वृक्ष हमारे जीवन संगी |
-आचार्य परशुराम राय
वृक्षों के बिन प्रकृति अधूरी,
बिन वृक्षों के धरती नंगी।
वृक्ष हमारी जीवन साँसें,
वृक्ष हमारे जीवन संगी।।
वरद हस्त हैं शाखें इनकी,
धारें मिट्टी पाँव तले।
ज्ञान ने खोलीं अपनी पलकें,
इनकी शीतल छाँव तले।।
जीव जगत के आश्रय दाता।
ये उपास्य हैं देव हमारे
और हमारे मंगल दाता।।
जीवन ने पहली अँगड़ाई,
ली थी इनकी ही साँसों में।
पहली मुस्कान चेतना की
खेली थी इनकी बाँहों में।।
बड़ा कुटिल अरमान तुम्हारा।
वृक्ष विहीन कल्पना का,
कैसा होगा संसार हमारा।।
करते-रहते ये अभयंकर,
प्रतिदिन ऊर्जा के स्त्रोत सृजन।
रोका न गया इनका विनाश,
तो प्रकृति करेगी प्रलय सृजन।।
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