सोमवार, 5 दिसंबर 2011

तक्षक की बेटी तक्षशिला पर बैठी


तक्षक की बेटी तक्षशिला पर बैठी


श्यामनारायण मिश्र

बैठ नहीं पाएगी, चिड़िया री!
              रोप मत बवाल
ज़ंग लगी खूंटी है
   टंगे हुए सैंकड़ों सवाल।
क़िस्मत ही खोटी है,
बिल्ली से बचे हुए
सुग्गे को निगल गई छिपकली।
अम्मा की धोती में रगड़ रही नाक
दूध और रोटी को मचली है लाडली।
         गोकुल को लौट रहे
         यमुना में डूब गए ग्वाल।
अभी जो हड़प्पा से आई है पाती,
आंखों में जलती रेत भर गई।
तक्षक की बेटी तक्षशिला पर बैठी
भेजे अनंतनाग बीन फिर नई।
गंधार के राजा, न्यौते पर आए हैं
           पांसों की करने पड़ताल।
अभी संघमित्रा! श्रीलंका से लौटी है,
सिंघलियों की पुख्ता खोज खबर लेकर
सुना है विभीषण ने पुष्पक फिर मांगा है
टूट गए हैं वे डोंगी खे-खेकर।
दिशा और विदिशा फैले हैं।
           सभी जगह जाल।

18 टिप्‍पणियां:

  1. प्रत्येक गीत बीते युग के सन्दर्भ में अपने समय का नवगीत होता है और प्रत्येक नवगीत आने वाले कल की पृष्ठभूमि मे अपने जमाने का गीत होता है । उपर्युक्त के आलोक में श्याम नारायण मिश्र का नवगीत " तक्षक की बेटी तक्षशिला पर बैठी " की प्रस्तुति अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  2. सुन्दर प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारें ||

    chitrayepanne.blogspot.com

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  3. बैठ नहीं पाएगी, चिड़िया री!
    रोप मत बवाल
    ज़ंग लगी खूंटी है
    टंगे हुए सैंकड़ों सवाल।


    गीत में बिम्बों का अच्छा प्रयोग है !
    आभार !

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  4. नए बिम्ब से सजी अच्छी रचना पढवाने हेतु आभार

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  5. उम्दा एवं स्तरीय कविता...
    ब्लॉग पर ऐसी रचनाए कम ही देखने को मिलती है...
    साधु-साधु

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  6. तक्षक का मॉइथॉलॉजिकल सम्बन्ध है क्या तक्षशिला से?

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  7. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! अधिक से अधिक पाठक आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
    चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  8. ज़ंग लगी खूंटी है
    टंगे हुए सैंकड़ों सवाल।
    ......नमन !

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  9. ज़ंग लगी खूंटी है
    टंगे हुए सैंकड़ों सवाल।..बहुत खूब..

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  10. माइथोलोजी और आधुनिक बिम्बों के मेल बनी अद्भुत नव गीतिका!!

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  11. विभिन्न युगों की समीचीन बातें बतियाता सुंदर नवगीत

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  12. अभी जो हड़प्पा से आई है पाती,
    आंखों में जलती रेत भर गई।
    तक्षक की बेटी तक्षशिला पर बैठी
    भेजे अनंतनाग बीन फिर नई।
    गंधार के राजा, न्यौते पर आए हैं

    पांसों की करने पड़ताल।

    bahut achhi rachna abhar

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  13. बिल्ली से बचे हुए
    सुग्गे को निगल गई छिपकली।

    गंधार के राजा, न्यौते पर आए हैं
    पांसों की करने पड़ताल।
    बहुत खूब !

    पाण्डेय जी ! राजा तक्षक की बसाई नगरी है तक्षशिला.

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