महात्मा
गांधी हत्या केस-35
24 जनवरी,
1948
24
जनवरी को अपने एक मित्र को लिखे पत्र में अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए गांधीजी ने
कहा था कि वे तो राम के सेवक हैं। उनकी जब-तक इच्छा होगी
वे अपने सभी काम सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य की राह पर चलते हुए निभाते रहेंगे।
उनके सत्य की राह के, ईश्वर ही साक्षी हैं।
मनु
के पिता और अपने भतीजे जयसुखलाल गांधी को पत्र लिखकर गांधीजी ने बताया कि अगर
ईश्वर ने चाहा तो वे फरवरी में सेवाग्राम जाएंगे।
एक और पत्र में उन्होंने लिखा, “अगर कोई मुझे जान से मारना चाहता है तो मार दे, परन्तु मेरे मन में उस मारने वाले के प्रति जरा भी विद्वेष न होगा। मेरी तो इच्छा है कि उस हत्यारे का शिकार होकर भी मैं मुस्कराता रहूं और मेरे ओठों पर राम का नाम हो।”
लाहौर
से डॉ. सुशीला नय्यर का पत्र आया कि वह पाकिस्तान के शरणार्थी पुनर्वास मंत्री
ग़ज़नफ़ार अली ख़ान से मिलीं और उनके साथ विभिन्न समस्याओं पर काम की बातें हुईं।
प्रार्थना
सभा में उन्होंने उस दिखावे और शान-शौकत के जुनून की निंदा की, जो नई-नई आज़ादी के नशे में लोगों पर छा गया
था। आज़ादी का मतलब शान-शौकत या दिखावा नहीं है। हमें अपनी चादर के हिसाब से ही
पैर पसारने चाहिए। अपनी गरीबी छिपाने में कोई भलाई नहीं है। दुनिया में भारत की
हैसियत उसकी नैतिक श्रेष्ठता पर निर्भर करेगी, जो
उसे उसके अहिंसक प्रतिरोध (सत्याग्रह) से मिली है। इस मामले में अभी उसका कोई
मुकाबला नहीं है। दूसरे देश, चाहे
बड़े हों या छोटे, अपने हथियारों और सैन्य वीरता पर गर्व करते
हैं। वही उनकी पूंजी है। भारत के पास सिर्फ़ अपनी नैतिक पूंजी है, जो खर्च करने से बढ़ती है। किसी और स्थिति में, कांग्रेस का यह दावा कि सत्ता में आने पर वह
मूल्यों में क्रांति लाएगी, बेकार
हो जाएगा।
हत्या
की साज़िश
23
की शाम दिल्ली पुलिस के दोनों अधिकारी ट्रेन से निकले और चौबीस घंटे बाद राजधानी
लौट आए। 24 की शाम को स्टेशन से वे सीधे अपने हेडक्वार्टर गए। दिल्ली पुलिस
मुख्यालय में जसवंत सिंह और बालकिशन द्वारा बंबई दौरे की रिपोर्ट सौंपी गई और बताया
कि बॉम्बे में उनका अनुभव कैसा रहा। यह बताया गया कि करकरे सेठ को गिरफ़्तार नहीं
किया गया है और न ही ‘हिन्दू राष्ट्र’ के संपादक की शिनाख़्त की गई है। उन्होंने
अपने सीनियर अधिकारियों को यह भी बताया कि बॉम्बे में उनके साथ कैसा बुरा बर्ताव
किया गया। उन्होंने शिकायत की, "हमें
तो एक तरह से 'नज़र-क़ैद' [house arrest] में रखा गया था।" दिल्ली पुलिस और बंबई पुलिस के बीच
तालमेल का अभाव था। होटल से प्राप्त धोने के लिए दिए गए कपड़ों पर जो नामाक्षर थे (N.V.G.) उसके बारे में बंबई पुलिस को जानकारी नहीं दी
गई। इसी तरह से बंबई के जैन द्वारा दी गई जानकारियों को दिल्ली पुलिस को नहीं
बताया गया।
***
आगरा
से करकरे ने बंबई के लिए ट्रेन पकड़ी। रात में उसने इटारसी में ट्रेन बदली। फिर वह
कल्याण में उतर गया और वहां से दूसरी ट्रेन पकड़ी।
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होटल
आर्य पथिक आश्रम का मालिक दुबे ने आप्टे के लिए दो बेड के कमरे की व्यवस्था कर दी।
आप्टे ख़ुश हो गया। नाथूराम विक्टोरिया टर्मिनस के पास एलफिन्सटन होटल में एन.
विनायकराव नाम से शिफ़्ट कर गया। आप्टे अपने रूम में मनोरमा को बुला लेता है।
नाथूराम एक-दो सिनेमा देखकर समय बिताता है।
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गोपाल
गोडसे, जो
अभी भी छुट्टी पर था, हर
सुबह-शाम आप्टे के घर जाकर पूछता था कि क्या आप्टे की पत्नी को अपने पति से कोई
खबर मिली है; और जब
24 तारीख की सुबह उसे खुद नाथूराम से यह संदेश मिला कि वह और आप्टे बॉम्बे आ गए
हैं, तो वह
तुरंत आप्टे की पत्नी के पास गया और उन्हें यह बात बताई। उसने उनसे यह भी कहा कि
जैसे ही उन्हें अपने पति से कोई खबर मिले, वह तुरंत उसे इसकी सूचना दें।
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मनोज कुमार
पिछली कड़ियां- महात्मा गांधी हत्या केस
संदर्भ : यहाँ पर
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