शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

वेल कम, टाइन की टीस ज्यादा


वेल कम, टाइन की टीस ज्यादा


-हरीश प्रकाश गुप्त

पिछली दिसम्बर के आखिरी सप्ताह से पारा जो नीचे लुढ़का तो चढने का नाम ही नहीं ले रहा। बस, लुढ़ककर रह गया। एक महीना होने को आया। काम काज ठप्प हो गए। कोट-कम्बल-टोप में घुसे-घुसे उकताहट होने लगी। कोट की जेब में घुसा हाथ भी संज्ञाशून्य-सा लगता। सड़क पर दोपाया यदाकदा दिखने वाले विलुप्त प्राणी सा हो गया। दिखता भी तो बन्दर बना, ही.ही.ही., हू-हू-हू करता तेजी से अपने गन्तव्य की ओर भागता हुआ।

फरवरी ने अपने आने की गुलाबी आहट भी दे दी लेकिन शीत जनित निविड़ निर्वात में यह ध्वनि गुम होकर रह गई। कब से प्लान बना रखा था छज्जू ने कि इस बार वह अपने बाँके को एक लाल गुलाब का अधखिला अर्थात खिलने को बेताब फूल जरूर देगा। दुकान भी देख ली थी उसने और दूकानदार से पूछताछ भी कर आया था।

पिछले साल जब एक हाईकोर्ट का डिसीजन आया, छज्जू, बॉके जैसों के सम्बंधों की सामाजिक स्वीकृति के सम्बंध में, तब से दोनों के मन की शीतलता के बीच कुछ कुनकुना गुनगुनाने लगा था। टी.वी. चैनलों ने तो अपने सारे कामकाज किनारे रख बस एक विषय का एक सुर में इतना प्रलाप-प्रचार किया कि इन संवंधो पर चर्चा बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े सबकी जुबान पर आ गई। टी.वी चैनल पर चेहरा दिखाने का मोह संपूरित होते देख तमाम लोग लज्जा चौखट भीतर छोड़ भागते नजर आए तो शहर से लेकर गली मोहल्लों तक कई सप्रभ चेहरे नए सम्बंधों के साथ दमकने लगे। प्रफुल्लता में उनका सीना एक से डेढ़ गज का हो चला। अतीत से लेकर पौराणिक काल तक की अनेकानेक व्याख्याओं और स्वनामधन्य ऋषिवर के सूत्रों का उल्लेख किया जाने लगा, सजग और विकसित देशों की करतूतों के तर्को के साथ। आँख मूँद लेने पर बात में यकायक दम भी नजर आने लगा। छज्जू अपने को कहाँ पिछड़ा मानने वाला था। जबरदस्ती ओढाई गई मर्यादा की चादर उसने सटाक से उतार फेंकी और हो गया शामिल अगड़ों में। तब से वह बॉके के साथ को सरेआम खुलकर स्वीकारता है, गर्व से कहता है कि बहुत अन्याय हुआ है, अभी तक हम लोगों के साथ।

हले, जब भी दोनों युगलों को दिलखुश चेहरों के साथ गलबहियाँ डाले देखते तो उनके कलेजे में सॉप लोट जाता। फरवरी का पहला पाखवारा-भर कोसते-कोसते बीतता तो वेलेन्टाडन डे को मन-बदन में आग लगी रहती। अबकी ताजगी है। दिल फूलकर गोलमटोल हो चुका है। मन कुलाचें भर रहा है और उस जज की बलैया लेने का भी मन कर रहा है, दोनो का। उनका कहना है कि यह वेलेन्टाइन-डे भी खास है। एक साथ तीन-तीन खुशियों के साथ आया है। वर्ल्ड मैरिज डे भी है और इतवार अर्थात सरकारी छुट्टी भी। छज्जू-बाँके सब खुशियाँ मनाएंगे इस बार, ठंड-वंड को किनारे रखकर, और इसे यादगार बनाएंगे। छज्जू के वेलेन्टाइन डे पर बाँके डार्लिंग से प्रेम का इजहार करने के साथ-साथ दोनों वर्ल्ड मैरिज डे से लिव-इन-रिलेशनशिप भी स्टार्ट करेंगे, वो भी बिना एक कैजुअल लीव लिए।

इसी आपा-धापी में लो वह क्लाइमेक्स वाला दिन भी आ पहुँचा। सब अपने-अपने वेलेन्टाइन के साथ एक-एक गुलाब लिए मगन हैं। मेल का वेलेन्टाइन फीमेल और फीमेल का वेलेन्टाइन मेल। इस बार तो शेम सेम भी हैं। लोदी गार्डेन और सफदरजंग के मकबरे की रौनक देखकर सफदरजंग और इब्राहीम लोदी के दिल तो बाग-बाग हो रहे होंगे कि उनकी छाती वास्तव में बाग बन चुकी है और उस पर आज भी फूल और गुल सब खिल रहे हैं।
लेकिन बाबा वेलेन्टाइन क्या करें। संसार में रहते उन्होंने सबसे प्रेम किया, अपने शिष्यों को प्रेम के जिस सन्देश के साथ इसकी परिभाषा को विस्तार दिया और प्रसार का आदेश दिया आज वह कहीं कोने में पड़ा धूल फाँक रहा है। चेले उनसे भी तीन कदम आगे निकले और बाबा से उलट, प्रेम की एकांगी परिभाषा का आविष्कार करके प्रचार और प्रसार में रत हैं। मानसिक रिक्ति और कुण्ठा की परिणति- आसक्ति का प्रेम। प्रेम केवल मेल का फीमेल से या फीमेल का मेल से और अब तो एकसमान भी, खुलेआम। साथ ही, अपने साथी को ‘वेलेन्टाइन’ कह नाम भी दे रहे हैं और बाबा का नाम भी खराब कर रहे हैं।
अनर्थ से परेशान, स्वर्ग में बैठे बाबा वेलेन्टाइन आहत हैं और उन्हें अपने ऊपर ही अब सन्देह हो चला है। विचार में हैं कि कमी कहाँ रह गई। सन्ताप से उनकी आत्मा कसक रही है और वेल की सुखद अनुभूति कम टाइन की चुभन और टीस अधिक महसूस कर रही है। बाबा का दिल धड़-धड़ धड़क रहा है। उन्हे स्वर्ग की शांति में भी सुकून नहीं। बाबा एक बार फिर धरती पर उतरने की तैयारी में हैं। स्वस्थ समाज को अपना वाला अर्थ बताने के लिए। छज्जुओं और बाकों को भी।

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10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी बेहतरीन शैली का कोई जवाब नहीं है...
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

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  2. वेल की सुखद अनुभूति कम टाइन की चुभन और टीस अधिक महसूस कर रही है।'
    अपनी अपनी परिभाषा, अपना अपना विश्लेषण

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  3. मनोज जी बहुत सुंदर शव्दो मे आप ने बेल कम टाईन की टीस बताई.
    धन्यवाद

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  4. Gupt ji ka yeh lekh "वेल कम ,टाइन की टीस ज्यादा" bahut hi accha laga. Khaaskar iski shaili.

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  5. बहुत सुंदर शव्दो मे आप ने बेल कम टाईन की टीस बताई.

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