सोमवार, 22 मार्च 2010

अपशकुन

अपशकुन


-- मनोज कुमार


(स्थल - अस्पताल के प्रसुति गृह के सामने का बरामदा।)

दृश्य-1

मिसेज खन्ना (मिसे सलूजा के उतरे हुए चेहरे को देख कर) क्या हुआ बहन जी? कुछ उदास दिख रही हैं।

मिसेज सलूजा - पोते की आस लगाये थी। बहू ने बेटी पैदा किया है।

मिसेज खन्ना अरे! तो क्या हुआ? दिल छोटा न रो बहना। लड़का-लड़की सब भगवान की दे है। लक्ष्मी घर आई है, सुख सौभाग्य समृद्धि का प्रतीक है। वैसे भी आजकल लड़कियां किसी दौड़ में लड़कों से पीछे नहीं है।ख़ुशी मनाइए। मिठाइयां बांटिए।

मिसेज सलूजा - ठीक कहती हो बहना।

दृश्य 2

मिसेज खन्ना (मिस्टर खन्ना को आते देख कर) क्या हुआ जी?

मिस्टर खन्ना - अपशकुन। पोती हुई है

मिसेज खन्ना हाए भगवान! मैं तो पहले ही कहती थी बहू के लक्षण अच्छे नहीं हैं। अब क्या करूं, मेरे तो करम ही फूट गये। नासपीटी ने पैदा भी की तो लड़की। कब से पोते का मुंह देखने को तरस रही हूँ। इस करमजली ने हमारे सारे अरमानों पर पानी फेर दिया।

*** *** ***

18 टिप्‍पणियां:

  1. दूसरों को उपदेश देना बहुत आसान है .. खुद पालन करना बहुत कठिन !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. पर उपदेश कुशल बहुतेरे ......सन्देश देती हुयी अच्छी कथा...

    उत्तर देंहटाएं
  3. मर्मभेदी........... ! आँखें भर आयी !! इसी ब्लॉग पर प्रकाशित ज्ञानचंद मर्मग्य की कविता की पंक्तियाँ याद आ गयी.
    'दुनिया वालों वो तूफ़ान देखो,
    किस दिए को बचाने चले हो ?
    बिन धरा का ये आकाश लेकर,
    कैसी दुनिया बसाने चले हो ??

    आखिर हम कब तक अच्छे बन कर बुराइयों को सहते रहेंगे.... आवाज़ उठाने के लिए, धन्यवाद !!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. Waise to aj ke samay me beti bete me logo ne fark karna pahle se kum kar diya hai...bt kuch log abi b betiyon ko apsshagun mante hai...Bahot taklif hoti hai jab ghar aai laksmi ko apshagun ka nam dekar ghar me log jashn ki jagah matam banane lagte hai....aur beti hone ka dosh janam dene wali maaon par lagaya jata hai...ye jante hue b ki bacha paida karna hamare hath me nai hota agar hamare hath me hota ... kisi b auart jinki god suni rah jati hai suni ni rahti unke ghar b bachon ki kilkari gunjti.. Bache chahe wo ladka ho ya ladki dono he ishwar kee amoolya den hai ....

    Manoj Ji...Apki ye laghukatha ek kathor vyangya hai jo kroor kintu satya bhi hai...aur ek he insan ki do tarah ke soch ko darsha raha hai... dusro ko samjhna to asan hai bt log khud b samjh jaye to sab sahi hoga...

    Kash har wo Maan jo Mrs Khanna ki tarah sochti hai...ye samjh le ki wo khud b to ek beti hai fir kyun ek beti hokar betioyon ko APSHAGUN ka nam deti hai???????

    Manoj Ji & Karan Ji ....Thanks both of you to provide us an oppoortunity to go through an excellent laghukatha.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज भी बेटी का दूसरा अर्थ लंबा-चौड़ा बिल है. एक ऐसी लक्ष्मी जो यहाँ की लक्ष्मी लेकर दूसरे घर जाती है. हम ऐसे अंतर्विरोधों से पीछा नहीं छुड़ा पाते. सुंदर लघुकथा.

    उत्तर देंहटाएं
  7. यही है आईना अपने समाज का
    मार्च 2010 में लिखी लघुकथा हम तक पहुंचाने के लिए संगीता जी का शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  8. पर उपदेश कुशल बहुतेरे का बेहतरीन चित्र।

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. कटु सत्य ! उपदेश देना आसान है ! ऐसे लोगो के घर के आगे ही लिखा होता है यहाँ सब ज्ञानी है कृप्या ज्ञान न दें !

    उत्तर देंहटाएं
  11. सशक्त एवं सार्थक लघु कथा ! कितना अच्छा हो यदि समाज में सभी लोगों का सही गलत का पैमाना औरों के लिये और खुद अपने लिये एक ही हो !

    उत्तर देंहटाएं
  12. पर उपदेश कुशल बहुतेरे....

    करारा/तीखा...
    सादर..

    उत्तर देंहटाएं
  13. सामने वाले को उपदेश देना आसान तो होता ही है ....

    उत्तर देंहटाएं
  14. मनोज जी,..
    सशक्त कथा के माध्यम से आज के समाज को सत्य का आइना दिखाया.
    बेहतरीन पोस्ट,...मेरे पोस्ट में आने के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  15. लोगों के चरित्र के दोगलेपन को रेखांकित करती बहुत सशक्त पोस्ट...

    उत्तर देंहटाएं
  16. samaj ki sharmanak sthiti aur logon ka dogala vyavhar... dono baten batati hui jhalaki ...
    badhia prayas ...

    उत्तर देंहटाएं

आपका मूल्यांकन – हमारा पथ-प्रदर्शक होंगा।