- सूफ़ीमत संदर्भ ग्रंथों की सूची
- सूफ़ीमत के विभिन्न आयाम-1
- 2.सूफ़ीमत ..... भूमिका
- सूफ़ीमत ... ... 3. प्रवेश
- सूफ़ीमत ... 4. सूफ़ी शब्द का अर्थ
- सूफ़ीमत ... 5. सूफ़ीमत का उदय-1
- 5.1 विद्वानों में मतभेद
- 5.2 तत्कालीन अरब
समाज और इस्लाम का जन्म
- सूफ़ीमत ...5. सूफ़ीमत का उदय-2
- 5.3 पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद
साहब ‘सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम’
- 5.4 हज़रत ख़दीजा (रज़िअल्लाहु अन्हा)
- सूफ़ीमत... 5. सूफ़ीमत का उदय-3
- 5.5 इस्लाम का उदय
और प्रचार
- सूफ़ीमत ... 5. सूफ़ीमत का उदय-4
- 5.6 इस्लाम की धार्मिक अवधारणा
- 5.7 इस्लामी परंपरा के अनुसार सलाम
- 5.8 अल्लाह के सिवाय
कोई इलाह (परम-पूज्य) नहीं है
- 5.9 अहसास की साधना
- 5.10 हिजरत
- सूफ़ीमत ...5. सूफ़ीमत का उदय-5
- 5.11 जिहाद - उद्देश्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष
- 5.12 इस्लाम धर्म का
आरम्भिक रूप
- 5.12 (क) पैग़म्बर,
नबी और रसूल
- सूफ़ीमत ...5. सूफ़ीमत का उदय-6
- 5.12 (ख) क़ुरआन, सुन्नत
और हदीस
- 5.12 (ग़) शरिया और शरीअत
- 5.12 (घ) ईश्वर से संबंधित कर्तव्य
- 5.12 (च) मानव संबंधित दायित्व
- सूफ़ीमत ...5. सूफ़ीमत का उदय-7
- 5.12 (छ) क़ुरआन का संदेश
- सूफ़ीमत...5. सूफ़ीमत का उदय-8
- 5.12 (ज) मरने के बाद आदमी का जीवन
- 5.13 पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद की मृत्यु
- 5.14 ख़िलाफ़त - धर्म
के प्रचार-प्रसार के लिए संगठन
- सूफ़ीमत... 5. सूफ़ीमत का उदय-9
- 5.15 इस्लाम
के सम्प्रदाय
- 5.15 (क) खारिजी
- 5.15 (ख) मुरीजी
- 5.15 (ग़) शिया-सुन्नी नेतृत्व का विवाद (खिलाफत बनाम इमामत)
- 5.15 (घ) मुतज़िलका
- 5.15 (च) इख्व़ानुल सफ़ा
- सूफ़ीमत... 5. सूफ़ीमत का उदय-10
- 5.16 इमामत और रिसालत
- 5.17
उमय्यद
- 5.18 अरबों का व्यापक
साम्राज्य
- सूफ़ीमत... 5. सूफ़ीमत का उदय-11
- 5.19 तसव्वुफ़ - इस्लाम का रहस्यवाद या सूफ़ियों का दर्शन
- सूफ़ीमत... 6. सूफ़ीमत की प्रारंभिक अवस्था-1
- 6.1 हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रजि.अ.) (573 ई – 23 अगस्त 634)
- 6.2 हज़रत उमर रज़ि. (586 – 644)
- 6.3 हज़रत उस्मान रज़ि. (576-656)
- सूफ़ीमत... 6. सूफ़ीमत की प्रारंभिक अवस्था-2
- 6.4 हज़रत अली रज़ि.
- 6.5 हज़रत इमाम हसन, हज़रत इमाम हुसैन और क़र्बला का धर्मयुद्ध
- सूफ़ीमत... 6. सूफ़ीमत की प्रारंभिक अवस्था -3
- 6.6 सूफ़ीमत के
वास्तविक इतिहास का आरंभ
- सूफ़ीमत... 6. सूफ़ीमत की प्रारंभिक अवस्था-4
- 6.7 अब्बासी
शासक
- 6.8 इस्लामी
मूल्यों को संरक्षित करने की कोशिश
- 6.9
अह्लेबैत
- सूफ़ीमत... 7. सूफ़ीमत का विकास प्रथम चरण -1
- 7.1 सूफ़ीमत
के विकास में ईरान का हाथ
- 7.2 ‘फ़ि़क्ह’ और ‘तसव्वुफ़’
- सूफ़ीमत... 7. सूफ़ीमत का विकास प्रथम चरण -2
- 7.3 हज़रत हसन बसरी रहमतुल्लाह अलैह (642-728)
- 7.4 हज़रत राबिया बसरिया रह. (मृ. 717-801 ई.)
- सूफ़ीमत... .7. सूफ़ीमत का विकास प्रथम चरण -3
- 7.5 हज़रत अबू हाशिम रहमतुल्लाह अलैह
- 7.6 हज़रत इब्राहिम
बिन अधम (मृ. सन् 777)
- 7.7 हज़रत शक़ीक़
इब्राहिम र.अ. (मृ. 810)
- 7.8 हज़रत अबू
अली फुज़ैल तलक़ानी रहमतुल्लाह अलैह
- सूफ़ीमत... 8. सूफ़ीमत का विकास-द्वितीय चरण-1
- 8.1 इस्लाम, सूफ़ीमत और संन्यास
- 8.2 सूफ़ीमत के विकास का द्वितीय
चरण
- सूफ़ीमत... 8. सूफ़ीमत का विकास-द्वितीय चरण-2
- 8.3 हज़रत ज़ुन्नून मिस्री रहमतुल्लाह अलैह (796-860 ई.)
- 8.4 हज़रत अबू
याकूब बिन इसहाक अलकिंदी (801-873 ई.)
- सूफ़ीमत... 8. सूफ़ीमत का विकास-द्वितीय चरण-3
- 8.5 प्रथम
सूफ़ी साधक हज़रत मंसूर-उल-हल्लाज रहमतुल्लाह अलैह (857-922 ई.)
- 8.6 हज़रत अल-फ़राबी (870-950)
- सूफ़ीमत... 8. सूफ़ीमत का विकास-द्वितीय चरण-4
- 8.7 मध्यमार्ग
- 8.8 हज़रत बायज़ीद अल बिस्तामी (804-874)
- 8.9 हज़रत मारुफ अल करखी
- 8.10
हज़रत जुनैद बग़दादी रह.अ. (लगभग 830–910 ईस्वी)
- सूफ़ीमत... 9. सूफ़ीवाद के विकास का तृतीय चरण-1
- 9.1 हज़रत अबू हमीद अल ग़ज़ाली रहमतुल्लाह अलैह
- 9.2 शेख़ अब्द अल-क़ादिर जिलानी (1077-1166)
- 9.3 हज़रत फ़रीदुद्दीन अत्तार रह. (1136-1230)
- सूफ़ीमत... 9. सूफ़ीवाद के विकास का तृतीय चरण-2
- 9.4 शेख़ शिहाब अल-दीन सुहरावर्दी (1144-1234)
- सूफ़ीमत... 9. सूफ़ीवाद के विकास का तृतीय चरण-3
- 9.5 हज़रत जलाल-उद-दीन रूमी रह. (30 सितंबर 1207 – 17 दिसंबर 1273)
- 9.6. चतुर्थ चरण- में सूफ़ियों
का सिलसिला
- 9.7 सूफ़ीमत पर विभिन्न सम्प्रदायों का प्रभाव
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-1
- 10.1 पहला सिद्धांत परमात्मा एक और सर्वव्यापी है
- 10.2 वहदत-उल-वुजूद
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-2
- 10.3 हज़रत शेख़ मोहि-उद-दीन इब्नुल अरबी रह. (1164-1240 ई.)
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-3
- 10.4 फ़ना और बक़ा की
अवस्था
- 10.5 परमात्मा के
साथ एकत्व प्राप्त करना
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-4
- 10.6 आत्मा के संबंध
में विचार
- 10.7 हज़रत महमूद शबिस्तरी (1288–1340 ई.)
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-5
- 10.8 हज़रत अब्दुल करीम अल-जीली रह. (1365
- मृ. 1428 ई.)
- 10.9 हज़रत अब्द अल-रहमान जामी (1414-1492)
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-6
- 10.10 शेख़ अहमद सरहिंदी (1564-1624)
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-7
- 10.11 सूफ़ीमत पर भारतीय अध्यात्मवाद
का प्रभाव
- 10.12 वाजिबुल वुजूद
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-8
- 10.13 शेख़ शहाबुद्दीन सुहरवर्दी (1154-1191)
- 10.14 ‘वहदतुल-शुहूद’ (एकत्व प्रतिभास)
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-9
- 10.15 सूफ़ी दर्शन
का दूसरा सिद्धांत
- 10.16 सूफ़ी दर्शन
का तीसरा सिद्धांत
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-10
- 10.17 मनुष्य के विभाग
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-11
- 10.18 सूफ़ीमत के अनुसार जगत
- 10.19. ईश्वर और जगत का संबंध
- सूफ़ीमत... 10. सूफ़ी दर्शन-12
- 10.20 सृष्टि में मानव सर्वोपरि
- 10.21 सूफ़ी साधना के मार्ग
- 10.22 भावाविष्टावस्था (वज्द)
- 10.23 निष्कर्ष
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-1
- 11.1 चौथा सिद्धांत ईश्वर के नाम का
प्रेम संस्मरण
- 11.2 इश्क़ शब्द की उत्पत्ति
- 11.3 इश्क़-सिद्धांत की विवेचना
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-2
- 11.4 प्रेम मार्ग का अध्यात्म रूप
- 11.5 प्रेम का साधन होना
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-3
- 11.6 प्रेम-पथ की यात्रा और सात घाटियां
- साधना सोपान
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-4
- 11.7 इश्क़े मजाज़ी
- 11.8 इश्क़े हक़ीक़ी
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-5
- 11.9 पांचवा सिद्धांत - निराकार के प्रति
प्रेम
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-6
- 11.10 प्रेमाख्यान की चरम सीमाएं- उल्लास और तड़पन
- 11.11 प्रेम दर्शन में वियोग-संयोग
- 11.12 सारांश
- सूफ़ीमत... 12. समाअ
- सूफ़ीमत... 13. ज़िक्र (स्मरण करना)
- सूफ़ीमत... 14. पीर
- सूफ़ीमत... 15. साधना के चार हालात-1
- 15.1 शरीयत
- 15.1 (क) सलात/नमाज़
- 15.1 (ख) ज़कात
- 15.1 (ग़) सौम/रोज़ा
- 15.1 (घ) हज्ज
- सूफ़ीमत... 15. साधना के चार हालात-2
- 15.2 शहादा
- 15.3 तिलावत
- 15.4 ज़िक्र
- 15.5 ‘मुराक़बा’
- 15.6 ‘मुजाहिदा’
- 15.7 फ़िक्र
- 15.8 समाअ
- 15.9 तरीक़त (साधनमार्ग)
- 15.10 मारिफ़त
- 15.10 (क) तौबा
- 15.10 (ख) ज़हद
- 15.10 (ग़) सब्र
- 15.10 (घ) शुक्र
- 15.10 (च) रिआज़
- 15.10 (छ) तवक्कुल
- 15.10 (ज) रज़ा
- 15.11 हक़ीक़त
- सूफ़ीमत... 16. मुरीद
- 5.1 विद्वानों में मतभेद
- 5.2 तत्कालीन अरब समाज और इस्लाम का जन्म
- 5.3 पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब ‘सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम’
- 5.4 हज़रत ख़दीजा (रज़िअल्लाहु अन्हा)
- 5.5 इस्लाम का उदय और प्रचार
- 5.6 इस्लाम की धार्मिक अवधारणा
- 5.7 इस्लामी परंपरा के अनुसार सलाम
- 5.8 अल्लाह के सिवाय कोई इलाह (परम-पूज्य) नहीं है
- 5.9 अहसास की साधना
- 5.10 हिजरत
- 5.11 जिहाद - उद्देश्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष
- 5.12 इस्लाम धर्म का आरम्भिक रूप
- 5.12 (क) पैग़म्बर,
नबी और रसूल
- 5.12 (ख) क़ुरआन, सुन्नत और हदीस
- 5.12 (ग़) शरिया और शरीअत
- 5.12 (घ) ईश्वर से संबंधित कर्तव्य
- 5.12 (च) मानव संबंधित दायित्व
- 5.12 (छ) क़ुरआन का संदेश
- 5.12 (ज) मरने के बाद आदमी का जीवन
- 5.13 पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद की मृत्यु
- 5.14 ख़िलाफ़त - धर्म
के प्रचार-प्रसार के लिए संगठन
- 5.15 इस्लाम के सम्प्रदाय
- 5.15 (क) खारिजी
- 5.15 (ख) मुरीजी
- 5.15 (ग़) शिया-सुन्नी नेतृत्व का विवाद (खिलाफत बनाम इमामत)
- 5.15 (घ) मुतज़िलका
- 5.15 (च) इख्व़ानुल सफ़ा
- 5.16 इमामत और रिसालत
- 5.17 उमय्यद
- 5.18 अरबों का व्यापक
साम्राज्य
- 5.19 तसव्वुफ़ - इस्लाम का रहस्यवाद या सूफ़ियों का दर्शन
- 6.1 हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रजि.अ.) (573 ई – 23 अगस्त 634)
- 6.2 हज़रत उमर रज़ि. (586 – 644)
- 6.3 हज़रत उस्मान रज़ि. (576-656)
- 6.4 हज़रत अली रज़ि.
- 6.5 हज़रत इमाम हसन, हज़रत इमाम हुसैन और क़र्बला का धर्मयुद्ध
- 6.6 सूफ़ीमत के वास्तविक इतिहास का आरंभ
- 6.7 अब्बासी शासक
- 6.8 इस्लामी मूल्यों को संरक्षित करने की कोशिश
- 6.9
अह्लेबैत
- 7.1 सूफ़ीमत के विकास में ईरान का हाथ
- 7.2 ‘फ़ि़क्ह’ और ‘तसव्वुफ़’
- 7.3 हज़रत हसन बसरी रहमतुल्लाह अलैह (642-728)
- 7.4 हज़रत राबिया बसरिया रह. (मृ. 717-801 ई.)
- 7.5 हज़रत अबू हाशिम रहमतुल्लाह अलैह
- 7.6 हज़रत इब्राहिम बिन अधम (मृ. सन् 777)
- 7.7 हज़रत शक़ीक़ इब्राहिम र.अ. (मृ. 810)
- 7.8 हज़रत अबू
अली फुज़ैल तलक़ानी रहमतुल्लाह अलैह
- 8.1 इस्लाम, सूफ़ीमत और संन्यास
- 8.2 सूफ़ीमत के विकास का द्वितीय
चरण
- 8.3 हज़रत ज़ुन्नून मिस्री रहमतुल्लाह अलैह (796-860 ई.)
- 8.4 हज़रत अबू
याकूब बिन इसहाक अलकिंदी (801-873 ई.)
- 8.5 प्रथम सूफ़ी साधक हज़रत मंसूर-उल-हल्लाज रहमतुल्लाह अलैह (857-922 ई.)
- 8.6 हज़रत अल-फ़राबी (870-950)
- 8.7 मध्यमार्ग
- 8.8 हज़रत बायज़ीद अल बिस्तामी (804-874)
- 8.9 हज़रत मारुफ अल करखी
- 8.10
हज़रत जुनैद बग़दादी रह.अ. (लगभग 830–910 ईस्वी)
- 9.1 हज़रत अबू हमीद अल ग़ज़ाली रहमतुल्लाह अलैह
- 9.2 शेख़ अब्द अल-क़ादिर जिलानी (1077-1166)
- 9.3 हज़रत फ़रीदुद्दीन अत्तार रह. (1136-1230)
- 9.4 शेख़ शिहाब अल-दीन सुहरावर्दी (1144-1234)
- 9.5 हज़रत जलाल-उद-दीन रूमी रह. (30 सितंबर 1207 – 17 दिसंबर 1273)
- 9.6. चतुर्थ चरण- में सूफ़ियों का सिलसिला
- 9.7 सूफ़ीमत पर विभिन्न सम्प्रदायों का प्रभाव
- 10.1 पहला सिद्धांत परमात्मा एक और सर्वव्यापी है
- 10.2 वहदत-उल-वुजूद
- 10.3 हज़रत शेख़ मोहि-उद-दीन इब्नुल अरबी रह. (1164-1240 ई.)
- 10.4 फ़ना और बक़ा की अवस्था
- 10.5 परमात्मा के
साथ एकत्व प्राप्त करना
- 10.6 आत्मा के संबंध में विचार
- 10.7 हज़रत महमूद शबिस्तरी (1288–1340 ई.)
- 10.8 हज़रत अब्दुल करीम अल-जीली रह. (1365 - मृ. 1428 ई.)
- 10.9 हज़रत अब्द अल-रहमान जामी (1414-1492)
- 10.10 शेख़ अहमद सरहिंदी (1564-1624)
- 10.11 सूफ़ीमत पर भारतीय अध्यात्मवाद का प्रभाव
- 10.12 वाजिबुल वुजूद
- 10.13 शेख़ शहाबुद्दीन सुहरवर्दी (1154-1191)
- 10.14 ‘वहदतुल-शुहूद’ (एकत्व प्रतिभास)
- 10.15 सूफ़ी दर्शन का दूसरा सिद्धांत
- 10.16 सूफ़ी दर्शन
का तीसरा सिद्धांत
- 10.17 मनुष्य के विभाग
- 10.18 सूफ़ीमत के अनुसार जगत
- 10.19. ईश्वर और जगत का संबंध
- 10.20 सृष्टि में मानव सर्वोपरि
- 10.21 सूफ़ी साधना के मार्ग
- 10.22 भावाविष्टावस्था (वज्द)
- 10.23 निष्कर्ष
- 11.1 चौथा सिद्धांत ईश्वर के नाम का प्रेम संस्मरण
- 11.2 इश्क़ शब्द की उत्पत्ति
- 11.3 इश्क़-सिद्धांत की विवेचना
- 11.4 प्रेम मार्ग का अध्यात्म रूप
- 11.5 प्रेम का साधन होना
- 11.6 प्रेम-पथ की यात्रा और सात घाटियां - साधना सोपान
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-4
- 11.7 इश्क़े मजाज़ी
- 11.8 इश्क़े हक़ीक़ी
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-5
- 11.9 पांचवा सिद्धांत - निराकार के प्रति प्रेम
- सूफ़ीमत... 11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-6
- 11.10 प्रेमाख्यान की चरम सीमाएं- उल्लास और तड़पन
- 11.11 प्रेम दर्शन में वियोग-संयोग
- 11.12 सारांश
- सूफ़ीमत... 12. समाअ
- सूफ़ीमत... 13. ज़िक्र (स्मरण करना)
- सूफ़ीमत... 14. पीर
- सूफ़ीमत... 15. साधना के चार हालात-1
- 15.1 शरीयत
- 15.1 (क) सलात/नमाज़
- 15.1 (ख) ज़कात
- 15.1 (ग़) सौम/रोज़ा
- 15.1 (घ) हज्ज
- सूफ़ीमत... 15. साधना के चार हालात-2
- 15.2 शहादा
- 15.3 तिलावत
- 15.4 ज़िक्र
- 15.5 ‘मुराक़बा’
- 15.6 ‘मुजाहिदा’
- 15.7 फ़िक्र
- 15.8 समाअ
- 15.9 तरीक़त (साधनमार्ग)
- 15.10 मारिफ़त
- 15.10 (क) तौबा
- 15.10 (ख) ज़हद
- 15.10 (ग़) सब्र
- 15.10 (घ) शुक्र
- 15.10 (च) रिआज़
- 15.10 (छ) तवक्कुल
- 15.10 (ज) रज़ा
- 15.11 हक़ीक़त
- सूफ़ीमत... 16. मुरीद
सत्य वचन !!
जवाब देंहटाएंजिस देश में ऐसी राजनीति पनप रही है उस देश का भविष्य उज्ज्वल कैसे होगा .........
जवाब देंहटाएंबाल ठाकरे का यह वक्तव्य उसकी ओछी मानसिकता को ही दर्शाता है।
जवाब देंहटाएं-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
हां ठाकरे के घेरे में तो कभी भी कोई भी आ जाता है...........
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया लिखा है।
जवाब देंहटाएंजिन्दाबाद!
सही लिखा है। धन्यवाद।
जवाब देंहटाएंसमसामयिक मुद्दे पर अच्छा आलेख।
जवाब देंहटाएंBahut satiik likha hai aapne 'जब नाश मनुज पर छाता है ! पहले विवेक मर जाता है !!' Es tarah ki politics ka koi matlab nahi banta.Hum sab bhartiya hain aur ek bindian ko dusre se larwaane ka kya matlab banta hai.Aur mujhe nahi lagta ki sachin ne kuch bhi galat kaha ho!!!Magar en politicians ko kaun samjhayein yea toh hote hi bewkuf hain.
जवाब देंहटाएंThakarey aaj chaalis varshon se desh ka to chhodiye, jis Mumbai ko apnee thaatee samjhte hain uska ranch maatra bhi bhala na kar sake ulte puree duniyaa me mumbai ke liye bhay paida kiya.... wo sakhs jab Tendulkar jaise Virat chhabi ke dhani vyaktitwa par kankar uchhalta hai to bas ek hee dialogue hai, 'sheeshe ke gharon me rahne waale....... '
जवाब देंहटाएंshabbash Sachin ! Blog par ise lane ke liye apka bhi shukriya !
जवाब देंहटाएंसही कहा है आपने। दुख के साथ आक्रोश भी होता है।
जवाब देंहटाएंye thakhre ko bolne ka koi fark nahi padta. sachin tho bagwan hai tho chandh ka munh par thukhne wale ko kya hotha hai, wo sabi jantha hai!
जवाब देंहटाएं- thyagarajan
Well done ! Thanks to both Sachin n you.
जवाब देंहटाएंWe all should come together to critisise strongly the mud thrown on the God of cricket !
जवाब देंहटाएंHmm.... We must condemn it !
जवाब देंहटाएंठाकरों पर क्या कहें ? इनको ना सुने और ना ही कुछ कहें!!!!!! बिना सत्ता ये वैसे ही ख़त्म हो जायेंगे!!!
जवाब देंहटाएंSachin jaise khiladi par is tarah ka comment nindaniya hai.( MOHSIN )
जवाब देंहटाएंहमें संकिर्णताओं से ऊपर उठना होगा । हमें अपनी सोच का दायरा विस्तृत करना होगा। बढिया आलेख।
जवाब देंहटाएं