सोमवार, 19 मार्च 2012

टुकड़ों के लिए चुना


टुकड़ों के लिए चुना

श्यामनारायण मिश्र

हीरामन !
बहुत हुआ राम-राम रटना।
पंख लिखे नभ के
     इतिहास का उलटना।

बंसवट की चहचह
     कोटर की कुटकुट,
भूल गए
धूप-छांव छतनारे झुरमुट।
टुकड़ों के लिए
     चुना पिंजड़े में खटना।
हीरामन !
मुश्किल है समय से निपटना।

तुमने भी मान लिया
     राजा औ’ रानी।
क्या हुआ ?
कटीले झरने का पानी।
व्यर्थ है नई इस
     सुबह को डपटना।
हीरामन !
घटने को आज नई घटना।

छोड़ो भी
अब यह ठकुर-सुहाती।
सपनों के चम्पागढ़
     पहुंचाना पाती।
भोर भये दिल्ली
     सांझ भये पटना।
हीरामन !
बहुत हुआ नयौते सा बंटना।

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति।
    धन्य हुआ ।।

    टुकड़ों की खातिर खटे, हीरामन मनमार ।

    बेफिक्री में कब उड़े, नहीं कभी इतवार ।|

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  2. बहुत बढ़िया....

    भूल गए
    धूप-छांव छतनारे झुरमुट।
    टुकड़ों के लिए
    चुना पिंजड़े में खटना।
    हीरामन !
    मुश्किल है समय से निपटना।

    शुक्रिया.

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  3. "मुश्किल है समय से निपटना।"
    सुन्दर प्रस्तुति!
    आभार!

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  4. बंसवट की चहचह
    कोटर की कुटकुट,
    भूल गए
    धूप-छांव छतनारे झुरमुट।
    टुकड़ों के लिए
    चुना पिंजड़े में खटना।
    हीरामन !
    मुश्किल है समय से निपटना।

    ....सच में मुश्किल है समय से निपटना...बहुत सटीक और सुंदर अभिव्यक्ति...

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  5. ..सच में मुश्किल है समय से निपटना...बहुत सटीक और सुंदर अभिव्यक्ति..बहुत सुंदर रचना,......

    MY RESENT POST... फुहार....: रिश्वत लिए वगैर....

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  6. भूल गए
    धूप-छांव छतनारे झुरमुट।
    टुकड़ों के लिए
    चुना पिंजड़े में खटना।
    हीरामन !
    मुश्किल है समय से निपटना।

    बहुत सुंदर नवगीत ....

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  7. हीरामन !
    मुश्किल है समय से निपटना।
    - व्यक्त हुआ अनायास (हीरा) मन का उचटना !

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  8. रची उत्कृष्ट |
    चर्चा मंच की दृष्ट --
    पलटो पृष्ट ||

    बुधवारीय चर्चामंच
    charchamanch.blogspot.com

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  9. टुकड़ों के लिए
    चुना पिंजड़े में खटना।
    हीरामन !
    मुश्किल है समय से निपटना
    SUNDAR.

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  10. श्याम नारायण मिश्र जी तो नवगीत के पुरोधा हैं.
    उनके नवगीतों का जवाब नहीं.

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  11. बहुत प्यारी कविता है, नौकरीपेशा लोग भी हीरामन जैसे नज़र आ रहे हैं। अपनी हालत पर कहा।

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