शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

शिवस्वरोदय – 60

शिवस्वरोदय – 60

आचार्य परशुराम राय

अहोरात्रं यदैकत्र वहते यस्य मारुतः।

तदा तस्य भवेन्मृत्यु सम्पूर्णे वत्सरत्रये।।331।।

भावार्थ – यदि किसी का एक ही स्वर दिन-रात लगातार प्रवाहित होता रहे, तो समझ जाना चाहिए कि तीन वर्ष में उसकी मृत्यु होगी।

English Translation – If breath of a person flows through either of nostrils continuously day and night, it is understood that only three years of his life are left.

अहोरात्रद्वयं यस्य पिङ्गलायां सदा गतिः।

तस्य वर्षद्वयं प्रोक्तं जीवितं तत्त्ववेदिभिः।।332।।

भावार्थ – यदि किसी की पिंगला नाड़ी (दाहिना स्वर) पूरी तरह दिन-रात लगातार प्रवाहित हो तो समझना चाहिए कि उसके जीवन के केवल दो वर्ष बचे हैं।

English Translation – If the breath of a person flows through right nostril continuously day and night, only two years of his life is left.

त्रिरात्रं वहते यस्य वायुरेकपुटे स्थितः।

तदा संवत्सरायुस्तं प्रवदन्ति मनीषिणः।।333।।

भावार्थ – मनीषियों का मत है कि यदि किसी की एक ही नाड़ी से लगातार तीन रातों तक साँस चले तो समझना चाहिए कि उसका जीवन केवल एक वर्ष शेष रह गया है।

English Translation – According to the wise men if breath of a person flows through one nostril continuously for three nights, his life is left only for one year.

रात्रौ चन्द्रो दिवा सूर्यो वहेद्यस्य निरन्तरम्।

जानीयात्तस्य वै मृत्युः षट्मासाभ्यन्तरे भवेत्।।334।।

भावार्थ – यदि किसी व्यक्ति का बाँया स्वर रात में तथा दाहिना स्वर दिन में लगातार प्रवाहित हो रहा हो, तो समझना चाहिए कि उसके जीवन के मात्र छः माह शेष बचे हैं।

English Translation – If the breath of a person flows through left nostril during the night and through right nostril during the day, only six months of his life are left.

लक्ष्यं लक्षति लक्षणेन सलिले भानुर्यदा दृश्यते

क्षीणो दक्षिणपश्चिमोत्तरपुरः षट्त्रिद्विमासैकतः।

मध्यं छिद्रमिदं भवेद्दशदिनं धूमाकुलं तद्दिने

सर्वैज्ञैरपि भाषितं मुनिवरैरायुः प्रमाणं स्फुटम्।।335।।

भावार्थ – जल में सूर्य का प्रतिबिम्ब यदि किसी ओर से किसी को कटा-फटा दिखे, तो समझना चाहिए कि उसकी मृत्यु एक से छः माह के अन्दर होगी। यदि सूर्य के प्रतिबिम्ब के बीच में छिद्र दिखे, तो समझना चाहिए कि उसकी जिन्दगी मात्र दस दिन की है और यदि प्रतिबिम्ब धूमिल दिखायी दे, तो उसी दिन उसकी मृत्यु निश्चित है, ऐसा सर्वज्ञ समय-ज्ञानी ऋषियों का विचार है।

English Translation – If image of the sun appears broken to a person from any side, his death comes within six months. If he observes a hole in the middle of image, his life is left for ten days and if the image looks cloudy, he dies on the same day. Such observations have been made by saints.

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13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  2. ये मैंने भी किसी किताब में पढ़ा था| बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  3. सूर्य से ही हमारा जीवन है। जब उनकी ही छवि धूमिल पड़ जाए,तो अपशकुन निश्चित।

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  4. बाप रे ...क्या क्या लिखा है ग्रंथों में.

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  5. मेरा भी यही रिएक्शन है ...
    बाप रे ...क्या क्या लिखा है ग्रंथों में!

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  6. आचार्य परशुराम राय जी तो ज्ञान की गठरी खोल रहे हैं। हम भी इसमें से एक कण तो प्राप्त कर ही लेते हैं!

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  7. यह जानकारी रोमांचित कर देने वाली है...

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  8. आचार्य जी!
    एक अनजान भय और सिहरन सी दौड गयी इस अंक को पढकर!! यह अद्भुत ज्ञान अनमोल है!!

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  9. सलिल भाई,
    यह शास्त्र है। इसमें बहुत ऐसी बातें हैं, जिसपर विश्वास करना कठिन हो जाता है। लेकिन अबतक किसी सिद्ध पुरुष को इसके विरुद्ध बोलते नहीं सुना। यहाँ तक कि परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती जी महाराज (मुँगेर में योग विदय़ालय के संस्थापक तथा स्वामी शिवानन्द जी महाराज के शिष्य)ने इसपर काम किया है। वे स्वयं बहुत ही बड़े स्वरयोगी थे। अभी एक या दो वर्ष पूर्व ही उन्होंने अपना शरीर छोड़ा है। आज भी मुँगेर स्थित योग विद्यालय में सन्यासियों को छः माह तक इस विज्ञान के अन्तर्गत प्रशिक्षण दिया जाता है। अतएव न अविश्वसनीय से प्रतीत होने पर भी अविश्वास का कोई कारण नहीं दिखता है। आभार।

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