मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

किसे सुनाऊं अपने गीत

200* नॉट-उट। वाह.......... क्लब 200 में सचिन के साथ हम भी शामिल हो गए। ब्लॉग-सदस्यों को बधाई, पाठकों, समीक्षकों, शुभचिंतकों का आभार.... !! मित्रों ! कभी अंतरजाल का बाउंसर तो कभी पाठकों की गुगली झेलते हुए ब्लॉग-प्रविष्टि का दोहरा शतक हमने पार तो कर लिया..... लेकिन पिछले कुछ दिनों से मुझे लग रहा है कि जिनके साथ हमने पाली की शुरुआत की, हमारे मूलभूत पाठक, हमारे चिर-मार्गदर्शक हमें बिसराते जा रहे हैं.... अब तो हमारे ब्लॉग पर उनका पदार्पण भी कुम्भ के तर्ज़ पर होता है। पाली के दौरान पुराने बल्लेबाजों का आउट होना और नए बल्लेबाजों का आना तो खेल का हिस्सा है......... पर दोहरे शतक पर क्या आप हमें स्टैंडिंग ओवेशन नहीं देंगे..... ? कोई नहीं.... आपकी ख़ुशी....! हमारी किस्मत... !! 200 का आंकड़ा पार करने पर हम तो आप ही को समर्पित कर रहे हैं यह काव्य-प्रसून !-- करण समस्तीपुरी


किसे सुनाऊं अपने गीत


तुम ही नहीं रहे मेरे प्रिय,

किसे सुनाऊं अपने गीत ?

वह मधुमय संसार सुहाना,

वह स्वर्णिम शैशव का हास !

सह-क्रीड़ा साहचर्य हमारा,

बन कर रहा शुष्क इतिहास !!

क्या ये आँख-मिंचौनी ही है,

जरा बता बचपन के मीत !

तुम ही नहीं रहे मेरे प्रिय,

किसे सुनाऊं अपने गीत ??


कौतुहल कलरव पीपल तल,

वृहत विटप के शीतल छाँव !

तटनी-तट सिकता का आँचल,

स्नेह सुधानिधि सुन्दर गाँव !!

पगडण्डी पर आँख बिछाए,

गए कई निशि-वाषर बीत !

तुम ही नहीं रहे मेरे प्रिय,

किसे सुनाऊं अपने गीत ??


अश्रु शेष केवल आँखों में,

सपने तक नहीं आते हैं !

उस पीड़ा को क्या जानो तुम,

जब अपने छोड़ के जाते हैं !!

याद तुम्ही को करना प्रतिपल,

मेरे जर-जीवन की रीत !

तुम ही नहीं रहे मेरे प्रिय,

किसे सुनाऊं अपने गीत ??

*** *** ***

14 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बहुत बधाई दोहरे शतक के लिए....पोस्ट्स ५०० के आंकडें पार करें...हमारी शुभकामनाएं
    पर इस ख़ुशी के मौके पर ये उदासी भरा गीत क्यूँ....वैसे कविता बहुत सुन्दर बन पड़ी है

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  2. क्या ये आँख-मिंचौनी ही है,

    जरा बता बचपन के मीत !

    तुम ही नहीं रहे मेरे प्रिय,

    किसे सुनाऊं अपने गीत ??

    दिल को छूने वाली पंक्तिया, और हां दोहरे शतक की बहुत बहुत बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  3. अश्रु शेष केवल आँखों में,

    सपने तक नहीं आते हैं !

    उस पीड़ा को क्या जानो तुम,

    जब अपने छोड़ के जाते हैं !!

    याद तुम्ही को करना प्रतिपल,

    मेरे जर-जीवन की रीत !

    तुम ही नहीं रहे मेरे प्रिय,

    किसे सुनाऊं अपने गीत ??

    *** *** ***
    Bahut sundar rachana!
    Dohre shatak kee badhayi!

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  4. अश्रु शेष केवल आँखों में,सपने तक नहीं आते हैं !उस पीड़ा को क्या जानो तुम,जब अपने छोड़ के जाते हैं !!
    याद तुम्ही को करना प्रतिपल,मेरे जर-जीवन की रीत !
    तुम ही नहीं रहे मेरे प्रिय,किसे सुनाऊं अपने गीत ??
    कविता इतनी मार्मिक है कि सीधे दिल तक उतर आती है।

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  5. पहले तो बधाई स्वीकार करें। फिर गीत के लिए बधाई देना चाहूँगा। शब्द बेहतरीन चुने हैं।

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  6. २०० नाट आउट, कान्ग्राट्स.
    कविता भी शान्दार लगी.
    शुभकामनायें..

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  7. आपकी दोहरी शतकीय पारी को देखकर यही शुभकामनाएँ दिल से निकलती हैं कि अल्लाह करे ज़ोर-ए-क़लम और ज़ियादा..

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  8. bahut bahut shubhkamnae........aur ise avsar par hardik badhai...............

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  9. Keshav ji,
    kavita padhi. Bahut achhi lagi. Dohare shatak ki upalaksh mein aap ko bahut bahut badhai. Dhanyavaad.
    ARK Prasad

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  10. Karan Ji..Dis is ur one of the best poem...really touched my heart..

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  11. २०० पोस्ट का आंकड़ा पार करने की बधाई ....कविता बहुत अच्छी लगी...बधाई

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  12. दुहरे शतक की अनंत बधाइयाँ...आपकी कलम निरंतर निर्बाध गति से गतिमान रहे और हिंदी साहित्य को समृद्धि प्रदान करता रहे,इस हेतु प्रभु से प्रार्थना और हार्दिक शुभकामनाएं...
    आपकी यह अतीव मनोहर,मर्मस्पर्शी,अद्वितीय रचना ह्रदय को छू विभोर कर गयी...बहुत ही सुन्दर कविता लिखी आपने...

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