गुरुवार, 23 सितंबर 2010

आभार! (आंच ३६)

आभार!

आचार्य परशुराम राय

आज 23 सितम्बर है। पृथ्वी की दैनिक गति के परिणामस्वरूप दिन-रात का जन्म और उसमें वर्ष के चार महत्वपूर्ण दिन 22 मार्च, 21 जून, 23 सितम्बर और 22 दिसम्बर हैं। 22 मार्च और 23 सितम्बर को दिन-रात बराबर होते हैं, जबकि 21 जून को सबसे बड़ा दिन और 22 दिसम्बर को सबसे छोटा दिन होता है। एक वर्ष पूर्व आज ही के दिन जब दिन और रात बराबर होते हैं, अर्थात 23 सितम्बर को मनोज (manojiofs.blogspot.com) ने ब्लाग जगत में श्री मनोज कुमार जी की एक लघुकथा 'हर हाल में' के साथ अपना पहला कदम रखा था। ऑंच का यह अंक वर्ष भर में इस ब्लॉग के विकास की यात्रा को समर्पित है।

मनोज कुमार जी के साथ आर्डनैन्स फैक्टरी, मेदक (आंध्र प्रदेश) में तीन-चार वर्ष काम करने का सुअवसर मिला था। इनके स्वभाव की सरलता, रचनात्मक प्रवृत्ति, आध्यात्मिक रुझान, प्रबन्धन कौशल, संगत सूझबूझ, अद्भुत धैर्य और हिन्दी के प्रति प्रेम के कारण मैं, स्व. श्री श्याम नरायण मिश्र, श्री राम भरत पासी, श्री नरेन्द्र कुमार शर्मा आदि एक साथ जुड़े और उक्त फैक्टरी की वार्षिक गृह पत्रिका 'सारथ' (वार्षिक) का पहला अंक श्री मनोज कुमार जी के नेतृत्व में प्रकाशित किया गया। इसके बाद 'सारथ' मासिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ। और इस वार्षिक पत्रिका ‘सारथ’ को दूसरे ही वर्ष रक्षा मंत्रालय का पुरस्कार मिला।

मेदक में इनके साथ एक के बाद ऐसी दुखद घटनाएँ हुई, जो अच्छे-अच्छे लोगों को विचलित कर दें। किन्तु श्री मनोज कुमार जी का धैर्य देखकर आश्चर्य हुआ और मन में महाकवि कालिदास की पंक्ति 'विकार हे तौ सति विक्रियन्ते येषां न चेतांसि त एव धीरा:' बार-बार कौंध जाती थी। सन् 2001 में श्री मनोज कुमार जी का स्थानान्तरण चंडीगढ़ हो गया। फिर भी इनके साथ सम्पर्क बना रहा। पुन: ये स्थानान्तरित होकर कोलकाता स्थित मुख्यालय चले गए। विभिन्न अवसरों पर बातचीत हो जाया करती थी। अक्टूबर-2009 में इन्होंने बताया कि एक हिन्दी का साहित्यिक ब्लाग शुरू किया है और उसमें प्रकाशित करने के लिए हम लोग अपनी रचनाएँ भेजें। मुझे इसके विषय में अपनी कोई भी जानकारी नहीं थी। ब्लाग जगत से पूर्णतया अनभिज्ञ था। लेखनी भी रख दिया था। आवश्यकता पड़ने पर कभी कभार अपने विभाग की गृह पत्रिका के लिए वर्ष में एक आर्टिकल लिखना पहाड़ मालूम पड़ता था। लेकिन श्री मनोज कुमार जी की जिज्ञासा और अनुरोध को टालना मेरे लिए थोड़ा कठिन हो जाता है और इस प्रकार धीरे-धीरे मैं और मेरे परम आत्मीय श्री हरीश प्रकाश गुप्त अपनी-अपनी लेखनी लिए ब्लाग में प्रवेश किए। करण 'समस्ततीपुरी' पहले ही इससे जुड़ चुके थे। इस प्रकार 'मनोज' ब्लॉग का कारवाँ बनता गया। एक वर्ष में इस ब्लॉग पर 386 रचनाएँ विभिन्न स्तम्भों पर प्रकाशित हो चुकी हैं। जो इस ब्लाग के लिए और प्रकारान्तर से हिन्दी ब्लॉग जगत के लिए गौरव की बात है।

सितम्बर, 2009 में तो इस ब्लॉग पर कुल चार रचनाएँ ही आयीं। लेकिन अक्टूबर-2009 में धीरे-धीरे इस ब्लॉग ने अपने अंगों को विकसित करना शुरू कर दिया। जिसके परिणामस्वरूप 'फुरसत में', 'देसिल बयना' और 'चौपाल' तीन स्तम्भ बने। 'फुरसत में' की बागडोर मुख्य रूप से श्री मनोज कुमार के हाथ में थी, तो 'देखिल बयना' की कमान श्री करण 'समस्तीपुरी' के हाथों में। धीरे-धीरे अक्टूबर-2009 में लघुकथा, कविता, देसिल बयना, चौपाल, त्यागपत्र (लघु उपन्यास) और 'फुरसत में' ये छ: स्तम्भ काम करने शुरू कर दिए थे, जो क्रमश: सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार को प्रकाशित होने लगे। अंतिम स्तम्भ 'फुरसत में' शीर्ष पर शनिवार और रविवार को पोस्टें लगा करती थीं। इस प्रकार अक्टूबर में 21 रचनाएँ प्रकाशित हुईं। नवम्बर, 2009 में कुल 31 रचनाएँ ब्लॉग पर आईं और इसके बाद इस ब्लॉग ने अपनी रफ्तार पकड़ ली।

तब तक श्री हरीश प्रकाश गुप्त और मैं दोनों ब्लॉग से जुड़ चुके थे। अन्य साहित्यकार मित्रों को भी जुड़ने का आग्रह किया गया, ताकि इस ब्लॉग को हर तरह से समृद्ध किया जा सके। पर वे नियमित रूप से जुड़ नहीं पाये। दिसम्बर के अन्त में अर्थात् नववर्ष की पूर्व संध्या और नववर्ष के अवसर पर कुछ अतिरिक्त पोस्टें लगाने की बात सोची गई और उसे अपने ढंग से अंजाम दिया गया।

कविता और कहानियों पर तब तक कई पाठक आकर अपनी टिप्पणियाँ देने लगे थे। उन टिप्पणियों ने हमें एक नया स्तम्भ प्रारम्भ करने की प्रेरणा दी। इसके परिणामस्वरूप 'ऑंच' सभी स्तम्भकारों की सहमति से प्रारम्भ किया गया, जिसमें अपने ब्लॉग पर प्रकाशित की जाने वाली चुनी हुई कविताओं और कहानियों पर समीक्षा करने की परम्परा का श्रीगणेश हुआ और हर सप्ताह  गुरुवार को इसका प्रकाशन किया जाने लगा। ऑंच का मुख्य उद्देश्य था कविता या लघुकथा के संदेश, रचनाशिल्प आदि को लेकर उनके गुणों और अवगुणों को प्रकाशित कर पाठकों की अनुभूति को रचनाकार तक और रचनाकार की अनुभूति को पाठकों तक पहुँचाना। सभी लोगों ने इस स्तम्भ को सराहा। इसका पहला अंक 28 जनवरी, 2010 को ब्लाग पर आया। जिसमें श्री मनोज कुमार जी द्वारा विरचित 'अमरलता' कविता की समीक्षा दी गई थी। धीरे-धीरे अन्य ब्लाग पर आने वाली अच्छी रचनाओं को भी उनकी अनुमति से इस स्तम्भ में समावेश किया गया। प्रारम्भ में इस स्तम्भ को श्री हरीश प्रकाश गुप्त और मैंने सँभाला। बाद में श्री मनोज कुमार और करण समस्तीपुरी आने लगे। अतिथि रचनाकार डॉ रमेश मोहन झा ने भी इसमें अपना सहयोग दिया। अब तक इसके ३५ अंक प्रकाशित हो चुके हैं।

इस स्तम्भ ने फिर एक जिज्ञासा को जन्म दिया कि समीक्षा के मानदण्डों पर भी चर्चा के लिए एक स्तम्भ बनाया जाये। श्री मनोज कुमार जी से चर्चा के दौरान मैंने कहा कि इन सब चीजों को कौन पसन्द करेगा या पढ़ना चाहेगा। केवल समय और श्रम गँवाने के अलावा कुछ नहीं होना है। फिर भी श्री मनोज कुमार जी अपने विचार पर अडिग रहे। परिणामस्वरूप 'भारतीय काव्यशास्त्र' की श्रृंखला शुरु की गई और इसके लिए रविवार का दिन नियत हुआ। इसका पहला अंक 7 फरवरी को प्रकाशित हुआ। जिसमें पहले भाग में भारतीय काव्यशास्त्र की भूमिका और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लिया गया। अभी हाल ही में दूसरा भाग काव्यशास्त्र की विवेचना प्रारम्भ किया गया।

जुलाई, 2010 में 'त्यागपत्र' श्रृंखला समाप्त होने के बाद शुक्रवार को एक अत्यन्त प्राचीन विद्या 'स्वरोदय विज्ञान' की नई श्रृंखला 23 जुलाई से प्रारम्भ की गई। इसमें हमारे जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग श्वास प्रक्रिया से सम्बन्धित शास्त्रीय और प्रायोगिक तथ्यों को प्रकाशित किया जाने लगा। अब तक इसके 09 अंक निकल चुके हैं। तय यह किया गया कि परिचयात्मक लेखों के बाद इस विषय पर अत्यन्त प्राचीन और प्रसिद्ध ग्रंथ 'शिव-स्वरोदय' का हिन्दी अनुवाद/व्याख्या के साथ प्रकाशन किया जायेगा।

इस दौरान गणतंत्र दिवस, गुरु पूर्णिमा, प्रेमचन्द जयंती, स्वतंत्रता दिवस और तुलसी जयंती पर अतिरिक्त प्रासंगिक रचनाएँ प्रकाशित हुईं। समय-समय पर हमारे अतिथि साहित्यकारों की रचनाएँ भी यहाँ प्रकाशित होती रहीं जिसमें डाँ. रमेश मोहन झा, श्री ज्ञानचन्द्र 'मर्मज्ञ', श्री होम निधि शर्मा, श्री श्याम सुन्दर चौधरी, श्रीमती बीना अवस्थी, श्रीमती मल्लिका द्विवेदी, श्री सत्येन्द्र झा के नाम उल्लेखनीय हैं। इस ब्लॉग पर प्रकाशित रचना  बिहारी समझ बैठा है क्या ? को हिन्दुस्तान ने तो बापू का बलिदान को जनसत्ता ने छापा। परिकल्पना ब्लोगोत्सव और बैसाखनंदन सम्मान भी मिला मनोज कुमार जी के आलेखों को।

इस प्रकार मनोज ब्लॉग ने अपना एक वर्ष पूरा किया। इसकी पहली वर्षगाँठ पर मैं अपने साहित्यकारों और पाठकों को उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए इस ब्लाग की ओर से हृदय से हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। धन्यवाद।

मित्रों आज सच में मेरे पास…….. 

              मनोज

83 टिप्‍पणियां:

  1. पहली वर्षगांठ पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें.

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  2. ब्लाग के एक साल पुरा करने पर हार्दिक बधाई. प्रगति जारी रहे यही कामना है,मनोज जी आपका आभार ..

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  3. बहुत-बहुत बधाई स्वीकार करें मनोज कुमार जी!
    --
    आशा करता हूँ कि इस वर्ष आकड़ों में जरूर इज़ाफा होगा!

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  4. बहुत-बहुत बधाई और आगामी सफ़र के लिए शुभ कामनाए !

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  5. अज ब्लाग का एक वर्ष का सफर पूरा होने पर पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई। हर पोस्ट काबिले तारीफ रही मुझे स्वरोदय पर आलेख बहुत अच्छे लगे, पहले इस पर नाममात्र जानकारी थी वो भी गायत्री महाविग्यान से। इस पर और पढना बहुत अच्छा लगेगा। एक बार फिर से बधाई औरुआने वाले वर्षों के लिये शुभकामनायें। आशीर्वाद।

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  6. sabse pahale apne sabhi pathako aur apane samast aatmiya sahayogiyon ko blog ke ek varsh poora karne par hardik badhai.

    yah aanch nahi blog ka apne prambhik varsh ka poora lekha jokha hai. ek varsh me blog ki pragati bahut sarahaniya rahi hai.
    pahle hi varsh me blog ko pathako ka bhi bahut pyar mila. isase hum sabko garv ki anubhuti hui.

    is avasar par aap sabko punah aabhar.

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  7. .

    बहुत-बहुत बधाई और आगामी सफ़र के लिए शुभ कामनाए !

    .

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  8. Janm din ki hardik badhai en chaar pankiton me preshit karana chahata hun:
    Tum khilo purnima ke sapan ki tarah,
    khushbuon me nahao chaman ki tarah,
    ant ho na tere kirti vistaar ka,
    phail jaao jahan me gagan ki tarah.

    Anant shubhkanaon ke saath:
    -GyanChand Marmagay

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  9. बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें।

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  10. Manoj Ji & Karan Ji..Apdono ko is blog ke pahli varshganth par hardik badhai...
    Karan JI..apne kaha tha jaldi aaiyega to jalebi milega..isliye mai aj jadli jaldi apke blog par aai gai garma garam jalebi khane..bt meko ni mila :(

    Chaliye koi ni jalebi to kabi b khaya ja sakta hai..bt apklogon ke is blog par bahoooooot kuch sikhne ko mila...achi achi bate...achi achi kavitayen rachnayen padhne ka sobhagya prapt hua...Mujhe to aj aisa lag raha hai ki aj mera he bday ho :)...ekdum happy happy hun mai aj....

    Aage b issi tarah aplogon ke blog se jude rahne ki iccha hai...

    Waise meko laga tha aj kuch dhamakedar post hoga...bt aj to aanch ka din tha..bt ka kahe ye aanch meko bilkul samjh ni aata..waise aj ka post samjh me aa gaya...

    Ab hum zada ni likhenge ni to fero se karan ji kahenge parchiye chhap di :)

    Ka kare kavita likhne ka bada sauk hai bt ni likh pate isliye commnt he likh dete hai...

    Ab chalte chalte ek bat fir se apsabhi ko dil se bahooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooot sari badhaiyan.....

    Manoj ji...Ummid hai aplogon ka sath humesa isi tarah bana rahega...
    Bahot bada wala dhanyawad aplogon ko..

    Sorry karan ji fero se parchi chhap gaya lakn jo b chhapa hai ekdum dil se chhapa hai :)

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  11. ई-मेल से प्राप्त हुआ
    bihari blogger to me
    show details 10:22 AM (19 minutes ago)
    आदरणीय मनोज जी,
    हमारे अपार्टमेन्ट में ट्रान्सफार्मर जल गया कल बारिश के कारण..
    चुंकि हाई टेंशन लाइन है, इसलिए दो दीं समय लगेगा कहते हैं.
    इसलिए फिलहाल नेट से दूर हूं..ऑफिस में सिर्फ मेल चलता है.
    चलिए हमारी तरफ से आपको एक साल पूरा करने की बधाई.
    .
    आपका यह एक वर्ष, ब्लॉग इतिहास में मील का पत्थर साबित
    हुआ है. न सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर एक रचनाकार के रूप में, अपितु अन्य
    रचनाकारों को समाहित कर, विभिन्न विषयों पर आपके पोस्ट साहित्य
    की एक धरोहर हैं. कविता, लेख, कथा, लघु कथा, प्रादेशिक व आंचलिक
    कथा, अनुवाद, परिचर्चा, समीक्षा, साहित्य विवेचना, चर्चा आदि हर विधा
    पर स्तरीय सामग्री आपने हम तक पहुंचाई है. और इसके लिए हम ही
    नहीं, समस्त ब्लॉग जगत आपका आभारी है.
    ब्लॉग परम्परा की एक सर्वथा उपेक्षित (?) विधा रही है, टिपण्णी करना.
    आम तौर पर सामान्य सी टिप्पणी बहुत प्रचलित रही है. किन्तु आपने
    इस मिथक को भी भंग किया है. आपकी टिप्पणियां भी सारगर्भित,
    प्रेरणादायक एवं गरिमापूर्ण रहती है.
    स्मरण हो कि मैंने व्यक्तिगत तौर पर यह कहा था कि मैं तो आपके
    पदचिह्नों पर चलता हूं, क्योंकि जहां भी टिप्पणी देने जाता हूं, आप पहले से
    वहां उपस्थित होते हैं.
    पुनः हमारी शुभकामनाएं आपके साथ. इसी प्रकार आप निरंतर लिखते रहें
    और हमारी साहित्य कि पिपासा की शान्ति हेतु तत्पर रहें, यही हमारी प्रभु
    से प्रार्थना है!
    सलिल - चैतन्य

    उत्तर देंहटाएं
  12. Again,, Bahut - Bahut Badhai...

    @ Manoj Ji Namaskar,
    yon is blog ke bare men kahna mushkil, iske sahare mai bahut kuch sikha hun, jiska bakhan karne ke lie minimum 4 varsh chahiye. Aabhar vyakt karata hun iske lekhak dal ko jo Pathkon ko natmastak kar die.

    @Aasha hi nahi purn vishwash hai ki ye blog ujjaval hai.

    उत्तर देंहटाएं
  13. dheri subhkamnayen swikaar karen!
    may this blog keep on achieving milestones in future too....

    nice post about the blog... padhte hue aisa laga mano puri yatra mein saath rahe hon...
    dhanyavad!

    उत्तर देंहटाएं
  14. ब्लॉग की वर्षगाँठ पर बहुत बहुत बधाई ...आपके ब्लॉग पर अनेक विधाओं को पढने का सुअवसर मिला ..जहाँ कविताएँ संवेदनाओं को जगाती हैं वहाँ आंच सोचने पर मजबूर करती है ...काव्यशास्त्र की श्रृंखला नयी जानकारी देती है तो लघुकथाएं सामाजिक विषमताओं को बताती हैं ...देसिल बयना अपना एक अलग अंदाज़ रखते हुए लोकोक्तियों को हम तक पहुंचाता रहा है ..आपके ब्लॉग पर हर सामग्री पठनीय होती है ...

    आपका ब्लॉग इसी तरह समृद्ध रहे और निरंतर प्रगति करे यही कामना है ...
    इस ब्लॉग से जुड़े हर रचनाकार को बधाई और शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  15. आदरणीय मनोज जी,.
    आपका यह एक वर्ष, ब्लॉग इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ है. न सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर एक रचनाकार के रूप में, अपितु अन्य
    रचनाकारों को समाहित कर, विभिन्न विषयों पर आपके पोस्ट साहित्य की एक धरोहर हैं. कविता, लेख, कथा, लघु कथा, प्रादेशिक व आंचलिक
    कथा, अनुवाद, परिचर्चा, समीक्षा, साहित्य विवेचना, चर्चा आदि हर विधा पर स्तरीय सामग्री आपने हम तक पहुंचाई है. और इसके लिए हम ही
    नहीं, समस्त ब्लॉग जगत आपका आभारी है.
    ब्लॉग परम्परा की एक सर्वथा उपेक्षित (?) विधा रही है, टिपण्णी करना.
    आम तौर पर सामान्य सी टिप्पणी बहुत प्रचलित रही है. किन्तु आपने इस मिथक को भी भंग किया है. आपकी टिप्पणियां भी सारगर्भित,
    प्रेरणादायक एवं गरिमापूर्ण रहती है. स्मरण हो कि मैंने व्यक्तिगत तौर पर यह कहा था कि मैं तो आपके पदचिह्नों पर चलता हूं, क्योंकि जहां भी टिप्पणी देने जाता हूं,आप पहले से
    वहां उपस्थित होते हैं.

    पुनः हमारी शुभकामनाएं आपके साथ. इसी प्रकार आप निरंतर लिखते रहें और हमारी साहित्य कि पिपासा की शान्ति हेतु तत्पर रहें, यही हमारी प्रभु
    से प्रार्थना है!
    सलिल - चैतन्य

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत बहुत बधाई वर्षगांठ की .आपके सतत परिश्रम को नमन

    उत्तर देंहटाएं
  17. बलॉग की पहली वर्षगांट पर आपको हार्दिक बधाई । ।इस एक साल के इस छोटे से सफर में आप के बलॉग ने काफी तरक्की की है जिसे देखकर सच में आश्चर्य होता है । ईश्वर करें आपका ब्लॉग दिन-दूनी और रात-चौगुनी तरक्की करें ।

    उत्तर देंहटाएं
  18. @ नीलम जी आप हमारे ब्लॉग पर बहुत शुरु के दिनों में ही आईं। ये रही आपकी पहली टिप्पणी

    संस्कृति सरोकार / Sanskriti Sarokaar ने कहा…

    सचमुच गंभीर चिंता का विषय है यह। ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य कितना उज्जवल है उसी को दर्शाता है यह। शुक्र है कि वह कबाड़ी के यहां से फुटपाथ पुस्तक विक्रेता के पास पहुंच कर फ़िर भी उपलब्ध तो रहा तथा किसी जागरूक नागरिक की निगाह उस पर पड़ गई। ग़नीमत है कि कहीं उसके पन्नों में मूड़ी या आलू चॉप नहीं परोस दी गई। और......

    Wednesday, 21 October, 2009

    उत्तर देंहटाएं
  19. @ निर्मला दीदी आपका आशीर्वाद बहुत शुरु से मिलता रहा हमें। याद है जब आपने पहली बार कहा था
    Nirmla Kapila ने कहा…

    हा हा हा बहुत बडिया आभार्

    Wednesday, 14 October, 2009

    उत्तर देंहटाएं
  20. सृजन का यह सिलसिला जारी रहे। शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  21. @ निर्मला दीदी
    आज भी आपकी ये पंक्तियां मुझे प्रेरित करती हैं, क्यों कि इस एक टिप्पणी के बाद लगा कि लोग अब हमें सीरियसली पढ रहे हैं।
    Nirmla Kapila ने कहा…
    छोड़ दी बैसाखियाँ जब,
    चरण ख़ुद चलने लगे।
    हृदय में नव सृजन के
    भाव फिर पलने लगे।
    भावनाओं का उमड़ता, वेगमय उल्लास लेकर।
    समय देहरी पर खड़ा है हाथ में मधुमास लेकर।
    एक गहरी श्वांस लेकर !!
    आज सुबह आते ही सब से पहले आपकी रचना पढी तो मन एक नई सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। लाजवाब प्रेरणा देती रचना के लिये धन्यवाद्
    Wednesday, 21 October, 2009

    उत्तर देंहटाएं
  22. @ रचना जी,
    आपको याद है आप पहली बार कब आईं थी हमारे ब्लॉग पर और क्या कहा था? चलिए याद दिलाता हूं
    Rachna ने कहा…
    Karan Ji

    Bat to bilkul sai hai ..jiska kam ho usi ko karna chaiye..lakn kabi kabi dusro ki bhalai b karni chaiye...ab gadhe ne to bhalai ki..ab uski pitai ho gai to bechare gadhe ka kya dosh...isliye gadhe ne jo kiya sai kiya...aur jaruri ni hai ki jiska kam wahi kare...koi aur b usse kar de to achi bat hoti hai..

    Waise prayas achi hai..aise likha karen...hamari subhkamnayen apke sath hai..

    Rachna
    Thursday, 22 October, 2009

    उत्तर देंहटाएं
  23. @ मनीश जी
    आपने पहली बार क्या कहा था यद दिलाऊं?
    Manish ने कहा…
    jiska kaam usee ko saaje padh kar maja aa gaya ! Ab hum bhi sirf apna hee kaam karenge
    Thursday, 22 October, 2009

    उत्तर देंहटाएं
  24. @ शमीम जी
    आप भी हमारे शुरु के दिनों से साथ हैं और ह्मारा हौसला बड़ाते रहे हैं, देखिए ना

    शमीम ने कहा…
    Aapne ek chote se prashn ka uttar hame vayangyatmak rup me parosa iske liye aap dhanyawaad ke paatr hai.Yudhisther ko is prashn ka uttar us yug me nahi mila lakin aapne to uttro ki jhari laga di.Aisi rachna likhte rahe.

    Monday, 02 November, 2009

    उत्तर देंहटाएं
  25. सत्य बात है....
    इस मंच/ब्लॉग पर प्रकाशित सामग्रियों में जिस प्रकार स्तर और गुणवत्ता का ख़याल रखा जाता है ,इसकी मुरीद हो गयी हूँ मैं...
    स्तरीय पढने वालों के लिए यह तीर्थस्थल है...

    मेरी अनंत शुभकामनाये हैं...ईश्वर आप सबको साहित्य के इस सेवा के लिए पुरस्कृत करें..

    मंगलाशा के साथ,
    रंजना.

    उत्तर देंहटाएं
  26. @ रंजना जी आपको याद है पहली बार कब आईं थी आप हमारे ब्लॉग पर,ये देखिए आपकी पहली टिप्प्णी
    रंजना ने कहा…

    वाह......वाह......वाह !!!!
    आपकी इस रचना ने तो मुग्ध ही कर लिया.....
    भावः और अभिव्यक्ति दोनों ही अप्रतिम हैं....
    अतिसुन्दर इस महत रचना को पढ़वा इतना आनंद देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार..

    Wednesday, 28 October, 2009

    इससे रोचक तथ्य याद दिलाऊं, हमारे यहां आप चौपाल में शामिल होकर आपने एक रचना भी दी थी। और टिप्पणी में कहा था
    रंजना ने कहा…

    विषय पर सारगर्भित चर्चा करवाने के लिए बहुत बहुत आभार....इसी बहाने विद्वजनों के विचार जानने का सुअवसर मिला,बड़ा ही अच्छा लगा...

    Friday, 06 November, 2009

    उत्तर देंहटाएं
  27. आदरणीय मनोज जी वर्षगाँठ आते आते मैं भी आपके मिशन का हिस्सा बन गया, इस से मैं अभिभूत हूँ.. आपसे जुड़ने से पूरब हिंदी ब्लॉग्गिंग को बहुत गंभीरता से नहीं ले रहा था.. लेकिन अब सोच बदल गई है.. जिस उच्च कोटि की सामग्री आप प्रस्तुत कर रहे हैं वह हिंदी ब्लॉग्गिंग में कम हो रहा है.. मनोज के वर्षगाँठ पर हमारी हार्दिक शुभकामना... और इस परिवार का हिस्सा होने के नाते हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ गयी है... हिंदी के प्रति, साहित्य के प्रति... नई जिम्मेदारी और उम्मीदों को पूरा करने के लिए उर्जा और उष्मा की कामना करता हूँ...

    उत्तर देंहटाएं
  28. पहली वर्षगांठ पर मैं आपको तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हू। लेकिन कुछ मीठा हो जाए तो अच्छा होता।

    उत्तर देंहटाएं
  29. बहुत अच्छी प्रस्तुति. हार्दिक शुभकामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  30. बधाई हो !!
    आपके ब्लॉग के एक वर्ष पूर्ण होने पर बहुत शुभकामनाएं । पूरे वर्ष के दौरान आपके ब्लॉग के माध्यम से हिंदी के विविध रूप देखने को मिले । नई जानकारियों एवं लेखों से सुसज्जित आपका ब्लॉग आगे भी तरक्की करता रहे ऐसी मेरी कामना है ।

    उत्तर देंहटाएं
  31. @ शास्त्री जी,
    आपको याद दिलाऊं, आपने पहली टिप्पणि जो हमारे ब्लॉग पर की थी की?
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
    मनोज कुमार जी!
    आपने बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है!
    बधाई!
    Tuesday, 10 November, 2009

    उत्तर देंहटाएं
  32. भाषाई और तथ्यगत-दोनों ही दृष्टियों से सातों दिन अलग प्रस्तुतियों ने इस ब्लॉग को इन्द्रधनुषी बना दिया है। हिंदी साहित्य की दुरूह सामग्री को रूचिकर शब्दों में प्रस्तुत करना मौलिक सृजन से कुछ कम नहीं। टिप्पणियों का मोह क्षणिक होता है। आप सबने इस ब्लॉग को समृद्ध करने में जो समय और श्रम लगाया,उसका असल पुरस्कार यह होगा कि हिंदी का पाठक गूगल सर्च में जो ढूंढे,उसके प्रथम रिजल्ट पेज पर आपका भी लिंक दिखे। यह देखना भी दिलचस्प है कि लखकों का यह कारवां एकला चलो रे के प्रदेश से बनना शुरू हुआ। पोस्ट पढ़कर यह विश्वास भी पैदा हुआ है कि इस ब्लॉग पर यह क्रम अनवरत रहेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  33. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  34. कहा कहौं मन की ख़ुशी कहत न बने खगेश !
    केवल वर्णन करि सकहिं सहस शारदा शेष !!
    महज साल भर के सफ़र में एक भरा-पूरा कारवां........ पीछे मुड़ कर देखने पर याद अत है दुष्यंत कुमार का एक शे'र
    कौन कहता कि आसमां में सुराख नहीं होता !
    एक कंकर तो तबियत से उछालो यारों !!
    कहना तो बहुत कुछ था लेकिन भावनानों के आवेग ने लगता है जैसे सारे शब्द छीन लिए हैं. आज "आभार" पर आभार के दो शब्द ही कह पाऊँगा.
    इस वाषिक यात्रा के प्रथम पराव पर मैं सबसे पहले दृश्य-अदृश्य उन शक्तियों का आभार प्रकट करता हूँ, जिनकी प्रेरणा से हमारी भावनाओं को शब्द मिले.
    दूसरा आभार उनका, जिन्होंने साथ देने का भरोसा दिलाया, लेकिन किसी कारण से इस पराव तक साथ आ न सके.
    तीसरा आभार उनका, जो तमाम सांसारिक व्यस्तताओं के बावजूद इक्के-दुक्के ही सही लेकिन अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति का अहसास दिलाते रहे.
    चौथा आभार उनका, जिन्होंने हमारी हौसलाफजाई तब-तब किया जब हमारा कोई प्रयास उनके अंतर्मन को सहलाने में सफल रहा.
    पांचवा आभार उनका, जिन्हें हमारी प्रस्तुतियां पसंद आयी या नहीं, लेकिन हर पोस्ट पर वाह-वाह करते रहे.
    छठा आभार उनका, जिन्होंने हृदय खोल कर आलोचना, सलाह, सराहना और शुभ-कामनाएं दी.
    आभार की इस कड़ी में मैं उन समर्पित पाठकों को याद करता हूँ, जिनके बिना अब हमारी कोई भी प्रस्तुति पूर्ण नहीं लगती.
    और विशेष आभार उनका, जो आज इस ब्लॉग के वार्षिकोत्सव में सम्मिलित हुए.
    आभार की श्रृंखला रुक नहीं सकती..... बंदौ संत असज्जन चरणा.... ! लेकिन इस पराव पर आभार की बची हुई पोटली मैं इस ब्लॉग के सहयोगियों को समर्पित करता हूँ !
    आप सबों को हृदय से धन्यवाद !!!

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  35. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  36. ब्लांग की वर्षगांठ पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें.युही सालो साल मनाओ ब्लांग का जन्म दिन,धन्यवाद

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  37. मनोज जी आपको और आपकी टीम को ब्लॉगजगत में साल पूरा करने के लिए बधाई और मुबारकबाद।
    आगे भी इसी तरह से हिन्दी की सेवा करते रहिए, यही कामना है।

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  38. @ राज भाटिया जी
    आभार आपका! आपसे कई चीज़ें सीखी, खासकर पोस्ट पर फ़िल्मी गाना लगाने की विधि मैं भूल नहीं सकता। इस ब्लॉग पर आपसे पहला परिचय इस टिप्पणी के माध्यम से हुआ था,

    राज भाटिय़ा ने कहा…
    सच मै क्या बिहार का इतना बुरा हाल है? लेकिन समझ मै नही आता ऎसा क्यो... लोग तो मेहनती है फ़िर ऎसा क्यो.
    आप का धन्यवाद
    Monday, 19 October, 2009

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  39. आपके ब्लाग के जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  40. बहुत-बहुत बधाई और आगामी सफ़र के लिए शुभ कामनाए !

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  41. आदरणीय मनोज जी,
    हमारी शुभकामनाएं आपके साथ. इसी प्रकार आप निरंतर लिखते रहें
    आने वाले वर्षों के लिये शुभकामनायें।

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  42. @ संजय भास्कर जी,
    आज भी उसी आत्मीयता से आपने याद किया जिस तरह से पहली बार मिले थे, याद आया, नहीं? दिलाता हूं याद,

    संजय भास्कर ने कहा…
    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.
    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com
    Email- sanjay.kumar940@gmail.com
    Wednesday, 18 November, 2009

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  43. @ मोहिसीन जी,
    अपका पहला मिलन याद करता हूं
    मोहसिन ने कहा…
    बहुते बढिया कहानी प्रस्तुति भी सराहनीय।
    Thursday, 19 November, 2009

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  44. @ बूझो तो जानें
    आभार। आप को याद है आप सबसे पहले कब आये थे? बोझो तो जानें? मैं ही बता देता हूं
    बुझो तो जाने ने कहा…
    अच्छी कविता । अतिथि तो वैसे भी हमारे यहां श्रद्धा का पात्र होता है,हरिश साहब तो छा गए ।
    Friday, 20 November, 2009

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  45. @ हास्यफुहार जी
    आपकी पहली हंसी इस पोस्ट पर ऐसे गूंजी थी
    हास्यफुहार ने कहा…
    हा-हा-हा-हा ... बढ़िया है।
    Sunday, 22 November, 2009

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  46. मनोज जी , पहली वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई । सार्थक लेखन से आप यूँ ही ब्लॉग जगत की सेवा करते रहें , यही कामना है ।

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  47. @ प्रेमसरोवर जी,
    पहली मुलाक़ात पर आपने कहा था
    प्रेम सरोवर ने कहा…
    ओ! कैटरपिलर नाम से शीर्षक के रूप में संबोधित कविता का काव्‍य-सौष्‍ठव वर्णनातीत है। सौंदर्यशास्त्रियों ने सौंदर्य रहित काया में भी सुंदरता की अनुपम छटा को अतुलनीय, अद्वितीय जैसे शब्‍दों से विभूषित किया है। सांगोपांग अध्‍ययन के पश्‍चात आपकी उक्‍त कविता में कैटरपिलर के ठहराव में जिस गति को आपने उदभाषित किया है, उसके अग्रसर होने की अभिव्‍यक्ति से पूर्ण सहमत हूं। इसके माध्‍यम से आपने एक कुशल कवि के रूप में कवि-कर्म किया है जिसमें शब्‍द के अर्थों की निष्‍पत्ति लालित्‍य के रूप में हुई है।
    मानवेतर जीव के माध्‍यम से जिस मानसिक संकल्‍पना के आधार पर आपने इस उपेक्षित एवं प्रायः हाशिए पर रहे कैटरपिलर को श्रमजीवियों के दुःख दर्द एवं सामाजिक स्थिति को प्रतिमूर्ति के रूप में अभिव्‍यक्‍त किया है निश्‍चय ही वह प्रशंसनीय है। वर्तमान युग में बदलते सामाजिक संदर्भों को ध्‍यान में रखते हुए ‘कैटरपिलर’ मानव समाज के लिए जीवन को जीने के लिए संघर्ष की महत्ता को रेखांकित करता है। अंततः यह कविता ‘अरथ अमित अति आखर, थोरे’ के रूप में पाठक के समक्ष अपना वर्चस्‍व स्‍थापित करने में समर्थ सिद्ध हुई है।
    Wednesday, 09 December, 2009

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  48. @ संगीता स्वरूप जी
    आपका निरंतर साथ मिलता रहा है और प्रोत्साहन भी। पर पहली बार जब यहां आप आईं तो आपने कहा था
    sangeeta ने कहा…
    aapki ye rachna anuthi hai....ek naye prateek ke madhyam se samaj ki vishamtaon ko darshayaa hai.....badhai
    Saturday, 12 December, 2009

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  49. @ वंदना जी
    धन्यवाद।
    पहली बार आपने कहा था
    वन्दना ने कहा…
    matlab aaj bhagwan ki class laga di hai.
    Saturday, 12 December, 2009

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  50. @ रीता जी
    आभार
    अपकी पहली टिप्पणी थी
    r ने कहा…
    बहुत सुंदर भाव।
    Wednesday, 16 December, 2009

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  51. @ उदय जी
    आभार। जब पहली बर हम मिले थे तो आपने कहा था,
    श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…
    ... बहुत खूब !!!
    Monday, 21 December, 2009

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  52. @ राधारमण जी
    जब हम मिले थे पहली बार तो आपने कहा था
    Kumar Radharaman ने कहा…
    सुंदर प्रस्तुति। जंगली जीवों के बाद अब हम आसमान के परिंदों को अमानवीयता का शिकार होता देख रहे हैं। कइयों की तादाद लुप्तप्राय होने के करीब है। कोई कवि हृदय ही जान सकता है कि पक्षियों को समूह में उड़ते देखना कितना सुखद अनुभव है।
    Tuesday, 29 December, 2009

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  53. वाह! बहुत खूब ! बहुत बहुत बधाई!

    एक साल में ब्लॉग शुरू करके इतना सक्रियता काबिले तारीफ़ बात है।

    इतने सारे ब्लॉगों का नियमित संचालन, दो मंचों से चर्चायें और लगातार पोस्टें और इसके बावजूद अभी तक कोई पंगा न होना- क्या उपलब्धि है भाई।

    साल पूरा होने की बधाई। आगे के लिये शुभकामनायें।

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  54. मनोज जी
    बहुत बहुत बधाई और अनेक शुभकामनाये ब्लाग की पहली वर्षगांठ पर |आपका ब्लाग हिंदी साहित्य का प्रतिनिधित्व करता है इसके माध्यम से अनेक रचनाकारों को पढने का अवसर मिला है |सभी रचनाकारों को बधाई और शुभकामनाये |
    दिन दुनी रात चौगुनी सम्रद्धि पाए सम्रद्ध विचारो से आपका ब्लाग |
    आपकी टिप्पणी भी अपने आप में भाषा से सम्रद्ध होती है |

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  55. बहुत बहुत बधाई हो मनोज भाई .....ये मील का पहला पत्थर पार करने के लिए

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  56. @ शोभना चौरे जी,
    आज सुबह से आपकी प्रतीक्षा कर रहा था।
    आप बहुत खास हैं इस ब्लॉग के लिए। आप हमारे लिए पहले ब्लॉगर थीं जो प्रोत्हसान और मनोबल बढाने के लिए हमारे ब्लॉग पर पधारीं थीं। आपके स्नेह, आशीष और प्रोत्साहन से हम दूसरा पोस्ट लगा बैठे। और कारवां चल पड़ा। आपने कहा था,

    शोभना चौरे ने कहा…
    aaj ke halato ka dard liye sundar rachna .
    abhar
    Friday, 25 September, 2009
    http://manojiofs.blogspot.com/2009/09/blog-post_24.html

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  57. @ अनूप जी
    आभार आपका। आप लोगो ने मनोबल बढाया और हम आज एक पड़ाव पार कर गए। जब पहली बार आप आए थे इस ब्लॉग पर तो आपने कहा था,

    अनूप शुक्ल ने कहा…
    सुन्दर है जी।
    Tuesday, 17 November, 2009

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  58. @ अजय झा जी
    आभार। इन दिनों आपका इधर आना कम ही है। पर आप हमारे शुरु के दिनों के साथी हैं, और आपकी पहली टिप्पणी थी,

    अजय कुमार झा ने कहा…
    अरे हमारे साथ तो उल्टा हुआ जी ,,,..इंटर के रिजल्ट से पहले ही पहला रिश्ता आ गया ....जो मान गए होते तो बच्चे के साथ ही नौकरी का फ़ार्म भर रहे होते....बांकी घोरा, सरक का समस्या तो हईए है ..
    Sunday, 22 November, 2009

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  59. ब्लाग के एक साल पुरा करने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें.

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  60. बहुत-बहुत बधाई स्वीकार करें मनोज कुमार जी और आगामी सफ़र के लिए शुभ कामनाए !

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  61. ब्लॉग की वर्ष गांठ की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई !!

    उत्तर देंहटाएं
  62. मनोज जी, वर्ष भीतर ही इस ब्लॉग ने अनुकरणीय ऊँचाइयों को छुआ है। गुणवत्ता के लिए तो मैं इसे एक मानक की तरह मानता हूँ। 'पढ़ना, सीखना और चुप रहना' - यहाँ बस यही करता हूँ।
    यह ब्लॉग हिन्दी की शान है। अभिनन्दन।

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  63. पहली वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत बधाई मनोज जी। आप निरन्तर बढ़ते जायें लेखन में यही कामना है।

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  64. @ अर्विंद मिश्र जी
    आभार आपका। जब आप पहली बार इस ब्लॉग पर आए थे तो यह मार्गदर्शन किया था

    Arvind Mishra ने कहा…
    कृपया बैकग्राउंड हलके रंग में करें !
    Tuesday, 15 December, 2009

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  65. @ कुसुम ठाकुर जी,
    आप तो बहुत दिनों से अपने आशीष देती रहीं हैं। पहली बार आशीष स्वरूप आपने कहा था

    Kusum Thakur ने कहा…
    "गहन तिमिर है, पंख पसारे !

    गहन नीरवता, हृदय हमारे !!"

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं , बधाई !!
    Tuesday, 24 November, 2009

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  66. ब्लॉग का एक वर्ष पूरे होने पर आपको ढेर सारी बधाइयाँ और शुभकामनायें! बहुत ही खूबसूरती से आपने प्रस्तुत किया है!सुन्दर और मनमोहक चित्र के साथ आकर्षक पोस्ट!

    उत्तर देंहटाएं
  67. @ गिरिजेश राव जी,
    आपसे दोस्ती बहुत पुरानी है। आप कोलकाता आए, और अलीपुर में ठहरना हुआ पर मिलना ना हो सका। पर आपको याद है हमारे झिंगुर दास को लेकर आपने कितनी रुचि दिखाई थी। पर उसके भी पहले जब आप हमारे ब्लॉग पर आप आए तो आपने कहा था,
    गिरिजेश राव ने कहा…
    अब मैं क्या कहूँ, आज कल खजोहरा और गरम पकौड़ी पढ़ कर उनकी चेतना के एक और आयाम से साक्षात्कार कर रहा हूँ।
    Friday, 16 October, 2009

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  68. @ बबली जी,
    आप तो बहुत शुरु से ही हमारे ब्लॉग पर आकर हमें प्रोत्साहित करती रहीं। बल्कि शोभना जी के बाद आप दूसरे ब्लॉगर थे जिसने हमारी हौसलाआफ़ज़ाई की थी। आपने कहा था,

    Babli ने कहा…
    बहुत बढ़िया लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम! विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें!
    Tuesday, 29 September, 2009

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  69. मनोज जी ,
    आपके ब्लॉग को सतत देखता रहा हूँ .
    भेड़ियाधसान से अलग है यह ब्लॉग , काबिलेतारीफ !
    अपनी ब्लागरी तो चुप सी है पर आज तो चुप न रहा गया .
    उत्तरोत्तर बेहतर करते रहें , आप व आप जन ! शुभकामनाएं !

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  70. बहुत - बहुत बधाई एवं शुभकामनायें ।

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  71. @ गोदियाल साहब,
    आपका साथ बहुत पुराना है। आज आपका आन बहुत अच्छा लगा। जब आप पहली बार आए थे तो आपने कहा था,

    पी.सी.गोदियाल ने कहा…
    बढिया रहा यह आपका यह चक्रव्यूह भी भी ............लोग अकसर कह देते है मगर सोचते नहीं ........ऊपर छत पे, नीचे बेसमेंट में अब इन्हें कौन समझाए कि छत ऊपर ही होती है और बेसमेंट नीचे !
    Monday, 02 November, 2009

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  72. @ सदा जी,
    बहुत शुरु के दिनों से आपका इस ब्लॉग पर आना-जाना लग है। आज के दिन हमें आपकी शुभकामनाएं फिर से हमारा मनोबल बढा गईं। पहली बार आपने कहा था,

    sada ने कहा…
    किन्तु सफलता में सच्चा संघर्ष कहाँ से लाऊं ?
    तुम्ही बताओ बचपन के वो वर्ष कहाँ से लाऊं ??
    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों का चयन भावपूर्ण प्रस्‍तुति, बधाई ।
    Wednesday, 28 October, 2009

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  73. @ अमरेन्द्र भाई,
    पता नहीं कौन सा रिश्ता है जो आपसे आत्मीयता का अनुभव कराता है। आज आपकी उपस्थिति सच में एक सुखद अहसास से कम नहीं है।

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  74. मनोज जी को और उनके साथियों को इस ब्लॉग की पहली वर्षगाँठ पर तहे दिल से मुबारकबाद और शुभकामनाएं की आपका ये ब्लॉग नए नए रंगों से सजता, महकता रहे. हिंदी साहित्य और पौराणिक लेखों को हम सब के आगे लाकर आप जो हमारी संस्कृति के इतिहास बानाने में योगदान दे रहे हैं वो काबिले तारीफ है. आप की ये बगिया यूँ ही चहकती महकती रहे और अपनी रफ़्तार बनाए रखे यही कामना करती हूँ और देरी के लिए क्षमा चाहती हूँ.

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  75. मनोज जी ,
    आपका विविधताओं से पूर्ण ब्लाग बहुत रुचिकर है .
    मुझे विश्वास है आपका चयन और श्रम इसे और ऊँचाइयों तक ले जाएगा .
    शुभ-कामनाएँ स्वीकारें .

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  76. आपके ब्लॉग पर हर सामग्री पठनीय होती है ...आपकी टिप्पणियां भी सारगर्भित,
    प्रेरणादायक एवं गरिमापूर्ण रहती है.आपका ब्लॉग इसी तरह समृद्ध रहे और निरंतर प्रगति करे यही कामना है ...

    ब्लाग के एक साल पुरा करने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें मनोज जी!

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  77. बधाई .... बधाई ..... बधाई ..... ब्लाग के एक साल करने पर हार्दिक बधाई .....

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आपका मूल्यांकन – हमारा पथ-प्रदर्शक होंगा।