मंगलवार, 22 दिसंबर 2009

स्मृति शिखर से


-- करण समस्तीपुरी

स्मृति शिखर से चला प्रखर,

वह मधुर पवन, वह मुखर पवन !

उर सिहर गया क्षण ठहर गया,

और अतीत बना दर्पण !!

स्मृति शिखर से चला प्रखर,

वह मधुर पवन, वह मुखर पवन !


कर यत्न दिया विश्राम इसे !

पीड़ा उर की बतलाऊं किसे !!

यह काल आवरण ओढ़ परी !

स्मरण पटल में जा गहरी !

पर पुनः पवन से पा जीवन,

फिर जाग उठी यादों की अगन !

स्मृति शिखर से चला प्रखर,

वह मधुर पवन, वह मुखर पवन !!


नीरव नीर में शांत शिथिल,

दृग में अतीत का स्वप्न लिए,

किस्मत को कौन बदल सकता,

क्या मिला बहुत प्रयत्न किए !

जगा गयी स्मरण विहग को,

अरुणोदय की तीक्ष्ण किरण !

स्मृति शिखर से चला प्रखर,

वह मधुर पवन, वह मुखर पवन !!


अकुला कर दीन विहग बोला,

अलसाई निज पलकें खोला !

सुदीर्घ रात का प्रात जान,

खग उड़ा नीड़ से पंख तान !

पंक्षी पर अंकुश कौन रखे,

पा गया निमिष में दूर गगन !!

स्मृति शिखर से चला प्रखर,

वह मधुर पवन, वह मुखर पवन !!


अम्बर का अंत कहाँ पावे,

बीते हुए कल कैसे आवे !

आ गया गगनचर फिर थक के,

आशा फिर मिलने की रख के !

उर धीर भरा, सुर पीर भरा,

हो गाने लगा वह मस्त मगन !

स्मृति शिखर से चला प्रखर,

वह मधुर पवन, वह मुखर पवन !!

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सोमवार, 21 दिसंबर 2009

ब्लेसिंग

-- मनोज कुमार


में आई कम-इन सर?

यस कम इन।

गुड मार्निंग सर।

मार्निंग

कैन आई सिट सर?

ओह यस-यस प्लीज ।..................अरे तुम ? अगर तुम अपने ट्रांसफर की बात करने आए हो, तो सॉरी, तुम जा सकते हो।

नहीं सर मैं तो...आपके...........।

देखो तुम जब से इस नौकरी में हो, यहीं, इसी मुख्यालय में ही काम करते रहे हो। तुम्हारे कैरियर के भले के लिए तुम्हें अन्य कार्यालय में भी काम करना चाहिए। और गोविन्दपुर में जो हमारा नया ऑफिस खुला है , उसके लिए हमें एक अनुभवी स्टाफ की आवश्यकता थी। हमें तुमसे बेहतर कोई नहीं लगा।

सर मैं तो इस विषय पर बात ही नहीं करने आया। मैं तो उसी दिन समझ गया था जिस दिन ट्रांसफर ऑर्डर निकला था कि आपने जो भी किया है मेरी भलाई के लिए ही किया है। मैं तो कुछ और ही बात करने आया हूँ।

ओ.के. देन ... बोलो...............।

सर वो,.............थोड़ा लाल बत्ती जला देते । कोई बीच में न आ जाए।

देखो तुम घूम-फिर कर कहीं ट्रांसफर वाली बात तो नहीं करोगे।

नहीं सर। बिल्कुल नहीं। कुछ पर्सनल है सर।”

क्या?

सर मेरे पिता जी काफी बूढ़े हो गए हैं। उनकी इच्छा थी कि मैं एक गाड़ी खरीदूँ और उन्हें उस गाड़ी में इस पूरे महानगर में घुमाऊँ।

तो इसमें मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूँ ?

सर ! बस आपकी ब्लेसिंग चाहिए। आप तो इसी महीने के अन्त में सेवानिवृत होकर चले जाएंगे। सुना है आपके पास एक गाड़ी है।

हां है तो। वो 80 मॉडल गाड़ी हमेशा गराज में पड़ी रहती है।

सर उसे .....आप ............।

अरे बेवकूफ वो तुम्हारे किस काम आएगी। पिछले चार सालों में उसकी झाड़-पोछ भी नहीं की गई है। उसे तो कोई पांच हजार में भी नहीं खरीदेगा। उससे ज़्यादा तो उसे मुझे अपने होमटाउन ले जाने का भाड़ा लग जाएगा। मैं तो उसे यहीं छोड़................।

सर मैं खरीदूंगा सर। आप बीस हजार में उसे मुझे बेच दीजिए।

पर...................लेकिन .......गराज..........नहीं ...नहीं।

सर। प्जीज सर। नई गाड़ी तो मेरी औकात के बाहर है। कम से कम इससे मैं अपने माता-पिता का सपना उनके प्राण-पेखरू उड़ने के पहले पूरा तो कर लूंगा।

यू आर टू सेंटिमेंटल टूवार्डस योर पैरेंट्स। आई शुड रिस्पेक्ट इट। ओ.के. ... डन। आज से, नहीं-नहीं अभी से गाड़ी तुम्हारी।

थैंक्यू सर।... पर एक प्रॉब्लम है सर।

क्या?

आपकों तो मालूम है कि मैं गाड़ी चलाना ठीक से नहीं जानता। नया-नया सीखा हूं। अब मेरे घर, माधोपुर से तो इस ऑफिस तक का रास्ता बड़ा ठीक-ठाक है, भीड़-भाड़ भी नहीं रहती, किसी तरह आ जाऊंगा। पर सर आप तो जानते ही हैं कि गोविन्दपुर का रास्ता....................... वहां तो शायद मैं इस कार को नहीं ले जा पाऊँगा।

दैट्स ट्रू। ब्लडी दैट एरिया इज भेरी बैड। पूरा रास्ता टूटा-फूटा है। उस पर से भीड़ भाड़, .... यू हैव ए प्वाईंट।...............मिस जुली.......जरा इस्टेब्लिशमेंट के बड़ा बाबू को ट्रांसफर ऑर्डर वाली फाईल के साथ बुलाइए।

थैंक्यू सर। गुड डे सर।

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