शनिवार, 3 अप्रैल 2010

चिठियाना-टिपियाना संवाद : अध्याय - 4

चिठियाना-टिपियाना संवाद : अध्याय - 4

-- मनोज कुमार


उस दिन चिठियाना बहुत उदास बैठा था। पता नहीं किस उलझन में था.... । छदामी लाल ने उदासी का कारण जानना चाहा....। लेकिन उदास चिठियाना ने कुछ जवाब नहीं दिया। तभी टिपियाना का आविर्भाव हुआ। आज अपने चिर-सखा को उदास देख टिपियान को बहुत सदमा लगा। टिपियाना को देख चिठियाना को भी कुछ संबल मिला। उसने सोचा चलो पुराने यार से बातें कर के उलझन सुलझे न सुलझे..... दिल तो हल्का हो जाएगा । दुआ-सलाम के बाद शुरू हुआ दोनों का संभाषण !


चिठियाना : भाई सिक्कों की खनक तो सुनी ही होगी तुमने। सिक्के एक, दो, पांच के मूल्य वाले हैं पर आवाज़ ज़्यादा निकालते हैं। वहीं दस, बीस, पचास, सौ, पांच सौ और हज़ार के नोट शांत होते हैं, ख़ामोश रहते हैं।

टिपियाना : हाँ ! क्यूंकि उनका मूल्य अधिक होता है। जैसे-जैसे महत्व एवं उपयोगिता बढ़ती जाती है व्यक्ति उत्तेजनारहित और शांत होता जाता है। यह स्थिति तो ज्ञान के संचय से ही आती है। इस अवस्था में जीवन सुंदर होता है।

चिठियाना : सुंदर जीवन बस यूं ही नहीं हो जाता। इसे रोज़ बनाना पड़ता है अपनी प्रार्थनाओं से, नम्रता से, त्याग से एवं प्रेम से। जीवन में हर कोई सफलता की ऊँचाई प्राप्त करना चाहता है। पर आप कितनी ऊँचाई प्राप्त कर सकते हैं तबतक नहीं जान पाते जबतक आप उड़ान भरने के लिए अपने पंख नहीं फैलाते।

टिपियाना : हाँ, यार ! ज़िन्दगी चॉकलेट के बक्से की तरह है। चॉकलेट के बक्से का प्रत्येक चॉकलेट ज़िन्दगी के एक हिस्से के समान होता है। कुछ क्रंचि (करड़-मरड़ की आवज़) है, तु कुछ नट्टी (काष्ठफल के स्वाद वाला), वहीं कुछ हिस्स सॉफ्ट (मुलायम) है। पर सारे के सारे स्वादिष्ट! अतः जीवन के हर पल को एन्ज्वाय करें, मज़े लें, आनंद उठाएं।

चिठियाना : ज़िन्दगी में हम विभिन्न प्रकार के लोग से मिलते हैं। कुछ लोग अन्य की तुलना में हमारे ज़्यादा प्रिय हो जाते हैं। ऐसा क्यों होता है? इसका कारण यह नहीं है कि जब आप ऐसे लोग से मिलते हैं तो आपको अधिक ख़ुशी, प्रसन्नता का अनुभव होता बल्कि जब वे आपके पास नहीं होते, ईर्द-गीर्द नहीं होते तो आप बड़ा ख़ाली-ख़ाली महसूस करते हैं, अकेलापन का अनुभव करते हैं। ऐसे लोगों से ज़िन्दगी के मतलब बदल जाते हैं। ऐसे लोग हमारे हृदय तंतुओं को छूते हैं। हममें मधुर भावनाओं का संचार होता है।

टिपियाना : हाँ, लेकिन संबंध मधुर हो इसके लिए वाणी का भी बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। वाणी यदि कठोर हो तो किसी कोमल हृदय को क्या छूएगा? हां, कोमल वाणी से किसी भी कठोर हृदय प्राणी के दिल को जीता जा सकता है। इसलिए मधुर बोलें, मीठा बोलें, जग जीत जाएंगे।


चिठियाना : हमें ख़ुशी चाहिए। प्रसन्नता चाहिए। ज़िन्दगी हमें यूं ही ख़ुशियां नहीं दे देती। इसे हमें पाना होता है। ज़िन्दगी तो हमें टाइम और स्पेस देती है। यह तो हम पर निर्भर करता है कि हम इसे कैसे भरते हैं। जीवन के रास्ते सदैव समतल तो नहीं ही होते। कभी-कभी ऊँची चढ़ाई भी चढ़नी होती है। अब लोग कहते हैं भगवान का नाम लेकर चढ़ जाओ। भगवान का नाम लेकर चढने से पहाड़ छोटा नहीं हो जाता, हां हो सकता है चढना थोड़ा आसान हो जाए। मुश्किलें हल्की हो जाएं। पर यदि भगवान को याद ही करना है तो मुश्किलें आसान हो जाएं यह मांगने के वजाए हामारी पीठ और मज़बूत हों, यह मांगना चाहिए। ताकि जीवन की दुश्‍वारियों का सामना हम दृढ़ता से कर सकें। प्रार्थना से परिस्थिति नहीं बदल जाती। हां इससे परिस्थिति के प्रति हमारी सोच में बदलाव आ सकता है। हम और मज़बूत इरादों के साथ समस्या के सम्मुख खड़े हो पाते हैं।

टिपियाना : सही कहा भाई ! कई बार हम ऐसी परिस्थितियों में घिर जाते हैं कि हमें कोई राह नहीं सूझता। समस्या के समाधान को ले कर एक मत नहीं होता। मुद्दे पर आपस में तकरार शुरु हो जाता है। तरह-तरह की दलीलें आती हैं। किसी प्रश्‍न का अगर हल ढ़ूढ़ना हो तो तर्क-दलील से काम नहीं चलता। इसके लिए विचार-विमर्श ज़रूरी है। तर्क-दलील से हम यह तो पता लगा सकते हैं कि कौन सही है पर विचार-विमर्श से हमें यह पता चलेगा कि क्या सही है।

चिठियाना : ऐसा नहीं है कि ज्यों-ज्यों हम उम्रदराज़ होते जाते हैं तो हमारी मुस्कान कम होती जाती है। बल्कि सच तो ये है कि हम बूढ़े इसलिए दिखते हैं क्योंकि हमने मुस्कुरते रहना कम कर दिया है। इसलिए हम अपने आप को मुस्कान का उपहर दें और लंबी ज़िन्दगी जिएं।


टिपियाना : सत्य वचन ! आज मैं तुम्हारे बातों से सौ प्रतिशत सहमत हूँ। हम अगर जिन्दगी को मुस्कराने का मौका दें तो जिन्दगी हमें जिन्दगी भर मुस्कुराने का मौका देगी।


अमूमन चिठियाना-टिपियाना के तू-तू-मैं-मैं को बड़े मनोयोग से सुनने वाले छदामी लाल को आज दोनों के एकसुरी वार्ता सुन कर रहा नहीं गया। अचानक कह उठे, "धन्य हो महापुरुषों ! आपकी वाणी मिथ्या हो ही नहीं सकती !! जय हो !!!


(इतिश्री ब्लोगर-खंडे चिठियाना-टिपियाना संवादे मुस्कुराना नाम चतुर्थो अध्यायः!)


17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर लिखा मनोज जी इस चिठियाना-टिपियाना संवाद को आप ने,
    धन्यवाद

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  2. अच्छी पोस्ट है। शुक्रिया।

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  3. राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  4. चिठियाना-टिपियाना संवाद : अध्याय - 4--

    इस संवाद के माध्यम से पूरा जीवन दर्शन ही समझा दिया...बहुत बढ़िया पोस्ट...और लिखने कि शैली तो इतनी बढ़िया कि आनंद ही आ गया ....बधाई

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  5. बहुत ही लाजवाब शैली मे लिखा है आपने. मजा आगया जी.

    रामराम.

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  6. इस माध्यम से आपने बहुत ही अच्छी बात कह दी है ... वाणी कोमल होनी चाहिए ... खुशी के मौके ढूँढने चाहिएं ... अच्छा लिखा है ...

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  7. bahut sundar....
    conversation has now shaped into beautiful discourses on life's philosophy!
    nice...
    regards,

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