सोमवार, 10 मई 2010

आधुनिक

- सत्येन्द्र झा

कक्षा में शिक्षक छात्रों को आधुनिक बनने की शिक्षा दे रहे थे। उन्होंने कहा, "बिना आधुनिक बने विश्व के साथ कदम मिलाना असंभव है।”

एक छात्र इसका अर्थ नहीं समझ पाया। उसने प्रश्न किया, "सर! थोड़ा स्पष्ट कर के कहें!"

 

शिक्षक ने समझाया, "देखो ! जैसे गंवार आदमी नाक साफ़ कर के सड़क पर ही फ़ेंक देता है किन्तु आधुनिक लोग अपने पाकेट में रुमाल रखते हैं। जब कभी नाक साफ़ करने की जरूरत हुई वो रुमाल से नाक साफ़ कर फिर पाकेट में रख चल देते हैं।"

 

छात्र फिर भी नहीं समझा। वह थोड़ा भ्रमित सा होता हुआ बोला, "सर ! आधुनिक लोग गन्दगी को अपने साथ ही ले के चलते हैं क्या....?"

 

अब छात्र की बात सुन शिक्षक महोदय भी कुछ असमंजस में पड़ गए।

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही लाजवाब व उम्दा लगा आपका व्यंग्य ।

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  2. सहज,बालसुलभ,जिज्ञासापूर्ण व्यंग्य!

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  3. बढ़िया व्यंग...आधुनिक गन्दगी को साथ ले कर चलते हैं :):)

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  4. हलके से व्यंग्य में कितनी गहरी बात कह दी गयी है ! आभार!

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  5. हम सभी स्‍वयं को आधुनिक युग का हिस्‍सा समझते हैं परन्‍तु हम देखें कि हम किसी प्रकार की गन्दगी तो नहीं ढ़ो रहे हैं?

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  6. वो मारा पापड़ वाले को.............. क्या बात कही जनाब....
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

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  7. गन्दगी को साथ ले कर चलते हैं :):)

    To through it in a near by dustbin

    just proving how our teachers are also uneducated ?

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  8. गन्दगी को साथ में लेकर नहीं चलते हैं ... उसे इधर उधर फेंकने की वजाय सही जगह फेंका जाता है ...
    आपके व्यंग्य कुछ हद तक सही है ... आधुनिकता के नाम पर कुछ सामाजिक गन्दगी आई ज़रूर है ... पर परंपरा के नाम पर हम जो कई गन्दगी ढो रहे हैं उसका क्या? ज़रूरत है अच्छी परम्पराओं को रखें, अच्छी आधुनिकता को रखें, और गन्दी परंपरा तथा आधुनिकता को त्याजें ...

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  9. bahut hi badhya vyangytmak prastuti.shayd chhatr ne hi sikshk ko aadhunikta ka sahi matlab samjha diya.
    poonam

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  10. व्यंग्य-व्यंग्य में गहरी बात कह दी गयी है !

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  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  12. उद्धरण का गलत जगह प्रयोग जोर का झटका देगा ही. बाल सुलभ जिज्ञासा सीधा अर्थ ही ग्रहण करेगी. शिक्षक का धर्म है कि दिशा को भटकने न दे और यही उसकी योज्ञता भी है.

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  13. आधुनिक होना अधिक व्यापक अर्थ देता है. इसके स्थान पर यहाँ सभ्य शब्द का प्रयोग किया गया होता तो अधिक उपयुक्त होता. क्योंकि साफ-सफाई प्रत्यक्ष रूप से सभ्य होने से ही सम्बन्धित है.

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