मंगलवार, 30 मार्च 2010

वन्दे मातरम् .... वन्दे मातरम् !

ब्लोगर बन्धु गण,
नमस्कार,
आपके सस्नेह आग्रह पर आज हम एक बार फिर प्रस्तुत कर रहे हैं बेंगलूर के प्रसिद्द कवि एवं गीतकार ज्ञानचंद मर्मज्ञ की देशभक्ति पूर्ण एक अद्वितीय रचना !


वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।
वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।
सत्य-सुधा बरसाने वाली, प्रेम भक्ति दरशाने वाली,
सबके दिल में मानवता का जग-मग दीप जलाने वाली।
जात-पात का का भेद मिटा कर सबको गले लगाने वाली,
राष्ट्रप्रेम, सद्भाव, प्रीती का मन में भाव जगाने वाली।
शान्ति, अहिंसा, करुना, ममता जन-जन तक फैलाने वाली,
विश्व-बन्धु और भाईचारा दुनिया को सिखलाने वाली।
वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।
वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।


रंग-बिरंगी भाषा-बोली, तेरी वाणी की रंगोली,
लहराए खेतों की दुल्हन, सजे हमेशा तेरी डोली।
गंग-जमुन, कपिला, कावेरी बहती हैं मुस्कान लिए,
उधर हिमालय अडिग खड़ा है, वीरों की पहचान लिए।
तेरा कण-कण माणिक-मोती, किरण-किरण विश्वास की ज्योति,
ज्ञान बिना जग सुना होता, तू न अगर संसार में होती।
तुम से सुरभित धड़कन-धड़कन, सांस-सांस है चन्दन-चन्दन,
नमन हज़ारों बार तुम्हे है, कोटि-कोटि चरणों में वंदन।
वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।
वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।


चमके देश का कोना-कोना, तेरी मिट्टी सोना-सोना,
नफ़रत में डूबी दुनिया ने, तुझ से सीखा प्यार संजोना।
तेरा वन्दनवार तिरंगा, रूप तेरा श्रृंगार तिरंगा,
हर भारत-वासी का सपना, सपनों का संसार तिरंगा।
आँचल तेरा देख के हरषे, सावन-भादों झूम के बरसें,
गोद तुम्हारी स्वर्ग से बढ़ कर, लोग जनम लेने को तरसें।
कैसे तेरा क़र्ज़ चुकाएं, खून की एक-एक बूँद चढ़ाएं,
जब-जब जन्म हो इस धरती पर, तेरी खातिर ही मर जाएँ।
वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।
वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।


-- ज्ञानचंद मर्मज्ञ

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी देशभक्ति पूर्ण रचना...आनंद आया..आभार

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  2. इतनी सुंदर रचना पढावने के लिए आभार !!

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  3. वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्। वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्। सत्य-सुधा बरसाने वाली, प्रेम भक्ति दरशाने वाली, सबके दिल में मानवता का जग-मग दीप जलाने वाली। जात-पात का का भेद मिटा कर सबको गले लगाने वाली,राष्ट्रप्रेम, सद्भाव, प्रीती का मन में भाव जगाने वाली। शान्ति, अहिंसा, करुना, ममता जन-जन तक फैलाने वाली, विश्व-बन्धु और भाईचारा दुनिया को सिखलाने वाली। वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।
    वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम्।
    sachche dil se likhi gayi adbhut rachna,deshbhakti ki bhavnaaye kut kut kar bhari hui hai .aabhar....

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  4. सहज एवं सरल शब्द योजना और प्रांजलता से युक्त
    सुन्दर भावाभिव्यक्ति। आभार।

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  5. आभार इस शानदार प्रस्तुति का.

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  6. मर्मज्ञ जी अविधा के कवि हैं ! आपके शब्द में ही आपकी व्यंजना छुपी होती है !! बोल-चाल के शब्दों का इतना कलात्मक प्रयोग बहुत कम देखने को मिलता है !! एक-एक शब्द भारत माता की प्रकृति, सौन्दर्य, नीति, रीती, द्युति, यश और तेज को उजागर कर रहा है........... वन्दे-मातरम् !!

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