सोमवार, 23 नवंबर 2009

दोराहा

-- मनोज कुमार
पति पत्नी डायनिंग टेबुल पर खाना खा रहे हैं। रेडियो पर मुकेश का एक गाना, “मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बातें, कैसे भी गुज़ारी हों तुमने अपनी रातें” आ रहा है। पत्नी, “खाना कैसा बना है?” पति, “बहुत अच्छा!” पत्नी, ”तुम कितने अच्छे हो, तुम्हें हमारी हर चीज़ ख़ुशी-खुशी स्वीकार्य है।“ रेडियो पर गाने का अंतरा आ रहा है, “मैं राम नहीं हूं फिर क्यों उम्मीद करूं सीता की, कोई इंसानों में ढ़ूंढ़े क्यों पावनता गंगा की”।
पति पत्नी टीवी पर सच पर आधारित एक रियलिटी शो देख रहे हैं। टीवी पर आ रहे शो के ख़त्म होने के उपरान्त पति, “तुम्हें इस शो में भाग लेना चाहिए।” पत्नी, “नहीं, नहीं, मैं सच का सामना नहीं कर सकती”। पति, “क्यों? क्या है तुम्हारे अतीत में जो तुम इसका सामना नहीं कर सकती?” पत्नी, “नहीं, कुछ नहीं, बस ऐसे ही। डर लगता है।” टीवी बंद कर दोनों सो जाते हैं।
सुबह पत्नी की आंख खुलती है। पति उसके बगल में नहीं है। वह बिस्तर से उठने का उपक्रम करती है। तभी उसकी नज़र ऊपर जाती है, सामने सीलिंग के फैन से गले में फंदा डाले उसका पति लटका है। वह सोचती है कि अगर वह पति की बात मान कर उस रियलिटी शो में भाग लेना स्वीकार कर भी लेती तो क्या परिणाम इसके अलग होता? उसके मन में रात वाले गाने की पंक्तियां गूंजती हैं, “मैं नहीं हूं कोई फरिश्ता, इंसान ही बन कर रहना।”
***

32 टिप्‍पणियां:

  1. LEKHNI ME DUM HAI.... MAI OFFICE ME HUN... PAPER KA FINAL CHUTNE WALI HAI.... KABHI FURSAT ME BAT KARNA CHAHUNA..ISLIYE JYADA KUCHH HASIL NAHI KAR PAYA AAPKE BLOG SE PER FURSAT ME PURI KI PURI PADH LUNGA... .PLS MERA NO. 9831057985....
    .....KOLKATA SE RAJ....

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  2. लघु कथा की श्रेणी में एक नया प्रयोग लगा एवं अच्छा लगा । आगे के लिए शुभकामनाएं ।

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  3. अरे वाह बहुत जल्द खेल खत्म, है राम

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  4. अवाक हूँ इसके इफेक्ट से !
    मृत पति, शरीर फन्दे से लटकता - अचानक पाया गया। पत्नी क्रन्दन क्या एक सिसकी तक नहीं लेती और सोचने लगती है ....
    एब्सर्डिटी भरी अजीब जिन्दगी।

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  5. जज़्बात की रौ में बह जाता है कई बार सब कुछ। प्रयोग अच्छा है।

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  6. बहुत अच्छा लिख़ा है ...... लघु कहानी ... एक नया प्रयोग है आपका .......... स्टाइल अच्छी लगी ...........

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  7. एक अलग तरह का असर छोड़ गई आपकी यह लघु कथा...एक नया अंदाज!

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  8. बढिया प्रयोग है जनाब । मतलब पतियों को अभी भी काफी डेवलप करने की जरूरत है ।

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  9. एक नई शैली में लिखी लघुकथा प्रस्तुत करने के लिए बधाई ।

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  10. Yah naya prayog nisandeh sarahaniya hai... kuch aisa hi dekh raha hai aajkal.......
    Badhai

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  11. do insaanonke bichmen jo antar badh raha hai aur jindagi kitni banavati chijonmen manne lagi hai iska udaharan ....
    ek kamre rahne valon ke bich milon ki dooriyan hoti hai ....

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  12. झकझोर दी, आपकी कहानी ने। सच यह है कि समाज "ईमानदारी' की आज तक वैज्ञानिक व्याख्या नहीं कर सका है। मेरे विचार से ईमानदारी मूर्त के साथ हो सकती है, अमूर्त के प्रति इंसान की ईमानदारी क्या हो सकती है? जो था हीनहीं, उसके प्रति कैसे वफादारी निभायी जा सकती। यह रिएलिटी शो वकवास है और समाज कीदुखती रग के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
    मनोज जी, आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा। कृपया इसे प्रतिटिप्पणी नहीं समझें, मैं इसे लेन-देन से ऊपर की चीज मानता हूं।

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  13. Dil ko sahma dene waali aapki yeh rachna sach mein humein sochne pe majbur kar deti hai ki sach ka saamna karna, sach ko kehne se bhi zyada mushkil hain...Bahut achi lagi aapki yeh rachna

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  14. ओह मई गोड!!! सचमुच ये आप सच का सामना का रीएक्शन कह सकते हैं !!!

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  15. महाकथा की गरिमा समेटे लघुकथा. मनुष्य की तिब्र-परिवर्तनशील मानसिकता... दाम्पत्य जीवन मे विश्वास का आभाव.... रुढ़िवाद समाचार माध्यमो की अनुशासनहीनता और समाज पर उसका प्रभाव.... और न जाने कितने ही दृष्टिकोण को समेटे हुए आपकी यह अभिनव शैली की लघुकथा मीलस्तंभ होने का माद्दा रखती है. रेडियो पर बज रहे गीतों के माध्यम से कथा का परिवेश निर्माण और विषय की सजीवता को मैं आपकी विशेषता कहना चाहूँगा. धन्यवाद ! अगली कृति की प्रतीक्षा !!

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  16. सच का सामना प्रोग्राम पर बिलकुल सशक्त लघु कथा लिखी है । शुभकामनायें

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  17. इसका अप्रत्याशित और अनजाना मोड़ या अंत हमें विचलित कर देता है।

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  18. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  19. क्रांतिकारी कथा. अभी हमारे सामजिक मूल्यों मे बहुत बदलाव की जरूरत है !!

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  20. यही तो मनुष्य की है विडंबना ,
    नहीं चाहता वह अपनी चीज खोना ।

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  21. बहुत सुन्दर महोदय, इस लघु कथा ने सोचने पर विवश किया की आज भी हमारी मनोवृतियाँ बदली नहीं है.

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  22. कल 26/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  23. शक का इलाज हकीम लुकमान के पास भी नहीं ... अद्भुत लघु कथा

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