सोमवार, 20 जून 2011

नवगीत - गीत मेरे अर्पित हैं

श्यामनारायण मिश्र का नवगीत

गीत मेरे अर्पित हैं

ख़ून की उबालों को,

क्रांति की मशालों को

गीत मेरे अर्पित हैं

 

तोतली जुबानों पर

दूनिया-पहाड़ों के

अंक जो चढाते हैं

तंग हुए हाथों से

आलोकित माथों से

ज्ञान जो लुटाते हैं,

विद्याधन वालों को,

फटे हुए हालों को

गीत मेरे अर्पित हैं।

खेत में, खदानों में

मिलों कारखानों में,

जोखिम जान के लिए,

पांजर भर गात नहीं

आतों भर भात नहीं,

सदियों से ओठ सिए

खाट के पुआलों को,

लेटे कंकालों को,

गीत मेरे अर्पित हैं।

खेतों की मेड़ों पर,

शीशम के पेड़ों पर,

बांधते मचानों को

माटी को पूज रहे,

माटी से जूझ रहे,

परिश्रमी किसानों को

स्वेद भरे भालों को

फावड़े-कुदालों को

गीत मेरे अर्पित हैं।

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया नवगीत पढवाया आपने. आभार

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  2. बहुत लाजवाब नवगीत है ... शुक्रिया ...

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  3. मिटटी को स्वर देती सुन्दर नवगीत....

    उत्तर देंहटाएं
  4. मिटटी को स्वर देती सुन्दर नवगीत....

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  5. तंग हुए हाथों से

    आलोकित माथों से

    ज्ञान जो लुटाते हैं,

    विद्याधन वालों को,

    फटे हुए हालों को

    गीत मेरे अर्पित हैं। ...

    Great presentation Manoj ji !

    .

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  6. गीत में गाँव को गुनगुना के अच्छा लगा... बेहद प्रभावशाली नवगीत....

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  7. "गीत मेरे अर्पित हैं" बहुत दिनों पढ़ने को मिला। आदरणीय मिश्र जी मुखारविन्द से इसे कई बार सुना गया, पर मन नहीं भरता था। बहुत अच्छा गीत। साधुवाद।

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  8. bar bar padhne ko man hua...mano koi sondhi khushbu uth rahi ho...lekin sath hi garibi ke halaat bayan karti prabhavshalli rachna.

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  9. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 21 - 06 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच-- 51 ..चर्चा मंच

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  10. मिश्र जी के नवगीत तो एक मशाल हैं.. जब भी पढ़ा है (आपके सौजन्य से मनोज जी) आनंदित हुआ हूँ, लाभान्वित हुआ हूँ!! यह गीत उसी की एक कड़ी है!!

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  11. माटी को पूज रहे,

    माटी से जूझ रहे,

    परिश्रमी किसानों को

    स्वेद भरे भालों को

    फावड़े-कुदालों को

    गीत मेरे अर्पित हैं।
    --

    लाजवाब नवगीत!

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  12. बढ़िया नवगीत....प्रभावशाली

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  13. परिश्रमी किसानों को

    स्वेद भरे भालों को

    फावड़े-कुदालों को

    गीत मेरे अर्पित हैं।

    bahut sunder shabdon ka chayan.bemisaal rachanaa.badhaai aapko.

    please visit my blog.thanks.

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  14. तंग हुए हाथों से

    आलोकित माथों से

    ज्ञान जो लुटाते हैं,

    विद्याधन वालों को,

    फटे हुए हालों को

    गीत मेरे अर्पित हैं। ..
    .बेहद प्रभावशाली नवगीत....धन्यवाद

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  15. यह गीत बहुत अच्छा लगा ... बहुत सुन्दर भाव हैं इस गीत के ..

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  16. और हमारी शुभकामनायें समर्पित है आपकी लेखनी को

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  17. बहुत सुन्दर नव गीत सुन्दर शैली सभी क्षेत्र दिखाया आपने
    निम्न बहुत अच्छा -

    मिलों कारखानों में,

    जोखिम जान के लिए,

    पांजर भर गात नहीं

    आतों भर भात नहीं,
    शुक्ल भ्रमर ५

    उत्तर देंहटाएं

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