मंगलवार, 12 जनवरी 2010

तेरी याद सताए

--मनोज कुमार

खिले धूप, यदि छटे कुहासा
फिर बगिया लहराए,
देखें जब हरियाली अंखियाँ
रूप तेरा मन आये,
सरदी के इस मौसम में अब
तेरी याद सताए।


होठों पर हैं कम्पन,
लेकिन गीतों के बोल नहीं,
घना कुहासा,व्याकुल मन है
व्याकुलता अनमोल नहीं?
किरणों-की मुस्कान तिहारी
उसको धुंध छिपाए,
सरदी के इस मौसम में अब
तेरी याद सताए।

घने धुन्ध में रूप तुम्हारा
सिमट-सिमट कर आया,
जिसे देख भारी होता मन
थोड़ा सा शरमाया।
सुरभि तुम्हारी तिरे चतुर्दिक्
पवन उसे बतलाए,
सरदी के इस मौसम में अब
तेरी याद सताए।

द्वारे सजी रंगोली रह-रह
मुझ से करे ठिठोली,
बूंद ओस की झूल रही है,
पाती-पाती डोली।
मधुर मिलन की मनोकामना
मन ही मन इठलाए,
सरदी के इस मौसम में अब
तेरी याद सताए।

सूरज को तो गहन लगा है
दिल में बढा अंधेरा,
दोपहरी में मध्य निशा ने
डाल रखा है डेरा ।
तेरा रूप रोशनी माँगे
झलक जो तू दिखाए,
सरदी के इस मौसम में अब
तेरी याद सताए।

*****

28 टिप्‍पणियां:

  1. प्रकृति का मानवीकरण बेहद रोचक लगा.

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  2. खूबसूरत कवि‍ता के लि‍ये बधाई।

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  3. द्वारे सजी रंगोली रह-रह
    मुझ से करे ठिठोली,
    बूंद ओस की झूल रही है,
    पाती-पाती डोली।
    मधुर मिलन की मनोकामना
    मन ही मन इठलाए,
    सरदी के इस मौसम में अब
    तेरी याद सताए।


    बहुत सुंदर पंक्तियों के साथ बहुत सुंदर रचना....

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  4. ह्रदय को छूने वाली कविता। हर पतझड़ के बाद वसंत जरुर आता है,आमों की मंजरियां सुगंध देने लगती है,कोयल कूक उठता है।

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  5. बहुत सुन्दर कविता बधाई। साथ ही मुझे प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद...

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  6. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    धन्यवाद

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  7. मैने पहले कमेंट किया था पक्का...वो खो गया...फिर भी...तेरी याद सताए।...इसलिए वापस आये देखने!!

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  8. मधुर मिलन की मनोकामना
    मन ही मन इठलाए,
    सरदी के इस मौसम में अब
    तेरी याद सताए।
    ... बहुत खूब, प्रसंशनीय रचना, बधाई !!!!

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  9. घना कुहासा,व्याकुल मन हैव्याकुलता अनमोल नहीं?
    .........
    'सुरभि तुम्हारी तिरे चतुर्दिक्पवन उसे बतलाए'
    .........
    वाह! बहुत ही सुंदर गीत है.
    शब्दों का संयोजन भाया.

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  10. खूबसूरत कवि‍ता ... प्रतीकों का सहज एवं सफल प्रयोग किया गया है।

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  11. घना कुहासा,व्याकुल मन है...
    bahot he sundar kavita.

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  12. बढ़िया बेहतरीन लिखा है आपने ..शुक्रिया इस सुन्दर रचना को पढवाने के लिए

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  13. खिले धूप, यदि छटे कुहासा
    फिर बगिया लहराए,
    देखें जब हरियाली अंखियाँ
    रूप तेरा मन आये,
    सरदी के इस मौसम में अब
    तेरी याद सताए।
    Bahut sunder likhate hai aap.
    sunder soch se hee judee hotee hai ye pratibha !
    Badhai

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  14. अपने प्रिय को स्मरण करते हुए.. रचना अच्छी लगी।

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  15. धुर मिलन की मनोकामना
    मन ही मन इठलाए,
    सरदी के इस मौसम में अब
    तेरी याद सताए।
    वाह पूरी कविता मन को छूने वाली है बधाई

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  16. घने धुन्ध में रूप तुम्हारासिमट-सिमट कर आया,जिसे देख भारी होता मनथोड़ा सा शरमाया।सुरभि तुम्हारी तिरे चतुर्दिक्पवन उसे बतलाए,सरदी के इस मौसम में अबतेरी याद सताए।
    वाह, बहुत सुन्दर, !

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  17. प्रकृति के आवरण के साथ आत्मनिवेदन। बढ़िया है।

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  18. तेरी याद सताए।

    सर्दी की गलन में याद ही की तो ऊष्मा है!

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  19. द्वारे सजी रंगोली रह-रह
    मुझ से करे ठिठोली,
    बूंद ओस की झूल रही है,
    पाती-पाती डोली।
    मधुर मिलन की मनोकामना
    मन ही मन इठलाए,
    सरदी के इस मौसम में अब
    तेरी याद सताए ...

    बहुत ही अच्छी कविता है .... सर्दी का जलवा और प्रियतमा की याद . उसका इंतेज़ार ......... प्रतीक्षा के लम्हे ........ बहुत खूबसूरती से सबको पिरोया है ...........

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