शुक्रवार, 3 जून 2011

शिवस्वरोदय-45

शिवस्वरोदय-45

आचार्य परशुराम राय

अङ्गुष्ठतर्जनीवंशे पादाङ्गुष्ठे तथा ध्वनिः।

युद्धकाले च कर्त्तव्यो लक्षयोद्धु जयीभवेत्।।244।।

अन्वय - युद्धकाले अङ्गुष्ठतर्जनीवंशे पादाङ्गुष्ठे तथा ध्वनिः च कर्त्तव्यो लक्षयोद्धु जयीभवेत्।

भावार्थ युद्ध के दौरान हाथ के अंगूठे तथा तर्जनी से अथवा पैर के अंगूठे से ध्वनि करने वाला योद्धा बड़े-बड़े बहादुर को भी युद्ध में पराजित कर देता है।

English Translation – During the war creation of sound with thumb and index finger or with big toe gives victory even over mightiest enemy.

निशाकरे रवौ चारे मध्ये यस्य समीरणः।

स्थितो रक्षेद्दिगन्तानि जयकाञ्क्षी गतः सदा।।245।।

अन्वय - जयकाञ्क्षी निशाकरे रवौ चारे मध्ये यस्य समीरणः स्थितो दिगन्तानि गतः सदा रक्षेत्।

भावार्थ विजय चाहनेवाला वीर चन्द्र अथवा सूर्य स्वर में वायु तत्त्व के प्रवाहकाल के समय यदि किसी भी दिशा में जाय तो उसकी रक्षा होती है।

English Translation – A hero, who is desirous of victory, can move in any direction when Vayu Tattva is active in any Swara, i.e. running of breath through left or right nostril (but not during the time when it is running through both the nostrils at a time).

श्वासप्रवेशकाले तु दूतो जल्पति वाञ्छितम्।

तस्यार्थः सिद्धिमायाति निर्गमे नैव सुन्दरि।।246।।

अन्वय यह श्लोक अन्वित क्रम में है।

भावार्थ भगवान शिव कहते हैं, हे सुन्दरी (माँ पार्वती), एक दूत को अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए उसे साँस लेते समय अपनी मनोकामना व्यक्त करनी चाहिए। परन्तु यदि वह श्वास छोड़ते समय अपनी मनोकामना व्यक्त करता है, तो उसे सफलता नहीं मिलती।

English Translation – Lord Shiva said, “O Beautiful Goddess, If a messenger expresses his desires while breathing in, he succeeds to get them fulfilled. But if the desire is expressed while breathing out, it never gets fulfilled.

लाभादीन्यपि कार्याणि पृष्ठानि कीर्तितानि च।

जीवे विशति सिद्धयन्ति हानिर्निःसरणे भवेत्।।247।।

अन्वय जीवे विशति लाभादीन्यपि कार्याणि पृष्ठानि कीर्तितानि च सिद्धयन्ति हानि निःसरणे हानिः भवेत्।

भावार्थ जो कार्य साँस लेते समय किए जाता है, उसमें सफलता मिलती है। पर साँस छोड़ते समय किए गए कार्य में हानि होती है।

English Translation – The success is achieved in a work when it is done while breathing in and it causes loss if done while breathing out.

नरे दक्ष स्वकीया च स्त्रियां वामा प्रशस्यते।

कुम्भको युद्धकाले च तिस्रो नाड्यस्त्रयीगतिः।।248।।

अन्वय - नरे दक्ष स्वकीया च स्त्रियां वामा प्रशस्यते युद्धकाले कुम्भको च तिस्रो नाड्यस्त्रयीगतिः।

भावार्थ दाहिना स्वर पुरुष के लिए और बाँया स्वर स्त्री के लिए शुभ माना गया है। युद्ध के समय कुम्भक (श्वास को रोकना) फलदायी होता है। इस प्रकार तीनों नाड़ियों के प्रवाह भी तीन प्रकार के होते हैं।

English Translation – Flow of breath through right nostril is auspicious for gents and breath of left for ladies. Holding of breath during war is useful. Thus there three types flow of breath as there are three types of nadis.

हकारस्य सकारस्य विना भेदं स्वरः कथम्।

सोSहं हंसपदेनैव जीवो जपति सर्वदा।।249।।

अन्वय श्लोक अन्वित क्रम में है।

भावार्थ स्वर ज्ञान “हं” और “सः” में प्रवेश किए बिना प्राप्त नहीं होता। “सोSहं” अथवा “हंस” पद (मंत्र) के सतत जप द्वारा स्वर ज्ञान की प्राप्ति होती है।

English Translation – Ham and Sah are the door to acquire the knowledge of Swar science. It is said that continued repetition of Soham or Hamsah is the key for enlightenment through Swar science.

शून्याङ्गं पूरितं कृत्वा जीवाङ्गे गोपयेज्जयम्।

जीवाङ्गे घातमाप्नोति शून्याङ्गे रक्षते सदा।।250।।

अन्वय श्लोक अन्वित क्रम में है।

भावार्थ आपत्ति सदा सक्रिय स्वर की ओर से आती है। अतएव आपत्ति के आने की दिशा ज्ञात होने पर निष्क्रिय स्वर को सक्रिय करने का प्रयास करना चाहिए। निष्क्रिय स्वर सुरक्षा देता है।

English Translation – The problem arises always from the side through which nostril the breath is running. Therefore if the direction of the arising problem is known, we should make efforts to change the side of breath. Because the side is always safe through which breath is inactive.

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10 टिप्‍पणियां:

  1. इस पोस्ट में बड़े-बड़े घोटालेबाज़ों के लिए भी सूत्र छिपे हुए हैं!

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  2. जीवन के लिए उपयोगी सूत्र पिरोए गये हैं इस पोस्ट में!
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    सहेजने योग्य है सभी श्लोक!

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  3. बहुत ज्ञानवर्धक बातें पढ़ने को मिलीं.आभार.

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  4. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (04.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:-Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
    स्पेशल काव्यमयी चर्चाः-“चाहत” (आरती झा)

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  5. बहुत ज्ञानवर्धक बातें पढ़ने को मिलीं|धन्यवाद|

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  6. हमेशा की तरह एक बार फिर ढ़ेर सारी ज्ञान की बातें।

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  7. शिवस्वरोदय का ज्ञान अद्भुत है। प्रस्तुति के लिए आभार

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