बुधवार, 22 सितंबर 2010

देसिल बयना - 48 : गयी बात बहू के हाथ

देसिल बयना-48

गयी बात बहू के हाथ


करण समस्तीपुरी

 

मार बढ़नी.... ई परव-तिहार के.... ! बाप रे बाप ! दम धरे का भी फुरसत नहीं मिल रहा है। हाह...चलिए कौनो तरह सब व्यवस्था-बात हो गया। अब निकले हैं न्योत-हकार देने। हौ मरदे... ! आप भी भकलोले हैं... ! इधर-उधर पतरा-कलंदर का देखे लगे, अरे कल हमरे ब्लॉग का हैप्पी बर्थ डे है ना.... !

उतरवारी टोला में हो गया। मझकोठी भी दे दिए। गाछी टोल में चौबनिया गया। पकौरी लाल दखिनवारी टोल गया है। कुटुमैती का जिम्मा जुगेसरे हजाम को दे दिए हैं। ओह... ! पुरबारी टोल बचले है। दहरू काका, बुधना, चासनी लाल, भाकोलिया माय, चिकनी देवी, छबीली मामी, नकछेदिया, बटेसर को हो गया। अब ई लाइन में चौक पर वाला कड़की सेठ, लहरू भाई और लुखिया ताई बची हैं। चलो जल्दी-जल्दी हकार दे के वर्ष-गाँठ के जोगार में लगेंगे।

का बात है कड़की सेठ का फाटक खुला मगर कौनो आदमी का दरस नहीं है.... ? अरे उधर से किसान आवाज आ रही है ? ओह.... लहरू भाई का भी घर खाली.... ? ओह्हो.... ! लुखिया ताई के ड्योढ़ी से आवाज आ रही है। अच्छा तो अरोसी-परोसी उन्ही का रमैन सुन रहे हैं का... ? अरे हाँ.... हऊ.... देखो.... लहरनी भौजी कैसे अंचरा से आधा मुँह ढंके आनंद लूट रही हैं।

सचे जब से बकरचन भाई की बिलैती लुगाई आयी थी लुखिया ताई कने रमैन तो रोजाना हो गया था। अब बस फ़ाइनल महाभारते बांकी था। वैसे था तो जबर्दस हरबरी मगर ऐसन परसंग छोड़ के आगे भी कैसे बढ़ जाएँ... ? ओह का रस बरस रहा था... भैय्या-खौकी.... मैय्या-खौकी.... रं..........ई.... हरजाई...... ! दुन्नु पाटी के मुँह से एकदम रसगुल्ले टपक रहा था। बकरचन भई दाव-दाव के मुँहदुस्सा बीच में मुखदर्शक बने हुए थे।

अभी तो कीर्तन-भजन और चलता मगर ई लटकन ठाकुर बीचे में कड़क गए, "अई... ! चुप रहेगा तुम लोग कि बोलाएँ दफेदार को ?" सब सकदम। ठाकुर जी फिर कड़के, "ऐ लुखिया भौजी ! अरे का बात है ? जुआनी में तोहरे मुँह का सिसकारी सुने के लिए कान तरसता था और बुढ़ारी में ई कौन राग भीम-पलासी छेड़े रहती हो ?"

फिर शुरू हुआ ताई का अथ सिरि रेवाखंडे, सास-बहू भीषण वाकयुद्ध संवादः। लेकिन ई का कथा शुरू करे से पहिलही काकी का आँख झहरे लगा। अंचरा के कोर से दुन्नु आँख के कोना बारी-बारी से पोछ कर बोली, "लटकन बाबू ! अब हमें भगवान पता नहीं कौन दिन दिखाए खातिर रखे हुए हैं...? धन-सम्पति जाए चूल्हे में... ! सब वही लोग संभाले। हमें क्या करना है... ? माय-बाप, सास-ससुर, पति के राज में धर्म और संस्कार बचा के रखे। अई बेटा-बहू के राज में उहो धर्म-संस्कार का अंतिम संस्कार हो गया।

'माई-बाप सिखाये रहे, 'रहिमन वे नर मर चुके जे कहिं मांगन जाहिं... !' इहाँ ससुराल में ई कपूतनेरहा के दादा हमेशा यही जपते थे, 'साहिब इतना दीजिये जा में कुटुम समाई... !' बाढ़-सुखार सब में आज तक सब का मान रखा ई द्वार। मगर आज इत्ते बड़े राज-पाट में जलाली बाबा के दरगाह के फ़कीर को एक मुट्ठी दाना के बिना लौटना पड़ा। हाय हो राम !" काकी का कलेजा फटने लगा।

छी-छी.... राम-राम.... ! और कोई कुछ बोले उ से पहिले ही बिलैती भौजी बीचे में बात लारने लगी, "एं... कौनो फ़कीर को भगाए का... ? बूढी का कौनो हिसाब किताब नहीं है.... उ कुछ जानती है... ? घर हम संभालते हैं तो भीख देने वाली उ कौन... ? उ फकीरचन को न देखिये, मांगता है भिच्छा और देने चला सिच्छा। महतारिये के हाथ से लेगा... ! हम कहते हैं, सब कुछ करेंगे हम और भीख देने का हक़ किसी और को ?

हम कहे, 'धत तोरी के ! ई कौनो बात हुआ... !" "बात न हुआ तो का.... आप का बुझियेगा अभी ? बाबूजी के होटल चलता है, निट्ठल्ला ई टोला - उ टोला घूमते हैं तो का बुझाएगा..... लुगाई आएगी आके चानी तोड़ेगी और तब जाके सेर भर अनाज कमाइयेगा तब पता चलेगा... ! उ में भी हम कौनो मन किये थे देने से... खाली यही न कहे कि हम खुदे देंगे.... ! यही बूढी न सात गाँव परचार के बात का बतंगर कर रही है।"

लटकन ठाकुर का मुँह भी बसिया जिलेबी जैसे लटक गया था। गला भरिय गया था। किसी तरह बोले, "भौजी अब का करोगी ? समझ लो कि 'गयी बात बहू के हाथ !' अब संन्यास लेलो ई दीन-दुनिया से। मिले तो दू दाना खाओ और राम-राम करो... !" लुखिया ताई खाली 'हूँ' बोल पायी थी। अंचरा से पूरा मुँह ढांप ली। एकाध बार हिचकी का आवाजो आया था। लटकन ठाकुर डपट के भीड़ को भगा चुके थे।

अहि तोरी के...... किरिन डूब रहा है। मार मूरी धर के। आये थे हरिभजन को और ओटन लगे कपास। हकार देने निकले थे और इहाँ न्योता पुरने लगे। का करते दिरिसे इतना मनोरंजक था कि पैरे ठहर गया। खैर अब सोचे कि ताई को हकार देके ही चलें। ताई मुँह पोछ के अंचरा हटाई तो हम बोले, "ताई ! कल्हे हमरे ब्लॉग का बरसगाँठ है। आइयेगा जरूर।" ताई का आँख फिर से लोराने लगा। बोली, "बाबू ! अब हमें का हकार और न्योता देते हो... ? अब हमरे कौन अख्तियार ? सुना नहीं ठाकुर जी का कहे ? 'गयी बात बहू के हाथ।' जाओ कुलमंतो रानी हैं भीतर, उन्हें ही कह आओ वरना कहीं हमरा कहा हकारो नहीं मांगे तो तुम भी कहोगे कि ताई....... !" ई से जादे उनके मुँह से बकारे नहीं निकला।

हमरा भी मोन भरिया गया। लेकिन फिर सोचे, धन ई परसंग। एगो नया कहावत तो सीखे। "गयी बात बहू के हाथ।" और ताई जब ई कहावत दोहरी थी तो उनके आवाज में अधिकारच्युत होने का जो दरद था उ से ई का मतलब भी समझ में आएगा आसानी से। "गयी बात बहुत के हाथ ! मतलब अधिकार का हस्तांतरण। बलात या असामयिक या अपारंपरिक।" आप लोग समझे कि नहीं... ? समझे तो ठीक है और नहीं समझे तो बहुत बढ़िया.... !

और जा.... हे भूलिए गए... ! अरे महराज ! अब आपलोग भी ई मत कहियेगा कि भीतरी जा के हकार दे दो। सब लोग को सप्रेम निमंत्रण है। कल 23 सितम्बर को हमरे प्यारे ब्लॉग के पहले वर्षगाँठ पर जरूर आइयेगा। "हैप्पी बर्थ डे टू माय डियर ब्लॉग। हैप्पी बर्थ डे टू यू।"

जी हां मित्रों! आपके प्यार, स्नेह और प्रोत्साहन के बल पर हम आज एक साल पूरा कर रहे हैं। पिछले साल २३ सितंबर को हमारा यह ब्लॉग अस्तित्व में आया था। इन ३६५ दिनों में ३८६ पोस्ट के साथ हम कल से दूसरे साल में प्रवेश करेंगे। सदा की तरह आपके प्रोत्साहन, मार्ग दर्शन और हौसला आफ़ज़ाई का निवेदन रहेगा। इन ३६५ दिनों को याद करते हुए भावनाएं आपके आभार से सरोबार है ।

मनोज

52 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    काव्य प्रयोजन (भाग-९) मूल्य सिद्धांत, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

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  2. करन बबुआ,
    शेली से लेकर शैलेंद्र तक फरमा गए हैं कि सबसे मधुर गीत ओही होता है जऊन दरद के कोख से जलमता है...ओइसहीं है ई आपका आज का देसिल बयना...आज से पहिले जऊन आप लिखे, उसमें कहानी खतम त होता था एगो ब्यथा के साथ,बाकी घटना क्रम एतना रोचक आप बना देते थे अपना लेखनी से कि लोग का हँसी नहीं त मुस्कुराहट त जरूरे निकस जाता था.
    बाकी आज का ई देसिल बयना एगो अईसा ब्यथा कथा सुनाता है जे रोज गाँव जेवार में अऊर घर देस में देखाई देता है. एक पूरा पीढी का दरद. जबकि घटना एकदम स्वाभाविक है, लेकिन मनोबैज्ञानिक ब्यथा का त झाड़ सुक्खू भगत (एगो ओझा थे हमरे गली में) के पास भी नहीं था.जेतनाजल्दी पुराना पीढी ई बात सहज अपना ले ओतने कस्ट कम होगा.
    न्यौता पड़ गया है त आवे पड़ेगा..बधाई आजे दे दें कि कल्ह दें...बस अईसहीं लिखते रहिए. हमरा त आसिर्बाद का बोलें सुभकामना है...

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  3. बहुत अच्‍छी प्रस्‍तुति .. वर्षगांठ के लिए अग्रिम बधाई !!

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  4. बहुत खूब लिखा...बधाई. वर्षगांठ की भी शुभकामनायें.

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  5. jeevan ke pratham varshgaanth ka apana hi mahatwa hota hai.beete varsh ki sarthakata blog ki safalata me mukharit ho rahi hai.Manoj ji,aapko varshganth ki hardik shubhkamnayen.
    Desil bayana ka to jawab hi nahi hai.Keshav ki lekhani likhati nahi hai balki aankho ke saamne sajeev drishya utpann kar deti hai,padane wala usme samahit hota chala jaata hai.etani achchi prastuti hetu badhai sweekar karen.
    -GyanChand Marmagya

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  6. मस्त पोस्ट लिखने के लिए आभार .
    आपके ब्लॉग की वर्षगाँठ पर
    हार्दिक बधाई ..
    ऐसे ही लिखते रहें .

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  7. करण जी आपकी रोचकता, सरसता और लेखनी से दृश्य साक्षात सामने उपस्थित कर देने की अद्भुत कला, हमारे ३६५ दिन, ५२ सप्ताहों, की यात्रा में ४८ सप्ताहों तक हमें हंसाता, रुलाता, सहलाता रहा! जब हमने इस प्रोजेक्ट को शुरु करने की बात की थी तो हम इस निर्णय पर बड़ा सहम कर पहुंचे थे कि इसे देसज शैली में प्रस्तुत किया जाए। आज हमें गर्व है कि हमारा निर्णय कितना सही था। इस एक स्तंभ को लोगों का जितना प्यार मिला वह वर्णनातीत है। कल ही दूरदर्शन पर गोविन्द व्यास जी का विचार सुन रहा था कि हिन्दी तो बढ रही है, इसमें कोई संदेह नहीं। पर इसके साथ जो चिंताजनक पक्ष है वह यह कि हम हिन्दी की बोलियों को भुला रहें हैं। आपके बिहारी बोली को बढाने में, आगे लाने में, इस मंच से देसिल बयना के माध्यम से अहम योगदान को नकारा नहीं जा सकता।
    आज मुझे यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं है कि अगर मुझे आपका साथ न मिला होता तो हम इस ब्लॉग को इतना लंबा सफ़र तक चला पाने में शायद समर्थ न होते। मुझे मालूम है कि आप अपनी नौकरी की जिम्मेदारियों में कितना वुअस्त रहते हैं, पर उसके साथ, जब भी कोई अतिरिक्त ज़िम्मेदारी, इस ब्लॉग के लिए दिया गया आपने सहर्ष न सिर्फ़ स्वीकार किया बल्कि उसे सफ़लतापूर्वक अंजाम दिया!
    आपको हार्दिक शुभकामनाएं, आशीष और आभार।

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  8. आज का देसिल बयना व्यथा को कह गया ...
    अधिकार का हस्तांतरण को समझाती कथा बहुत अच्छी लगी ...अब कभी न कभी तो बात बहु के हाथ जायेगी ही ..लेकिन जब मन की छोटी सी भी बात पूरी नहीं होती तो ऐसे ही दुःख होता है

    अच्छी प्रस्तुति ...

    ब्लॉग के जन्मदिन की अग्रिम शुभकामनाएं

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  9. interesting post ,writer has dealt with stark reality in a moving and nice way!

    blog ke janmdin hetu dher sari subhkamnayein!
    nit pallavit pushpit hota rahe aapka yah blog....
    regards,

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  10. शुद्ध देशज शब्दों कि भरमार.

    और आंचलिक बोली (भाषा)


    मजेदार और जानदार

    मानो अरहर कि दाल में खूब देसी घी हो और साथ में हरी मर्चा सरसों के तेल में तली हुई.


    बढिया....
    और हाँ, एको बात और
    ब्लॉग कि वर्षगांठ पर शुभकामनायें

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  11. Ram Ram Karan ji...Nimantran dene ka ye anokha tarika humko bahute pasand aaya....
    Hum jaruar aayenge kal aur advance me aplogon ke is blog ke pahle varshganth par bahoooooooooooooooooooooot bahooooooooooooooooooooooot badhai...

    hum apke blog ek sal se padhte aa rahe hai... e to apko humre commnt se pata chaliye jata hoga....idhar du -char mahine se kam ho gaya hai kahe ki humre nayka offcwa ne block kar diya hai apke blog ko :(
    Fir b humko jab b moka lagta hai padhiye lete hai...Aur apke blog ko padhne me humko bahte aanand aata hai kahe ki aplog likhte he etna acha hai ki ketno tarif karen kamme hoga...

    Kal ka inzar hai abi se he :)
    Hume to vishwas hai kal kuch na kuch dhamakedar post aane wala hoga...
    chaliye kal ka kal dekh lenge...
    Aj ka post humesa ki tarah bahute acha aur apko to pata he hai apke desil bayna me jo kirdar hota hai na unka nam to humko bahute pasand aata hai aj ka nam sab to ekdume mast hai...khaskar लहरनी भौजी ....

    EK BAR FIR SE APLOGON KO BLOG KE 1ST ANNIVERSARY PAR BAHOT BAHOT SUBHKAMNAYEN.....AUR APKA BLOG KAI SALON TAK YUN HE CHALTE RAHE INNI SAB SUBHKAMNAO KE SATH BAHOOOOOOOOOOOOOT BAHOOOOOOOOT DHANYAWAD :) :) :) :) :)

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  12. ऐसे ही लिखते रहें .
    शुभकामनायें.


    वर्षगांठ की भी हार्दिक शुभकामनायें.

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  13. ब्लाग के जन्मदिन पर अग्रिम बधाई। कल मिठाई खाने आते हैं बस जलेबी ही खायेंगे गर्मागर्म।

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  14. @ राजभाषा हिंदी,
    जय हो महरानी ! ई महिना में तो त्रिभुवन में आपका ही जयजयकार होता है.

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  15. @ चला बिहारी....,
    चचा अब आपको का कहें... ऐसा लगता है कि जब तक आप ब्लॉग पर हैं हमें देसिल बयना लिखते ही रहना होगा. हम तो बस माँ सरोसती को परनाम कर के कीबोर्ड टिपटिपाते रहते हैं... मैय्या जौन लिखबा दे... ! लेकिन एक बात हम अपना मोने से लिखे हैं..... बर्थ डे में जरूर आइयेगा !

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  16. @ संगीता पुरी,
    उत्साहबर्धन के लिए धन्यवाद !

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  17. @ के.के. यादव
    सर जी, आज तो न्योता ही दिए हैं असली भोज तो कल है. कहीं मिस नहीं कीजियेगा. वैसे आप तो खुदे डाक के हाकिम हैं !

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  18. @ ज्ञानचंद मर्मज्ञ,

    ज्ञानजी आपको सच्छात बिलोग पर देख कर ख़ुशी के मारे हमरा कमर कुर्सी पर नहीं पड़ रहा है......... हा हा हा हा......... ! बहुत-बहुत धन्यवाद !! कल जन्मदिन के जलसा मे आइयेगा जरूर !!!

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  19. @ वीरेन्द्र सिंह चौहान,
    चौहान जी,
    आप ही जैसे पाठक का तो हम परतिच्छा करते रहते हैं. भाई कुछो लिखे कि नहीं लिखें.... आप लोग कम से कम वाह-वाह तो करियेगा....... ! मजाक कर रहे थे !! लेकिन धनवाद सच्चो में दे रहे हैं !!

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  20. @ मनोज कुमार,
    नतमस्तक ! आपको तो पता ही है यह परियोजना पिछले तीन सालों से लंबित थी. आपने इसे कार्यरूप देने की प्रेरणा और मंच दिया, आभार !!

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  21. @ संगीता स्वरुप,
    अम्मा,
    ई हमरे ब्लॉग का जन्मदिन है कौनो टी-ट्वेंटी मैच नहीं कि शार्ट-कट में निपटा के चली गयी.....खैर कौनो बात नहीं... आपका बड़का-बड़का आशीर्वाद तो हैय्ये है न... आप एक बार चैट में कही थी. धनवाद बोलें का... ?

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  22. @ अनुपमा पाठक,

    अनुपमा जी,
    आप सात समुन्दर पार से भी देसिल बयना का सराहना की, हमरा हिरदय एकदम गोबरछात्ता जैसे खिल गया ! धन्यवाद !! बांकी कल बर्थ डे पार्टी में भी जरूर आइयेगा !!!

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  23. @ दीपक बाबा,
    हौ बाबा जी,
    कहाँ रहते हैं महराज ? दू-चार गो देसिल बयना तो आपके गैर-हाजरिये में निकल गया... ! खैर आप बड़ी मौका से बिलोग के जन्मदिन के मौका पर आईये गए. बड़ी अच्छा लगा हमको !! हिरदय गदगद हो गया....

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  24. @ रचना,
    सलामवालेकुम मोहतरमा ! अरे आप तो पूरा पर्चे छाप दी. लगता है हफ्ता भर का कसर निकाल रही थी का... ? खैर एगो बात कहें आपकी टिपण्णी में यही अपनापन तो है जिसकी परतिच्छा में हम आँख बिछाए रहते हैं !!

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  25. @ हरीश प्रकाश गुप्त,
    का गुरूजी,
    ई कौनो बात हुआ? हम ऐसे ही लिखते रहें और आप दू शब्द में छुट्टी.... ?

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  26. @ निर्मला कपिला,
    कनिक सबेरे आइयेगा....... नहीं तो जिलेबी ठंडा जाएगा !

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  27. हमरा भी मन भरिया गया है ताई की हालत देखकर । और हाँ महाराज, बलॉग पर हकार तो आप दे ही चुके हैं सो हम तो कल जरूरे आएंगे बर्थ-डे मनाने ।
    जरा मेनुआ भी बता दीजिएगा कल का । और एक बात - दहरू काका, बुधना, चासनी लाल, भाकोलिया माय, चिकनी देवी, छबीली मामी, नकछेदिया, बटेसर - इ सब लोग आएंगे ना कल?

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  28. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! आपके ब्लॉग की वर्षगांठ पर हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें! इसी तरह लिखते रहिये !

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  29. फिर से मार बढ़नी ...........
    करण जी ,
    भैय्या-खौकी.... मैय्या-खौकी... का मतलब जरा विस्तार से समझाईए ना ।

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  30. कल फिर आवेंगे ब्लॉग का जन्म दिन मनाने. अभी अग्रिम बधाई और अनेक शुभकामनाएँ.

    कल की पार्टी का मेनु तो बताईये?? :)

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  31. करण जी,
    आपका देसिल बयना तो हर बार ही मिट्टी की सोंधी खुशबू लेकर आता है और रही आपके बलॉग का जन्मदिन मनाने की बात तो हम कल अवश्य आएंगे । निमंत्रण सहर्ष स्वीकार है ।

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  32. karan bahut kuch padne se choota hai hadbadee me comment nahee dena chahtee par ha shubhkamnao me late lateeefee nahee baratanaa chahtee.......blog din dugna fale......aur sabo ke dilo par rajy kare.........

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  33. देसिल बयना की प्रस्तुति बहुत ही शानदार रही हैँ। ब्लोग की बर्षगाँठ की बधाई! -: VISIT MY BLOG :- (1.) ऐ-चाँद बता तू , तेरा हाल क्या हैँ।............कविता को पढ़कर तथा (2.) Mind and body researches..........ब्लोग को पढ़कर अपने अमूल्य विचार व्यक्त करने के लिए आप सादर आमंत्रित हैँ। आप इस लिँकोँ पर क्लिक कर सकते हैँ।

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  34. Bahut - Bahut badhai....
    Is Blog ka lekhak na keval padhne ke lie diya hai, jabki sikhne ke lie bhi anmol ratn pradan kie hai.

    @ ek bar phir se badhai ho lekhak dal ko jo is blog ko choti par le ja rahe hai.

    @ ek saptah se intazar kar rha tha, Desil Bayana ke lie. pichle wala se milta julta, Bahut hi achchha. I am speechless

    @ Birthday Party ki Recepation par karan bhaiya ka intazar rahega.

    @@@@
    Manoj Ji,
    Hum to kahte hai, Karan Bhaiya ke bina Sabkuchh viran najar aane laga hai.

    उत्तर देंहटाएं
  35. Bahut - Bahut badhai....
    Is Blog ka lekhak na keval padhne ke lie diya hai, jabki sikhne ke lie bhi anmol ratn pradan kie hai.

    @ ek bar phir se badhai ho lekhak dal ko jo is blog ko choti par le ja rahe hai.

    @ ek saptah se intazar kar rha tha, Desil Bayana ke lie. pichle wala se milta julta, Bahut hi achchha. I am speechless

    @ Birthday Party ki Recepation par karan bhaiya ka intazar rahega.

    @@@@
    Manoj Ji Namaskar,
    Hum to kahte hai, Karan Bhaiya is blog ka rudhir aur dhamani dono hai. Vaise aaplogon ka sahyog to anmol hai.

    उत्तर देंहटाएं
  36. बहुत बढ़िया जी ....बर्थ डे पार्टी का समय क्या है जी :)

    वर्षगांठ के लिए बधाई !!

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  37. ha ha ha aha ... pehle to jee bhar ke hasn deo bhai .. ee post badi achhi lagin... ab jaraa kek vek katava naa hi rahe ho jara muh mithuva kari lebho..
    galti ke liye maafi...par bari sundar post hai.. hasi ke golgappe jaise khaa liye ho...
    badahi aapko blog kee varshgaanth par...

    उत्तर देंहटाएं
  38. ha ha ha aha ... pehle to jee bhar ke hasn deo bhai .. ee post badi achhi lagin... ab jaraa kek vek katava naa hi rahe ho jara muh mithuva kari lebho..
    galti ke liye maafi...par bari sundar post hai.. hasi ke golgappe jaise khaa liye ho...
    badahi aapko blog kee varshgaanth par...

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  39. बहुत सुंदर, वर्षगांठ की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  40. लुखिया ताई की वेदना ने आहत कर दिया। बर्थ-डे में शामिल होने का उत्साह जाता रहा।

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  41. 'देसिल बयना'की मिठास यहाँ तक यथावत् पहुँच रही है .यह ब्लाग-बिरछ फलता फूलता रहे और अपना अनूठा स्वाद बाँटता रहे !

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  42. बहुत बढिया करण बाबू। हंसाते-हंसाते रुलाने का आपका ई धंधा भी हमको पसंद है।
    और कल्हे त मिठाई-उठाई खाने ज़रूरे आएंगे।
    आज भी बधाई लि लिया जाए!

    उत्तर देंहटाएं
  43. बहुत खूब लिखा...बधाई. वर्षगांठ की भी शुभकामनायें

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  44. क्या जबरदस्त तस्वीर खींची है भाई.. बहुत आनंद आता है आपको पढ़कर. इतने प्यार से बुलाया है तो बधाई देने जरूर ही आयेंगे सर जी...

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  45. बहुत अच्छी लगी ये पोस्ट । खूब आनंद उठाया सास बहू के वाक् युध्द का । अब बात बहू केहाथ चली ही गई तो ताई का करे । पर ब्लॉग के वर्ष गांठ की मुबारक ।

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  46. बहुत अच्छी लगी ये पोस्ट । खूब आनंद उठाया सास बहू के वाक् युध्द का । अब बात बहू केहाथ चली ही गई तो ताई का करे । पर ब्लॉग के वर्ष गांठ की मुबारक ।

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  47. बकार तो आप हमारे मुंह का भी सटका दिए हैं...

    ई सब मुंह में ऐसे रस का गोला घोल देता है कि कुच्छो कहने सुनने लायक रहने देता है ?????

    चलिए शुभकामना लीजिये भर भर झोरा...

    आपका ई सफ़र ऐसे ही सरसराते चले और खूब नाम करे..इहे शुभकामना है...

    ढेर ढेर बधाई !!!

    उत्तर देंहटाएं
  48. कारण भाई... आपके मिथिलांचल के लोकोक्ति के समझ पर मैं विस्मित हूँ और जिस तरह से आपका प्रस्तुतीकरण है .. खास तौर पर कथा रूप में.. आम जीवन को जिस प्रकार आप जोड़ रहे हैं आंचलिकता के आँचल में वह अदभुद है... ए़क वर्ष के सफ़र को पूरा करने के लिए हमारी शुभकामनाएं है आपके साथ.. आपके सभी मील के पत्थरों का साक्षी बनू मैं .. यही कामना है... बधाई सहित !

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  49. आप सभी पाठकों का मैं व्यक्तिगत रूप से आभारी हूँ ! एक वर्ष तक आपने जो प्यार और प्रोत्साहन दिया है, वह अनिर्वचनीय है. समयाभाव के कारण सबको सामूहिक धन्यवाद देता हूँ !! उम्मीद है भविष्य में भी यह स्नेह और सहयोग बना रहेगा !!! कोटिशः आभार !!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  50. सबसे पहले तो ब्लॉग के हैप्पी बड्डे की हार्दिक बधाई .फिर इस प्रसंग के बारे में...बस ज्यों गूँगेहि मीठे फल कौ रस अन्तरगत ही भावै ..दिल में उतर गया . रेणु जी की कहानी की तरह .यह लेखनी तो रुकनी ही नहीं चाहिए .

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  51. सबसे पहले तो ब्लॉग के हैप्पी बड्डे की हार्दिक बधाई .फिर इस प्रसंग के बारे में...बस ज्यों गूँगेहि मीठे फल कौ रस अन्तरगत ही भावै ..दिल में उतर गया . रेणु जी की कहानी की तरह .यह लेखनी तो रुकनी ही नहीं चाहिए .

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