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गुरुवार, 22 मार्च 2012

जल का संचय !

22 मार्च - विश्‍व जल दिवस के अवसर पर

जल का संचय !

IMG_0130_thumb[1]मनोज कुमार

जान लें

सूखती जा रही है धरा की कुक्षि

दिन ब दिन गिर रहा है स्तर जल का

करें कल्पना उस पल का

आने वाले भयानक कल का!

 

जब समस्या होगी विकट

पृथ्वि पर होगा जल का संकट

लोग हैरान होंगे

हालात से परेशान होंगे

भयावह है आने वाला कल

जल जब न होगा

सारा जग जाएगा जल।

 

इसी लिये आज से ही बूंद-बूंद बचाओ जल!

वरना हो जाएगा बिन पानी जग सून!

 

बापू ने कहा था

‘प्रकृति हमारी ज़रूरतों को तो

कर सकती है पूरा

लेकिन हमारे लालच को नहीं।’

 

सिंचाई पंप का इस्तेमाल

तालाब पाट कर बनते बस्तियों का जाल

औद्योगीकरण विशाल

शहरीकरण का कमाल

कि दुनिया में

एक अरब से अधिक लोगों के जीने को

मिलता नहीं साफ़ पानी पीने को

 

सच है यह कि

संसार में तीन चौथाई भाग पानी है

सागर है, ग्लेशियर है, खाड़ियां हैं

पर इनका जल हमारे किस काम का?

ये तो नमकीन है

इंसान को जीने के लिए

जो साफ़ जल है पीने के लिए

तीन प्रतिशत से भी कम

 

पानी

यानी

आबरू, इज़्ज़त, गौरव, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान

सब धरा रह जाएगा ...!

 

पानी

यानी

आभा, कांति, चमक

सब फींकी पड़ जाएगी …!

 

पानी

यानी

जौहर और धार

हम किसे दिखाएंगे .....!

 

पानी

यानी

अंबु, अंभ, अप, क्षीर

आप, आब, उदक, नीर

तोय, पय, पानीय, वन

वारि, सलिल, पाथ, जीवन

हां, जल ही है जीवन !

 

जल जीवन, जीवन जल

जल बिन जीवन ...  जल-जल

चाहिए तुझे यदि हरपल पय

कर मानव तू जल का संचय,

जल का संचय!!