शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

शिवस्वरोदय-26 :: सुषुम्ना नाड़ी

शिवस्वरोदय-26

आचार्य परशुराम राय

क्षणं वामे क्षणं दक्षे यदा वहति मारुतः।

सुषुम्ना सा च विज्ञेया सर्वकार्यहरा स्मृता।।124।।

अन्वय- यदा मारुतः क्षणं वामे क्षणं दक्षे वहति सा सुषुम्ना विज्ञेया सर्वकार्यहारा च स्मृता।124।

भावार्थ- जब साँस थोड़ी-थोड़ी देर में बाँए से दाहिने और दाहिने से बाँए बदलने लगे तो समझना चाहिए कि सुषुम्ना नाड़ी चल रही है। इसी को शून्य स्वर भी कहा जाता है और यह सब कुछ नष्ट कर देता है।

English Translation- When breath changes from left to right and vice versa within seconds then we should understand that Sushumna Nadi is active. This also known as Shunya Swara and it is always harmful in undertaking any work other than spiritual practices.

तस्यां नाड्यां स्थितो वह्निर्ज्वलते कालरूपकः।

विषवत्तं विजानीयात् सर्वकार्यविनाशनम्।।125।।

अन्वय- तस्यां नाड्यां स्थितः वह्निः कालरूपकः ज्वलते, तं सर्वकार्य-विनाशनं विषवत् विजानीयात्।125।

भावार्थ- उस नाड़ी में अर्थात् सुषुम्ना में अग्नि तत्व का प्रवाह काल-रूप होता है। सभी शुभ और अशुभ कार्यों के फल को जलाकर भस्मीभूत कर देता है, अतएव इसे विष के समान समझना चाहिए।

English Translation- When fire factor (Agni Tattva) is active in Sushumna Nadi then it is great destroyer and burns results of all auspicious and inauspicious actions.

यदानुक्रममुल्लङ्घ्य यस्य नाडीद्वयं वहेत्।

तदा तस्य विजानीयादशुभं नात्र संशयः।।126।।

अन्वय- यदा यस्य नाडीद्वयं अनुक्रमम् उल्लङ्घ्य वहेत् तदा तस्य अशुभं विजानीयात्, अत्र न संशयः।126।

भावार्थ- यदि किसी की चन्द्र नाड़ी और सूर्य नाड़ी अपने क्रम में न प्रवाहित होकर एक ही नाड़ी काफी लम्बे समय तक प्रवाहित होती रहे तो समझना चाहिए कि उसका कुछ अशुभ होना है, इसमें कोई संशय नहीं है।

English Translation- In case breath does not flow through left and right nostril in proper order and it flows through only any one nostril for a log period, it should be understood that some thing wrong going to happen with him without any doubt.

क्षणं वामे क्षणं दक्षे विषमं भावमादिशेत्।

विपरीतं फलं ज्ञेयं ज्ञातव्यं च वरानने।।127।।

अन्वय- वरानने, क्षणं वामे क्षणं दक्षे भावं विषमम् आदिशेत्, ज्ञेयं फलं विपरीतं च ज्ञातव्यम्।127।

भावार्थ- हे सुमुखि, जब क्षण-क्षण में बायीं और दाहिनी नाड़ियाँ अपना क्रम बदलती रहें तो ये विषम भाव की द्योतक होती हैं और उस समय किया गया कार्य आशा के विपरीत फल प्रदान करता है (पर आध्यात्मिक साधनाओं को छोड़कर)।

English Translation- O Beautiful Goddess, when breath flow in both the nostrils alternates within short period, the result of any work done during the period is always undesirable (here any work means other than spiritual practices).

उभयोरेव सञ्चार विषवत्तं विदुर्बुधैः।

न कुर्यात्क्रूरं सौम्यानि तत्सर्वं विफलं भवेत्।।128।।

अन्वय- (यदि) उभयोः सञ्चारः (भवति) बुधाः तं विषवत् विदुः, (अत एव) क्रूरं सौम्यानि न कुर्यात्। तत्सर्वं विफलं भवेत्।

भावार्थ- विद्वान लोग दोनों नाड़ियों का एक साथ प्रवाहित होना विष की तरह मानते हैं। अतएव उस समय क्रूर और सौम्य दोनों ही तरह के कार्यों को न करना ही उचित है। क्योंकि उनका वांछित फल नहीं मिलता है।

English Translation- The flow of breath through both the nostrils simultaneously has been considered very harmful. It has been therefore suggested not to start any auspicious or inauspicious work during that period, otherwise there will be undesired result.

जीविते मरणे प्रश्ने लाभालाभे जयाजये।

विषमे विपरीते च संस्मरेज्जगदीश्वरम्।।129।।

अन्वय- यह श्लोक अन्वित क्रम में है, अतएव अन्वय नहीं दिया जा रहा है।

भावार्थ- सुषुम्ना के प्रवाह काल में जीवन, मृत्यु, लाभ, हानि, जय और पराजय आदि के प्रश्न पर ईश्वर का स्मरण करना चाहिए, अर्थात आध्यात्मिक साधना करना चाहिए।

English Translation- We should always do spiritual practices during the flow of Sushumna Nadi without thinking about life, death, profit, loss, victory and defeat.

ईश्वरे चिन्तिते कार्यं योगाभ्यासादिकर्म च।

अन्यतत्र न कर्त्तव्यं जयलाभसुखैषिभिः।।130।।

अन्वय- (सुषुम्नाप्रवाहकाले) जयलाभसुखैषिभिः ईश्वरे चिन्तिते योगाभ्यासादिकर्म च कार्यं, अन्यतत्र (किमपि) न कर्त्तव्यम्।

भावार्थ- सुषुम्ना नाड़ी के प्रवाह-काल में जय, लाभ और सुख चाहनेवाले को ईश्वर का चिन्तन और योगाभ्यासादि कर्म करना चाहिए, इसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं करना चाहिए।

English Translation- The person, who is desirous of victory, profit and pleasure, should do only spiritual practices and nothing else.

सूर्येण वहमानायां सुषुम्नायां मुहुर्मुहुः।

शापं दद्याद्वरं दद्यात्सर्वथैव तदन्यथा।।131।।

अन्वय- यह श्लोक अन्वित क्रम में है, अतएव अन्वय आवश्यक नहीं है।

भावार्थ- सूर्य स्वर के प्रवाह के बाद बार-बार सुषुम्ना के प्रवाहित होने पर न ही किसी को शाप देना चाहिए और न ही वरदान। क्योंकि इस स्थिति में सब निरर्थक होता है।

English Translation- In case, Sushumna Nadi flows now and then after Surya Nadi, we should neither curse anybody nor grant any boon. Because they become useless.

नाडीसङ्क्रमणे काले तत्त्वसङ्गमनेSपि च।

शुभं किञ्चन्न कर्त्तव्यं पुण्यदानानि किञ्चन।।132।।

अन्वय- श्लोक अन्वित क्रम में है।

भावार्थ- स्वरों के संक्रमण और तत्त्वों के संक्रमण के समय अर्थात दो स्वरों और दो तत्त्वों के मिलन के समय कोई भी शुभ कार्य- पुण्य, दानादि कार्य नहीं करना चाहिए।

English Translation- During the transition of two Swaras and Tattvas one should not start any auspicious work.

अगले अंक में भी सुषुम्ना स्वर सम्बन्धी चर्चा ही की जाएगी।

14 टिप्‍पणियां:

  1. आपके इस पोस्ट पर हमेशा ध्यान रखता हूं।यह पोस्ट विशेष ज्ञान से दिल और दिमाग दोनों को अभिसिंचित करता है।सादर।

    उत्तर देंहटाएं
  2. तस्यां नाड्यां स्थितो वह्निर्ज्वलते कालरूपकः।
    विषवत्तं विजानीयात् सर्वकार्यविनाशनम्।।
    --
    सुषुम्ना नाड़ी के बारे में उत्तम शास्त्रोक्त जानकारी देने के लिए आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  3. स्वर विज्ञान का प्रचार प्रसार कर आप बहुत महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। इस कार्य के लिए आपको हमेशा स्मरण किया जाएगा।

    आभार,

    उत्तर देंहटाएं
  4. शिव स्वरोदय के बारे में बहुत उपयोगी जानकारी मिल रही है। आपके प्रयासों के लिए आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बढ़िया प्रस्तुति.मकर संक्रांति पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ....

    उत्तर देंहटाएं
  6. लोहड़ी, मकर संक्रान्ति पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  7. शिवस्वरोदय का हर अंक ज्ञान का भण्डार होता है !
    आचार्य जी के श्रम और अनुभव की खुशबू इसे और भी विशेष बना देती है !
    यह अंक भी हमेशा की भांति ज्ञान वर्धक और उपयोगी है !
    मकर संक्रांति,लोहड़ी ,पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपके ब्लॉग से काफी ज़रूरी जानकारी मिल जाती है और सीखने को मिलता है.आपका श्रम वन्दनीय है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी यह पोस्ट निस्सन्देह मेरी जानकारी से काफी ऊपर लेकिन जानने लायक है । गजल--जानलेवा है पढना अच्छा लगा और देसिल बयना का तो जबाब नही ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही ज्ञानवर्धक पोस्ट , आभार आपका ।

    उत्तर देंहटाएं

आपका मूल्यांकन – हमारा पथ-प्रदर्शक होंगा।