शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

शिवस्वरोदय – 53

शिवस्वरोदय – 53

- आचार्य परशुराम राय

ऋतुस्नाता रता नारी पञ्चमेSह्नि यदा भवेत्।

सूर्यचन्द्रमसोर्योगे सेवनात्पुत्र संभवः।।286।।

भावार्थ – रजस्वला होने के पाँचवें दिन यदि स्त्री का चन्द्र स्वर प्रवाहित हो और पुरुष का सूर्य स्वर प्राहित हो, तो समागम करने से पुत्र उत्पन्न होता है।

English Translation – If husband and wife have intercourse on the fifth day from the day menstruation starts and husband has right nostril breathing and wife left nostril breathing at the time, the wife will conceive and will be blessed with a male child.

शङ्खवल्लीं गवां दुग्धे पृथ्व्यापो वहते यदा।

भर्तृरेव वदेद्वाक्ये दर्प देहि त्रिभिर्वचः।।287।।

भावार्थ – स्त्री गाय के दूध के साथ शंखवल्ली (एक प्रकार की बूटी) का सेवन कर प्रवाहित स्वर में पृथ्वी तत्त्व या जल तत्त्व का प्रवाह होने पर अपने पति से तीन बार पुत्र के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

English Translation – First the woman should take Shankhavalli (a kind of creeper with medicinal property) with cow milk and when Prithvi Tattva or Jala Tattva is active in the breath, she should request her husband three times for having a son.

ऋतुस्नाता पिबेन्नारी ऋतुदानं तु योजयेत्।

रूपलावण्यसम्पन्नो नरसिंहः प्रसूयते।।288।।

भावार्थ – ऋतुस्नान के समय यदि स्त्री उपर्युक्त पेय का सेवन करे और रजो-समाप्ति के दिन (रजस्वला होने के पाँचवे दिन) पति के साथ समागम करने पर गर्भधारण होता है तथा वह नरसिंह के समान पुत्र को जन्म देती है।

English Translation – If a woman takes the above drink, i.e. Shankhavalli with cow milk, during menstruation period and have intercourse on the day it ceases (fifth day), she will conceive and blessed with a brave male child.

सुषुम्ना सूर्यवाहेन ऋतुदानं तु योजयेत्।

अङ्गीनः पुमान्यस्तु जायतेSत्र कुविग्रहः।।289।।

भावार्थ – ऋतु-स्नान के पाँचवे दिन यदि स्त्री का सुषुम्ना स्वर का प्रवाह हो और पुरुष के सूर्य स्वर का प्रवाह हो, ऐसे समय में किए गए समागम के परिणाम स्वरूप गर्भाधान से अंगहीन और कुरूप पुत्र उत्पन्न होता है।

English Translation – If a woman have intercourse on the fifth day of her menstruation period during flow of breath through both the nostril and her husband has right nostril breath at the time, she will have an ugly and physically handicapped son.

विषमाङ्के दिवारात्रौ विषमाङ्के दिनाधिपः।

चन्द्रेनेत्राग्नितत्त्वेषु वंध्या पुत्रमवाप्नुयात्।।290।।

भावार्थ – ऋतु-स्नान के बाद विषम तिथियों को दिन अथवा रात्रि में जब पुरुष का सूर्य स्वर और स्त्री का चन्द्र स्वर प्रवाहित हो, दोनों का समागम होने पर बन्ध्या स्त्री को भी पुत्र की प्राप्ति होती है।

English Translation – After cessation of menstruation if husband and wife have intercourse on odd dates (according to the lunar month) either during day or night, even a sterile or barren woman will conceive and will be blessed with a son.

ऋत्वारम्भे रविः पुंसां स्त्रीणां च सुधाकरः।

उभयोः सङ्गमे प्राप्तो वन्ध्या पुत्रमवाप्नुयात्।।291।।

भावार्थ – ऋतु के आरम्भ में स्त्री का चन्द्र स्वर प्रवाहित हो और पुरुष का सूर्य स्वर प्रवाहित हो, ऐसे समय में सहवास करने से बन्ध्या स्त्री को भी पुत्र पैदा होता है।

English Translation – If husband and wife have intercourse on the day of start of menstruation and husband has right nostril breathing and wife left nostril breathing at that time, even a sterile or barren woman will also be blessed with a son.

ऋत्वारम्भे रविः पुंसां शुक्रान्ते च सुधाकरः।

अनेन क्रमयोगेन नादत्ते कामिनीजनः।।292।।

भावार्थ – ऋतु के आरम्भ में सहवास के समय पुरुष का सूर्य स्वर प्रवाहित हो रहा हो और स्खलन के समय अचानक चन्द्र स्वर प्रारम्भ हो जाय, तो गर्भ-धारण नहीं हो सकता।

English Translation – As a result of intercourse on the first day of menstruation, conception cannot take place if the husband’s right nostril breath is suddenly changed to left nostril at the time of fall.

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4 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर, ज्ञानवर्धक प्रस्तुति , आभार

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  2. वैज्ञानिक व्याख्या की आवश्यकता है. इतना स्पष्ट कर दूं कि वन्ध्यत्व के कई प्रकार हैं. यहाँ जिस वन्ध्यत्व का उल्लेख किया गया है उसे habitual abortion कहते हैं ....उपरोक्त उपायों से इसी प्रकार के वन्ध्यत्व में लाभ की आशा की जा सकती है. मासिक स्राव के १२ वें दिन से लेकर १४ वें दिन के मध्य का काल ovulation period होता है. स्त्री के गर्भाशय में पहुँचने के बाद पुरुष शुक्राणु तीन दिन तक ही गर्भाधान में सक्षम रह पाता है इसके बाद नहीं . अतः ५ वें दिन समागम करने से गर्भ धारण की संभावना ? प्राच्य भारतीय लेखन में विदेशियों द्वारा प्रक्षिप्तांश भी डाले गए हैं इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

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  3. इस दुर्लभ ग्रन्थ के अनुवाद की उत्तम प्रस्तुति।

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  4. ज्ञान बाँटने के लिए, दिल से है आभार।
    परशुराम आचार्य का, मन है बहुत उदार।।

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