सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

नज़राना

नज़राना
-- मनोज कुमार

पूरे परिसर में शिशिर को एक कर्त्तव्‍यनिष्‍ठ प्रशासनिक अधिकारी के रूप में ख्याति प्राप्त थी। कर्त्तव्‍यनिष्‍ठ इस लिए कि उन्‍हें जो भी दायित्‍व दिया जाता है उसका वे पूरी निष्‍ठा से पालन करते हैं और उसमें तन मन धन लगा देते हैं। साथ ही वे एक सफल प्रशासनिक अधिकारी भी हैं। सफल इसलिए कि उन्‍हें सबको खुश रखने की कला आती है।
वाक़या तब का है जब फैक्‍टरी के पुराने बड़े साहब तबादले पर जा चुके थे और नए वाले के 20 तारीख तक आने की सूचना मिल चुकी थी। अतिथि गृह (आइ.बी.) में शिशिर उस दिन सुबह से ही बड़े साहब के आगमन की प्रतीक्षा में था। करीब दो बजे आई.बी. के कैम्‍पस में एक होंडा सीटी रुकी। शिशिर लपका इस ध्‍येय से कि बड़े साहब के उतरने के पहले उनकी साइड वाला दरवाजा वह स्‍वयं ही खोल सके। पर हाय री किस्‍मत! दरवाजा अंदर से लॉक था, अतः खुला नहीं, हां ड्राइवर वाली साइड का शीशा थोड़ा नीचे हुआ और उसकी आवाज शिशिर के कानों में पड़ी अभी मत खोलिए दरवाजा। पहले यह बताइए इनके ठहरने का रूम तो खुला है ना?
हां शिशिर ने जवाब दिया। ड्राईवर ने पूछा. उसका एसी ऑन है ना?

हां, जैसी इन्फॉर्मेशन दी गई थी, ठीक वैसे ही पूरी तैयारी कर दी गई है। शिशिर ने बताया।
आगे के दरवाज़े से ड्राइवर बाहर निकला, फिर पिछली सीट का दरवाजा खुला पहले एक नौजवान पर नौकर टाइप का लड़का उतरा फिर सफेद पर काले धब्‍बों वाला, बड़ा सा कुत्ता (डलमेशियन), उसके पीछे पतली सी, सुंदर सी, (डोबरमैन) कुतिया। शिशिर चकित।
चलिए बताइए कौन सा रूम है? जॉन्‍टी और जूली को गर्मी बिल्‍कुल बर्दाश्‍त नहीं होती।
रूम नं 2 में उन्‍हें शिफ्ट किया गया। बात-बात में मालूम हुआ कि साहब का सामान वाला ट्रक रात तक आ जाएगा। और जब सामान सेट हो जाएगा, तो दो-तीन दिन बाद साहब फ्लाइट से आएंगे।

खैर उन अतिथियों की मेहमान नवाजी में शिशिर ने कोई कसर नहीं छोड़ी और जॉन्‍टी और जूली बड़े मौज से बाकी के दिन उसकी कालीन और बिस्‍तर पर अपना नित्‍यकर्म करते चैन से रहे।

जब बड़े साहब साहब आए तो पाया कि शिशिर की कर्तव्‍यनिष्‍ठा की पराकाष्‍ठा चरम पर थी। बड़े साहब प्रसन्‍न हुए।

रोज़ सुबह-सुबह बड़े साहब जॉन्‍टी और जूली को लेकर निकलते तो प्रायः शिशिर के जॉगिंग का भी वही समय होता। थोड़ी दूर साथ-साथ चलते जॉन्‍टी की चैन शिशिर के हाथ में होती। फिर जूली वाला भी। फिर बड़े साहब चैन से टहलते।

कुछ दिन इसी तरह बीते। एक दिन शाम को सारे अधिकारियों को सूचना दी गई कि बड़े साहब के घर नए मेहमान आए हैं। अतः एक छोटी सी टी पार्टी रखी गई है। मेहमान के बारे में सबको पता था। शिशिर जब तक पहुँचा तब तक कई अधिकारी पहुंच चुके थे। कोई बुके देकर बधाई दे रहा था तो कोई स्‍वीट का पैकट देकर। तो कोई शब्‍दों में क्‍या प्‍यारे प्‍यारे बच्‍चे हैं !! ... क्‍यू!!! .... लवली!!!

शिशिर झांका। देखा कार का गराज खाली कर दिया गया था। नीचे कालीन बिछी थी। और उस पर जॉन्‍टी और जूली के प्रेम की कई निशानियाँ कूं-कूं कर रही थी। डोबरमैन और डलमेशियन के संयोग से जो हाइब्रिड बच्‍चे थे, थे तो बड़े ही खूबसूरत!! शिशिर को भी खूशी हुई। .. मन से !! वह चेहरे पर छलक आई ख़ुशी छुपाता उसके पहले ही पीछे से बड़े साहब की आवाज आई, शिशिर! कैसे हैं? अच्‍छे हैं ना!!??

शिशिर के मुंह से निकला, जी सर !

तो एक ले जाओ तुम। तुम्‍हें तो काफी लगाव रहा है इनके माता-पिता से।

.... और शिशिर के साथ श्रीमती शिशिर की जब वापसी हुई तो उनकी भी गोद भरी हुई थी।

दूसरे दिन शिशिर ऑफिस के काम में व्‍यस्‍त था कि दरवाजे पर नॉक हुई और बड़े साहब के ऑफिस का आर्डरली उसके सामने था।

क्‍या है?

साहब ने भेजा है।

किस लिए?

... साहब ने .... वो ... पैसे मांगे हैं। कुत्ते का। दस हजार।

शिशिर हक्‍का बक्‍का रह गया। दस हजार ?? पर चेहरे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आने दी। 10,000 रूपए का चेक काटकर उसे दे दिया। यह बात सारे कार्यालय में फैल गई कि शिशिर ने तो बाजी मार ली। पर इस तंत्र में कोई इतनी आसानी से बाजी अपनी ओर थोड़े ही कर सकता है।

सिन्‍हा जी बड़े साहब के ऑफिस में पहुँचे। बोले, सर कल आप ठीक ही कह रहे थे। मैंने मार्केट में इसका रेट पता किया है। 15 से बीस हजार में है सर!! कल जो भी हुआ वह आपके लिए घाटे का सौदा हो गया। पर कोई बात नहीं एक तो मैं लंच के समय घर जाते वक्‍त ले ही लूंगा। और दो मेरे दोस्‍त को भी चाहिए। ये लीजिए साठ हजार का चेक।

इस तरह के तोल मोल के बोल चलते रहे और बड़े साहब को डेढ़ से दो लाख का नज़राना शाम तक मिल ही गया।

(चित्र साभार गूगल सर्च)

*** *** *** *** *** ***

16 टिप्‍पणियां:

  1. खैर उन अतिथियों की मेहमान नवाजी में शिशिर ने कोई कसर नहीं छोड़ी और जॉन्‍टी और जूली बड़े मौज से बाकी के दिन उसकी कालीन और बिस्‍तर पर अपना नित्‍यकर्म करते चैन से रहे। :)

    बढिया, इसे कहते है भगवान् जब देता है ..... :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही अच्छी लगी यह कहानी. ऐसी ही कहानी का इन्तेजार रहेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह बहुत ही बडिया कथा .लगता है जोन्ती और जुलि आन्खो के सामने आ गये हो.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! चित्र भी बहुत सुन्दर है खासकर पहला वाला जो बड़ा ही प्यारा लगा!

    उत्तर देंहटाएं
  5. Bahut hi badia laga yeh post. Kahani sundar. photos ke hone se kahani jeevant ho uthi hai.

    उत्तर देंहटाएं
  6. सर मुडाते ही ओले पड़ गए.... बहुत शानदार लिखा है आपने.... सिस्टम पर.....

    आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  7. अच्छा लिखा है .... ऐसी महमान नवाज़ी हो तो क्या कहने ......

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह बहुत ही बडिया कथा .चित्र भी बहुत सुन्दर है .

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत बढ़िया कहानी....चापलूसी कि बहुत जोर दार व्याख्या की है...बहुत खूब .

    उत्तर देंहटाएं

आपका मूल्यांकन – हमारा पथ-प्रदर्शक होंगा।