शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

शिवस्वरोदय-24

शिवस्वरोदय-24

आचार्य परशुराम राय

शिवस्वरोदय के इस अंक में इडा नाड़ी के प्रवाह-काल में किए जाने वाले कार्यों का विवरण दिया जा रहा है।

समझने की सुविधा की दृष्टि से 102 से 105 तक के श्लोकों को भावार्थ के लिए एक साथ लिया जा रहा है।

स्थिरकर्मण्यलङ्कारे दूराध्वगमने तथा।

आश्रमे धर्मप्रासादे वस्तूनां सङ्ग्रहेSपि च।।102।।

वापीकूपताडागादिप्रतिष्ठास्तम्भदेवयोः।

यात्रादाने विवाहे च वस्त्रालङ्कारभूषणे।।103।।

शान्तिके पौष्टिके चैव दिव्यौषधिरसायने।

स्वस्वामीदर्शने मित्रे वाणिज्ये कणसंग्रहे।।104।।

गृहप्रवेशे सेवायां कृषौ च बीजवपने।

शुभकर्मणि संघे च निर्गमे च शुभः शशि।।105।।

अन्वय – स्थिर-कर्मणि शुभः शशी निर्गमे (यथा) अलङ्कारे दूराध्वगमने आश्रमे धर्मप्रासादे वस्तूनां संग्रहे अपि च वापीकूपताडागादिप्रतिष्ठास्तम्भदेवयोः यात्रा दाने विवाहे च वस्त्रालङ्कारभूषणे शान्तिके पौष्टिके चैव दिव्यौषधिरसायने स्वस्वमीदर्शने मित्रे वाणिज्ये कण-संग्रहे गृहप्रवेशे सेवायां कृषौ बीजवपने शुभकर्मणि संघौ च।

भावार्थ – स्थायी परिणाम देनेवाले जितने भी कार्य हैं, उन्हें इडा अर्थात बाँए स्वर के प्रवाह-काल में प्रारम्भ करना चाहिए, जैसे-सोने के आभूषण खरीदना, लम्बी यात्रा करना, आश्रम-मन्दिर आदि का निर्माण करना, वस्तुओं का संग्रह करना, कुँआ या तालाब खुदवाना, भवन आदि का शिलान्यास करना, तीर्थ-यात्रा करना, विवाह करना या विवाह तय करना, वस्त्र तथा आभूषण खरीदना, ऐसे कार्य जो शान्ति-पूर्वक योग्य हों उन्हें करना, पोषक पदार्थ ग्रहण करना, औषधि सेवन करना, अपने मालिक से मुलाकात करना, मैत्री करना, व्यापार करना, अन्न संग्रह करना, गृह-प्रवेश करना, सेवा करना, खेती करना, बीज बोना, शुभ कार्यों में लगे लोगों के दल से मिलना आदि।

English Translation – Any work, which has long-lasting results in our life, should be started during flow of breath through the left nostril, such as – procurement of golden ornaments, long journey, construction of Ashram or temple or church or mosque, collection of articles, sinking of well or pond, laying down stone of a house, going on pilgrimage, marriage or fixing of marriage, purchase of cloth or ornaments, doing any peaceful work, use of nutritive eatables and medicine, visit to master, friendship, business, Griha-pravesh, collection of grains, any service other than routine duty, agriculture, seed sowing, plantation, to visit the group of people who are involve in auspicious work etc.

अगले सात श्लोकों अर्थात 106 से 112 तक के श्लोकों को अर्थ समझने की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक साथ लिया जा रहा है।

विद्यारम्भादिकार्येषु बान्धवानां च दर्शने।

जन्ममोक्षे च धर्मे च दीक्षायां मंत्रसाधने।।106।।

कालविज्ञानसूत्रे तु चतुष्पादगृहागमे।

कालव्याधिचिकित्सायां स्वामीसंबोधने तथा।।107।।

गजाश्वरोहणे धन्वि गजाश्वानां च बंधने।

परोपकारणे चैव निधीनां स्थापने तथा।।108।।

गीतवाद्यादिनृत्यादौ नृत्यशास्त्रविचारणे।

पुरग्रामनिवेशे च तिलकक्षेत्रधारणे।।109।।

आर्तिशोकविषादे च ज्वरिते मूर्छितेSपि वा।

स्वजनस्वामीसम्बन्धे अन्नादेर्दारुसङ्ग्रहे।।110।।

स्त्रीणां दन्तादिभूषायां वृष्टरागमने तथा।

गुरुपूजाविषादीनां चालने च वरानने।।111।।

इडायां सिद्धदं प्रोक्तं योगाभ्यासादिकर्म च।

तत्रापि वर्जयेद्वायुं तेज आकाशमेव च।।112।।

अन्वय – ये सभी श्लोक लगभग अन्वित क्रम में हैं, अतएव इनका अन्वय नहीं दिया जा रहा है।

भावार्थ – उपर्युक्त कार्यों के अतिरिक्त निम्नलिखित कार्य भी चन्द्र नाड़ी के प्रवाह- काल में प्रारम्भ करना चाहिए-

अक्षरारम्भ, मित्र-दर्शन, जन्म, मोक्ष, धर्म, मंत्र-दीक्षा लेना, मंत्र जप या साधना करना, काल-विज्ञान (ज्योतिष) का अभ्यास करना, नये मवेशी को घर लाना, असाध्य रोगों की चिकित्सा, मालिक से संवाद, हाथी और घोड़े की सवारी या उन्हें घुड़साल में बाँधना, धनुर्विद्या का अभ्यास, परोपकार करना, धन की सुरक्षा करना, नृत्य, गायन, अभिनय, संगीत और कला आदि का अध्ययन करना, नगर या गाँव में प्रवेश, तिलक लगाना, जमीन खरीदना, दुखी और निराश लोगों या ज्वर से पीड़ित या मूर्छित व्यक्ति की सहायता करना अपने सम्बन्धियों या स्वामी सम्पर्क करना, ईंधन तथा अन्न संग्रह करना, वर्षा के आगमन के समय स्त्रियों के लिए आभूषण आदि खरीदना, गुरु की पूजा, विष-बाधा को दूर करने के उपाय, योगाभ्यास आदि कार्य इडा नाड़ी के प्रवाह-काल में सिद्धिप्रद होते हैं। लेकिन इडा नाड़ी में वायु, अग्नि अथवा आकाश तत्त्व सक्रिय हो वैसा नहीं होता, अर्थात इन तत्त्वों के इडा में प्रवाहित हो तो उक्त कार्य को न करना ही श्रेयस्कर है।

English Translation – In addition to the above, following work should also be started during the flow of breath through left nostril –

Akshararambh (start to learn writing of letters by children for the first time), visiting of a friend, initiation in Mantra, birth, liberation from bondage of birth and death, religious work, recitation of Mantra, Sadhana, study of astrology, newly purchased domestic animals, treatment of chronic diseases, conversation with master, riding, to tie horses and elephants in stable,, archery, donation to needy, safe-guarding of wealth; while starting to learn dancing, singing, music and other arts, entering any city or village, to apply Tilak, purchase of land; to help the people who are helpless or suffering from fever or who became faint, to contact with relatives or master (also bosses), collection of fire-wood, even fuel and grains; purchase of ornaments for ladies just before start of rainy season, honour of Guru, effort for subsiding poisonous effect in our body, Yogic practices.

All above good works are suggested to start at the time flow of breath through right nostril for desired results, but it is better to avoid it if air, fire or ether Tattva is active in left nostril breath.

सर्वकार्याणि सिद्धयन्ति दिवारात्रिगतान्यपि।

सर्वेषु शुभकार्येषु चन्द्रचारः प्रशास्यते।।113।

अन्वय – दिवारात्रिगतान्यपि सर्वकार्याणि सिद्धयन्ति, (अतएव) सर्वेषु शुभकार्येषु चन्द्रचारः प्रशास्यते।

भावार्थ – दिन हो अथवा रात इडा के प्रवाह-काल में किए गए सभी कार्य सिद्ध होते हैं, अतएव सभी कार्यों के लिए चन्द्र अर्थात इडा नाड़ी का ही चुनाव करना चाहिए।

English Translation – Whether it is day or night start of all good woks stated in previous verses gives always good results. Therefore we should select always left nostril breath for starting of all good works.

अगले अंक में सूर्य-नाड़ी के प्रवाह काल में किए जानेवाले कार्यों का विवरण दिया जाएगा।

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा पोस्ट। हर समय नई जानकारी मिलती रहती है। नववर्ष-2011 की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  2. सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः।

    सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद्‌ दुःखभाग्भवेत्‌॥

    सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो।

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  3. आपके प्रयास सार्थक हैं ..आपको नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ..स्वीकार करें

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  4. आद.आचार्य जी,
    इडा नाडी के प्रवाह काल में किये जाने वाले कार्यों पर इसके पड़ने वाले प्रभाव का बड़ा ही विस्तृत वर्णन आज के अंक में समाहित है !
    आपका श्रम वंदनीय है !
    नव वर्ष २०११ की अनंत मंगल कामनाएं !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  5. .आप सब को भी नव-वर्ष मंगलमय हो.

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  6. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  7. सबी पाठकों को उत्साह-वर्धन के लिए धन्यवाद।


    अंत में आप सभी लोगों को नववर्ष 2011 की हार्दिक बधाई।

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  8. नववर्ष पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ....

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  9. आपके ब्लॉग पर आकर और पढ़कर अच्छा लगता है.
    मेरा एक दोहा भी आपको समर्पित नए साल में:-
    नया साल फिर आ गया, गया पुराना साल.
    खुशियों से कर जाये ये, तुमको मालामाल.

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  10. सुन्‍दर एवं ज्ञानवर्धक प्रस्तुति......नूतन वर्ष २०११ की आप को हार्दिक शुभकामनाये.

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  11. ज्ञानवर्धक प्रस्तुति..लेख बहुत अच्छा है।
    नव वर्ष 2011 की अनेक शुभकामनाएं !

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