-09-10 एस झा पोस्टर
28-09-10 एस झा शौक
05-10-10 एस झा कथांजलि : योगदान
26-10-10 एस झा लघुकथा :: वसुधैव कुटुम्बकम्
09-11-10 एस झा लघुकथा :: मित्र
23-11-10 एस झा साहब का आदेश
07-12-10 एस झा लघुकथा :: अपराध
14-12-10 एस झा लघुकथा :: बड़ा अपराधी
21-12-10 एस झा हत्यारा कौन ?
04-01-11 एस झा लघुकथा:: वास्तव में…..!
11-01-11 एस झा भगवान कभी नहीं मरते हैं..!
18-01-11 एस झा सजा की कीमत
01-02-11 एस झा लघुकथा :: चित भी मेरी पट भी मेरी
08-02-11 एस झा मार्केटिंग
22-02-11 एस झा प्रमाण
15-03-11 एस झा दृष्टिभेद
22-03-11 एस झा लघु कथा : दूसरी गलती
29-03-11 एस झा चमत्कार
05-04-11 एस झा निरपेक्षता
12-04-11 एस झा लघुकथा : खाली ग्लास
19-04-11 एस झा लघुकथा
26-04-11 एस झा डायवोर्स
03-05-11 एस झा जीवन का अर्थ
09-11-09 करण घिढारी का मंत्र
28-12-10 करण तमसो मा ज्योतिर्गमय
08-03-11 करण कोई बात जरूर होगी
25-01-10 परशुराम आषाढ़ का प्रथम दिन
05-04-10 बीना शिकार
16-11-10 बीना कहानी :: उत्तरदायी कौन?
23-09-09 मनोज हर हाल में - मनोज कुमार
12-10-09 मनोज ठहाके
19-10-09 मनोज रखवाला
26-10-09 मनोज बंदी
02-11-09 मनोज लघुकथा सब प्रायोजित है
23-11-09 मनोज दोराहा
07-12-09 मनोज समझदारी
14-12-09 मनोज संवेदना
21-12-09 मनोज ब्लेसिंग
28-12-09 मनोज शांति का दूत
11-01-10 मनोज जिम्मेदारी
08-02-10 मनोज नज़राना
22-02-10 मनोज बंटवारा
15-03-10 मनोज बाधा
22-03-10 मनोज अपशकुन
29-03-10 मनोज बुढ़ापा
12-04-10 मनोज बरसात का एक दिन!
19-04-10 मनोज समय के साथ
07-06-10 मनोज झूठ बोले कौआ काटे
21-06-10 मनोज मेरे छाता की यात्रा कथा और सौ जोड़ी घूरती आंखें!!
28-06-10 मनोज मेरे छाता की यात्रा कथा और सौ जोड़ी घूरती आंखें!!
05-07-10 मनोज मेरे छाता की यात्रा कथा और सौ जोड़ी घूरती आंखें!! भाग- 4 :: नज़रिया
31-08-10 मनोज मेरे छाता की यात्रा कथा, और ... सौ जोड़ी घूरती आंखें!!! (भाग-5 : साहब की कोठी)
19-10-10 मनोज लघुकथा :: अपेक्षा
30-11-10 मनोज लघुकथा :: ईष्ट देव
25-01-11 मनोज लघुकथा :: स्वागत‌!!
15-02-11 मनोज लघुकथा :: कथनी और करनी
01-03-11 मनोज मजनूँ कहीं का
19-03-11 मनोज मेरे छाता की यात्रा कथा और सौ जोड़ी घूरती आंखें (भाग-6 : बेचारा)
09-10-12 मनोज तस्वीर
15-02-10 श्याम चौधरी जमीन से कटे हुए
12-10-10 श्याम चौधरी लघुकथा-पहरा
16-11-09 हरीश दास न छाड़े चाकरी....
30-11-09 हरीश मातृसुख
04-01-10 हरीश धंधा
01-02-10 हरीश रो मत, मिक्की
08-03-10 हरीश फैसला
26-07-10 हरीश बड़ा अपराध ? (लघुकथा) -- -हरीश प्रकाश गुप्त
07-09-10 हरीश लघुकथा - इज़्ज़त
14-09-10 हरीश लघुकथा - प्रतिबिम्ब
02-11-10 हरीश लघुकथा :: उत्साह

13 टिप्‍पणियां:

  1. हमको है उनसे वफ़ा की उम्मीद |
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है ||
    और क्या कहूं

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  2. महाराष्ट्र विधान सभा में जो कुछ भी हुआ उसकी जितनी भ्रत्सना की जाय उतनी कम है. भाषा की यह संकीर्ण मानसिकता देश की एकता और अखंडता के लिए बहुत बड़ा खतरा है. ऐसे लोगों के खिलाफ सबको एकजुट खड़े होकर जनान्दोलन करना होगा और समय रहते जाग जाना होगा.

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  3. ये बहूत ही शर्मनाक घटना है ...... महाराष्ट्र ही नहीं वर्ना पूरे देश के हिन्दी प्रेमियों के लिए ........ राष्ट भक्तों के लिए .... ये काला दिन था ..... नेता लोगों को कभी तो शर्म आये ..... पता नहीं इनके क्षेत्र की जनता इनसे जवाब क्यूँ नहीं मांगती ......

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  4. सच मे बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है यह. यहाँ मुझे एक उक्ति याद आती है, "हमारे देश का प्रजातंत्र मालगोदाम मे लटकी बाल्टी की तरह है, जिसमे लिखा तो होता है आग लेकिन भरा होता है बालू और पानी!!" सच मे कितने मजबूर हैं हम ?? यह तो सरासर कौरव की सभा है! मुट्ठी भर सिरफिरे लोकतंत्र के मंदिर मे लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत चुने गए जन-प्रतिनिधि से उनके लोकतांत्रिक और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार के उपयोग के अपराध मे अलोकतांत्रिक व्यवहार करते हैं. हद तो तब हो जाती है जब लोकतंत्र के तथाकथित पहरुए इन 'आताताइयों' पर महज चार साल का प्रतिबन्ध लगाते हैं. इन्हें तो किसी भी सार्वजनिक पद पर चुने जाने से आजीवन प्रतिबंधित कर देना चाहिए.... बल्कि ऐसे दल को भी अपराधी संगठनो की तर्ज पर प्रतिबंधित कर देना चाहिए.... लेकिन 'बिल्ली के गले मे घंटी कौन बांधे ?' हमारे प्रजातंत्र और हमारे संविधान की इस से बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती है.... कि संविधान के प्रावधानों को लात-घूसों से धुनने वाले 'संवैधानिक' रूप से एक राजनितिक दल हैं !!'

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  5. Every Indian should strongly condemn it. We must take zero tollerence stand agians such a sameful activites.... It is more dangerous than any other problems in India. See, if there is a militant attack, every indian comes togather. But this is such a hazadous call that can harm the harmony and the integrety of the country.

    Regards,
    Sunil CK

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  6. सही कहा आपने सच मे ये शर्मनाक घटना है और आपने जिस बेबाकी से लिखा है वो काबिले तारीफ है शुभकामन्aayम्m

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  7. Apki rachna Hame sochne par majbur karti hai.Hame aisa desh chahiye jaha ekta ki bhavna sarvoperi ho- chahe woh jatiya ekta ho ya bhashai ekta.(MOHSIN)

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  8. Bilkul sahi kaha aapne bhasha k naam pe yeh aatankwadd hi hai.....kavi kavi lagta hai aaj jab desh etni tarakki kar chuka hai phir v es tarah ki ghatnayein ho rahi hai jo ki bahut sharmnaak hain.Hamein eske prati aawaz uthani chaahiye.Bahut durvagyapurna thi kal ki woh ghatna.

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  9. दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक घटना। निंदनीय है।

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  10. भाषा के नाम पर और विशेष ये कि हिंदी भाषा के नाम पर ये सब हुआ. यदि हमारा अपनी मातृभाषा के प्रति यही रवैया रहा तो ऐसा प्रत्येक प्रदेश में होगा...................

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  11. maine aapse agree kartha hoon ! Yeh gathana ko jitna condemn karo kam hai.

    - thyagarajan

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  12. हम इस विषय पर आपसे सहमत हूं।

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  13. Bhasha ka Samman Jaroori hai par kisi Doosri bhasha ke logo ko beijjat karke nahi.... isse pata chalta hai ki kitni chhoti soch hai Raj Thakray aur uske Numaindo ki.... SHame on it.

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