सोमवार, 18 जुलाई 2011

अपना क्या है बचपन – झरना

नव गीत

अपना क्या है बचपन – झरना

clip_image001हरीश प्रकाश गुप्त

IMG_0124अपना क्या है

बचपन – झरना.

 

अविरल कल-कल

चंचल कोलाहल

बस छोटी सी

वय का साथी

खेल चुका है

तज सीमाएं

अब सपनीली

याद समेटे-

सुन्दर सी.

 

एक कहीं कोने में

मन के

आरक्षण है

जीवन भर का

और कहां होगी

किलकारी

जो घर लेगी

उस कोने का।

***

23 टिप्‍पणियां:

  1. मन के कोने में बचपन की यादों को संजोये रखना ...सुन्दर प्रस्तुति

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  2. बहुत बहुत बधाई भाई हरीश जी मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार |

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  3. बहुत ही सतही अभिव्यक्ति । ठीक ही कहा गया है-बचपन की स्मृतियाँ ही तो जीवन की वास्तविक धरोहर हैं। इन्हें संजोकर रखना ही हमें भविष्य के प्रति आशान्वित करता है एवं इसके वशीभूत होकर हमें जीवन से रागात्मक लगाव सा महसूस होने लगता है। धन्यवाद। समय इजाजत दे तो कभी-कभी मेरे पोस्ट पर भी आने की कोशिश करें।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.
    ईश्वर ने शरीर में तीन अवस्थाएँ बचपन,जवानी और बुढ़ापा देकर अलग अलग अनुभवों से गुजरने का मौका दिया.जिसमे बचपन का अनुभव विलक्षण,निर्मल अविस्मरणीय हो जाता है क्यूंकि उस समय हमारा मन निष्कपटता और निर्मलता के निकट होता है और इनका सहज ही अनुभव भी करता है.

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  5. सरल शब्दों में बहुत सुंदर कविता.आभार

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  6. सहज अभिव्यक्ति ..लेकिन गहन भाव का सम्प्रेषण ....!

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  7. आजा वापस प्यारे बचपन, पचपन बड़ा सताए रे |
    गठिया की पीड़ा से ज्यादा, मन-गठिया तडपाये रे |

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  8. ये आरक्षण का कोई विरोध नहीं कर सकता ...
    सुंदर आरक्षण ...सहेजने लायक ...

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  9. यादों सी कविता ...बहुत सुन्दर.

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  10. मन के कोने में बचपन की यादों को संजोये रखना ...सुन्दर प्रस्तुति

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  12. बहुतसुन्दर रचना। बचपन के कोमल भावों का स्मरण कराते हुए ......

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  13. सुंदर कोमल और संवेदनशील भाव

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  14. किलकारियों की श्रंखला, एक के बाद एक, घर को सुवासित करती हुयी।

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  15. बचपन की यादें झरना बन कर उम्र भर किसी कोने में बहती रहती हैं..बहुत सुन्दर रचना ..

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  16. बिलकुल सही...बचपन...निर्झर झरना...

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  17. बिलकुल सही...बचपन...निर्झर झरना...

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  18. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

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  19. गहन भाव लिए लाजवाब प्रस्तुति ... बहुत बहुत बधाई ..

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