गांधी और गांधीवाद
444. चौथा जानलेवा हमला
1946
28 जून 1946 को गांधीजी मुंबई से पूना के लिए रवाना हुए। 28-29 जून की रात को वह विशेष ट्रेन
जिससे गांधी जी पूना जा रहे थे, अचानक ज़ोर से उछली। पता चला कि किसी ने पटरियों पर
बोल्डर रख दिए थे। नेरल और कर्जत स्टेशनों के बीच पटरी पर डाली गयी चट्टानों से ट्रेन
टकरायी।
ऐसा लगता था कि किसी ने जानबूझ कर ऐसा किया था और वह ट्रेन को
दुर्घटनाग्रस्त करना चाहता था। इंजन को क्षति पहुंची। किन्तु ड्राइवर पेरेरा ने
अपनी सूझ-बूझ से गाड़ी को सुरक्षित रोक लिया और उसे किसी बड़े हादसे का शिकार होने
से बचा लिया।
अगले
दिन पूना की प्रार्थना सभा में गांधी जी ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा, “शायद यह सातवीं बार है जब ईश्वर ने
मुझे मौत के मुंह से बचा लिया। मैंने आज तक किसी व्यक्ति को शारीरिक क्षति या कष्ट
नहीं पहुंचाया, न ही किसी से शत्रुता की है। फिर भी कोई मेरी जान लेने पर क्यों
उतारू है यह मेरी समझ से परे है। पर ऐसा हुआ है। ऐसा सभी देश में होता आया है। फिर
भारत में क्यों नहीं?”
*** *** ***
मनोज कुमार
पिछली कड़ियां- गांधी
और गांधीवाद
संदर्भ : यहाँ पर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपका मूल्यांकन – हमारा पथ-प्रदर्शक होंगा।