सोमवार, 26 दिसंबर 2011

शरद की चांदनी

शरद की चांदनी

श्यामनारायण मिश्र

हर   दिशा  की लाड़ली है, यह शरद की चांदनी।

क्षीर   सागर    में पली है,  यह शरद की चांदनी।

 

आपका     जूड़ा      सजाने   की   हुई       इच्छा,

रातरानी   की      कली है, यह शरद की चांदनी।

 

खिलखिलाहट     आपकी   ठहरी   हुई   है   क्या?

या कि मिसरी की डली है, यह शरद की चांदनी।

 

आंगन,  दालान,  छत,   एक  करती   आपकी,

उम्र जैसी  मनचली है,  यह शरद की चांदनी।

 

नहाकर   नर्मदा   निकली   आपकी   निर्मल,

देह जैसी मखमली है, यह शरद की चांदनी।

 

गुनगुनाती है  कभी, खिलखिलाती  है कभी,

आप जैसी  बावली है, यह शरद की चांदनी।

19 टिप्‍पणियां:

  1. गुनगुनाती है कभी, खिलखिलाती है कभी,

    आप जैसी बावली है, यह शरद की चांदनी।

    प्रेमपुर्ण रचना

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  2. बहुत खूबसूरत गज़ल पढवाया आदरणीय मनोज सर... मजा आ गया...
    एक शेर और जुबां पे आ गया...

    आपकी आँखों की काजल, से लिपट कर लग रही
    आज थोड़ी सांवली है, यह शरद की चांदनी


    सादर...

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  3. खिलखिलाहट आपकी ठहरी हुई है क्या?

    या कि मिसरी की डली है, यह शरद की चांदनी।...खूबसूरत उपमा

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  4. शरद की चांदनी ...बहुत खूबसूरत रचना ..आभार

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  5. आप जैसी बावली है, यह शरद की चांदनी...

    बहुत सुंदर रही यह रचना मनोज भाई !
    शुभकामनायें

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  6. ्शरद की चाँदनी का बहुत ही खूबसूरत चित्रण्।

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  7. शरद चांदनी जैसा ही मधुर गीत !

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  8. नहाकर नर्मदा निकली आपकी निर्मल,
    देह जैसी मखमली है, यह शरद की चांदनी।

    गुनगुनाती है कभी, खिलखिलाती है कभी,
    आप जैसी बावली है, यह शरद की चांदनी।
    ...sundar manmohal chitrankan....
    sundar prastuti hetu aabhar!

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  9. गुनगुनाती है कभी, खिलखिलाती है कभी,

    आप जैसी बावली है, यह शरद की चांदनी।
    मधुर भाव लिये सुंदर गीत ,मनोज जी मेरे ब्लॉगv7 में पधारने व टिप्पणी के लिये धन्यवाद, जिस चित्र के सम्बन्ध में पूछा है, वह मेरा ही है. ब्लॉग के प्रोफाइल में जो चित्र है वह ब्लॉग लेखन के प्रारम्भ के समय का है, जिन्दगी के बीते लम्हों को याद करते हुये यह कविता बन गई ,तो चित्र भी अपना डाल दिया .

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  10. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  11. कमाल है चांदनी के इतने हुए रूपों को इस कविता में देखना.. कोइ भी मोहित हुए बिना नहीं रह सकता!!

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  12. आपका जूड़ा सजाने की हुई इच्छा,

    रातरानी की कली है, यह शरद की चांदनी।



    खिलखिलाहट आपकी ठहरी हुई है क्या?

    या कि मिसरी की डली है, यह शरद की चांदनी।
    ye panktiyan mujhe behad pasan aayeein...sampurn jahan me uski hee chabi..behtarin..

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