गुरुवार, 7 जनवरी 2010

हो गया ग़म पुराना नए साल में


नमस्कार मित्रों !

नूतन वर्ष के प्रथम चौपाल में आपका सादर अभिनन्दन ! आप सहृदय पाठकों का असीम प्यार फिर खीच लाया है बेंगलूर के प्रसिद्द कवि श्री ज्ञानचंद मर्मज्ञ को हमारे चौपाल में ! इस से पहले श्री मर्मज्ञ जी की मर्मस्पर्शी कविता "भ्रूण-हत्या' ब्लॉग साहित्य में इतिहास रच चुकी है ! नव-वर्ष के आगमन पर ज्ञानजी अजस्र ऊर्जा से ओत-प्रोत अभिनव रचना से आज की चौपाल को प्राणवान बना रहे हैं !!


हो गया ग़म पुराना नए साल में !

छोड़ो सुनना-सुनाना नए साल में !!

सीख लो मुस्कराने की प्यारी अदा,

न चलेगा बहाना नए साल में !!


लाज धनिया की बेटी की महफूज है,

छोड़ो बातें बनाना नए साल में !

जिनकी चौखट से राहें कभी मुड़ गयी,

उनके दर पे भी जाना नए साल में !!


जा के दुश्वारियों से कहो ढूंढ़ ले,

और कोई ठिकाना नए साले में !

चाल बदली हुई है जमाने की अब,

तुम बदल दो ज़माना नए साल में !!



!! नव वर्ष मंगलमय हो !!

*********

-- ज्ञानचंद मर्मज्ञ

20 टिप्‍पणियां:

  1. लाज धनिया की बेटी की महफूज है,

    छोड़ो बातें बनाना नए साल में !

    जिनकी चौखट से राहें कभी मुड़ गयी,

    उनके दर पे भी जाना नए साल में !!


    लाजबाब मनोज जी !

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  2. सुंदर शब्दों के साथ बहुत सुंदर रचना.....

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  3. आपका बहुत बहुत आभार एक शानदार कवि की शानदार रचना से रूबरू करवाने के लिए। एक दम मस्त।

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  4. नववर्ष पर एक अच्छा संदेश देती कविता।

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  5. लाज धनिया की बेटी की महफूज है,

    छोड़ो बातें बनाना नए साल में !

    जिनकी चौखट से राहें कभी मुड़ गयी,

    उनके दर पे भी जाना नए साल में !!
    वाह बहुत सुन्दर सक्रात्मक अभिव्यक्ति है धन्यवाद्

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  6. लाज धनिया की बेटी की महफूज है,

    छोड़ो बातें बनाना नए साल में ......
    बहुत ही उम्दा रचना, धन्यवाद

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  7. आप की इस ग़ज़ल में विचार, अभिव्यक्ति शैली-शिल्प और संप्रेषण के अनेक नूतन क्षितिज उद्घाटित हो रहे हैं।

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  8. श्री ज्ञानचंद मर्मज्ञ की इतनी शानदार रचना प्रस्तुत करने का आभार.

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  9. इस ग़ज़ल को पढ़ कर मैं वाह-वाह कर उठी।

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  10. सुंदर शब्दों के साथ बहुत सुंदर रचना.....

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  11. Awesome........ What a fantastic creation to start a new year. Each word is blended with extra-ordinary beauty and sensiblity. Hats off to the poet.
    HAPPY NEW YEAR 2010 !!

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  12. सुंदर शब्दों के साथ बहुत सुंदर रचना

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  13. 'लाज धनिया की बेटी की महफूज है.............'
    कल्पना की उड़ान में भी कवि अपने सामजिक दायित्व को नहीं भूलता है ! एक-एक शब्द अतुलनीय !!! धन्यवाद !!!!

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  14. ग़ज़ल की रवानगी ने नए साल के आग़ाज़ को कयामत का वक़ार बख्शा है....... ! शुक्रिया !!

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