शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

शिवस्वरोदय-37

शिवस्वरोदय-37

आचार्य परशुराम राय

इन श्लोकों में पाँच तत्त्वों का शरीर में स्थान और उनके गुणों पर प्रकाश डाला गया है।

अस्थिमांसं त्वचा नाडी रोमञ्चैव तु पञ्चमम्।

पृथ्वीपञ्चगुणा प्रोक्ता ब्रह्मज्ञानेन भाषितम्।।192।।

अन्वय – यह श्लोक अन्वित क्रम में है। अतएव अन्वय नहीं दिया जा रहा है।

भावार्थ – पृथ्वी तत्त्व के पाँच गुण अस्थि, मांस, त्वचा, स्नायु तथा रोम बताए गए हैं, ऐसा ब्रह्मज्ञानियों का मानना है।

English Translation – Bone, flesh, skin, nerves and hair have been considered as five properties of Prithivi Tattva, thus said by wises.

शुक्रशोणितमज्जाश्च मूत्रं लाला च पञ्चमम्।

आपः पञ्चगुणाप्रोक्ता ब्रह्मज्ञानेन भाषितम्।।193।।

अन्वय – यह श्लोक भी अन्वित क्रम में है।

भावार्थ – शुक्र (वीर्य), रक्त, मज्जा, मूत्र और लार ये पाँच गुण जल तत्त्व के माने गए हैं, ऐसा ब्रह्मज्ञानियों का कहना है।

English Translation - Semen, blood, marrow, urine and saliva are said to be the properties of Jala Tattva according to the wise people.

क्षुधा तृषा तथा निद्रा कान्तिरालस्यमेव च।

तेजः पञ्चगुणा प्रोक्ता ब्रह्मज्ञानेन भाषितम्।।194।।

अन्वय – यह श्लोक भी अन्वित क्रम में है।

भावार्थ – भूख, प्यास, नींद, शारीरिक कान्ति और आलस्य ये पाँच गुण अग्नि तत्त्व के कहे गए हैं, ऐसा ब्रह्मज्ञानी कहते हैं।

English Translation – There are five properties, i.e. hunger, thirst, sleep, body glow and laziness, of Agni Tattva, thus it has been told by the wise people.

धावनं चलनं ग्रन्थिः संकोचनप्रसारणम्।।

वायो पञ्चगुणा प्रोक्ता ब्रह्मज्ञानेन भाषितम्।।195।।

अन्वय – यह श्लोक भी अन्वित क्रम में है।

भावार्थ – वायु तत्त्व के पाँच गुण- दौड़ना, चलना, ग्रंथिस्राव, शरीर का संकोचन (सिकुड़ना) और प्रसार (फैलाव) बताए गए हैं, ऐसा ब्रह्मज्ञानी कहते हैं।

English Translation – Similarly five functions of our body, i.e. running, walking, gland secretion, contraction and expansion, are the properties of Vayu Tattva in the opinion of wises.

रागद्वेषौ तथा लज्जा भयं मोहश्च पञ्चमः।

नभः पञ्चगुणा प्रोक्ता ब्रह्मज्ञानेन भाषितम्।।196।।

अन्वय – यह श्लोक भी अन्वित क्रम में है।

भावार्थ – राग, द्वेष, लज्जा, भय और मोह आकाश तत्त्व के ये पाँच गुण कहे गए हैं, ऐसा ब्रह्मज्ञानियों का मत है।

English Translation – Attachment, jealousy, shame, fear and attraction are the properties of Akasha Tattva according to the wise people.

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10 टिप्‍पणियां:

  1. इन श्लोकों की सुंदर और अर्थपूर्ण व्याख्या के लिए आपका धन्यवाद

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  2. बहुत ही संक्षेप में किया गया शरीर के अन्दर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, तथा आकाश तत्वों का स्पष्टीकरण ज्ञानवर्धक है। आभार

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  3. रागद्वेषौ तथा लज्जा भयं मोहश्च पञ्चमः।
    नभः पञ्चगुणा प्रोक्ता ब्रह्मज्ञानेन भाषितम्।।196।।


    सचमुच बहुत महत्वपूर्ण श्लोक है यह...

    जानकारी भरी पोस्ट के लिए आपका आभार.

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  4. ज्ञानवर्धक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए बहुत बहुत आभार,

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  5. आद. आचार्य जी,
    पृथ्वी,जल,वायु,अग्नि और आकाश के गुण मिलकर ही मनुष्य को प्रकृति का अनुपम वरदान बनाते हैं !
    आपका लेख इस तथ्य का भी पोषक है कि संभवतः मनुष्य को प्रकृति का सानिद्ध्य अच्छा लगने के पीछे यही कारण हो !

    इस ज्ञानवर्धक लेख के लिए धन्यवाद!

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  6. उपयोगी ज्ञान का भण्डागार !
    ब्लोगर बंधुओं को उपहार !!
    आचार्यवर को नमस्कार !!!

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  7. इन श्लोकों की सुंदर व्याख्या के लिए आपका कोटिश धन्यवाद

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  8. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (2.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  9. उम्दा जानकारी से भरपूर आलेख।
    आभार।

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