शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

शिवस्वरोदय – 57

शिवस्वरोदय – 57

आचार्य परशुराम राय

09956326011

महीतत्त्वे स्वरोगश्च जले च जलमातृत:।

तेजसी खेटवाटीस्था शाकिनीपितृदोषत:।।315 ।।

भावार्थ – रोग सम्बन्धी प्रश्न के समय स्वर में पृथ्वी तत्त्व प्रवाहित होने पर रोग का कारण प्रारब्ध होता है, जल तत्त्व प्रवाहित होने पर त्रिदोष (वात, पित्त व कफ) और अग्नि तत्त्व प्रवाहित होने पर शाकिनी या पितृदोष होता है।

English Translation – In case there is a question about a disease and Prithvi Tattva is active in the breath at the time, the cause of disease should be deeds of past life. Presence of Jala Tattva in the breath indicates physical cause (Tridosha-Vat, Pitta and Kaf) of disease and Agni Tattva presence indicates a kind of metaphysical cause (Shakini or Pitridosha).

आद शून्यगतदूत: पश्चात्पूर्ण विशेद्यदि।

र्च्छितोऽपि ध्रुवं जीवेदद्यर्थ प्रतिपृच्छति।।316 ।।

भावार्थ – प्रश्नकर्त्ता यदि अप्रवाहित स्वर की ओर से आकर प्रवाहित स्वर की ओर बैठ जाय और किसी रोग के सम्बन्ध में प्रश्न करे, तो अन्तिम साँस गिनता हुआ मूर्च्छित रोगी भी रोगी भी ठीक हो जाएगा।

English Translation – If a person, desirous to know about health of a person, comes from the side, through which nostril breath is absent and sits on the opposite side, i.e. side of running breath, then it should be understand that the patient will recover even he is counting his last breath in unconscious state.

यस्मिन्नङ्गे स्थितो जीवस्तत्रस्थ: परिपृच्छति।

तदा जीवति जीवोऽसौ यदि रोगैरपद्रुत: ।। 317 ।।

भावार्थ – प्रश्नकर्त्ता सक्रिय स्वर की ओर से किसी रोग के विषय में प्रश्न करे, तो रोग किसी भी स्टेज पर क्यों न हो ठीक हो जाएगा।

English Translation – A person standing on the side of active breath questions about a disease, it can be predicted that the disease will be cured what so ever is the stage.

दक्षिणेन यदा वायुर्दूतो रौद्राक्षरो वदेत्।

तदा जीवति जीवोऽसौ चन्द्रे समफलं भवेत् ।। 318।।

भावार्थ –दूत (रोगी का सम्बन्धी प्रश्नकर्त्ता) हड़बड़ाहट में बड़बड़ाता हुआ आए और रोग के सम्बन्ध में प्रश्न करे तथा उस समय सूर्य स्वर प्रवाहित हो रहा हो, तो समझना चाहिए कि रोगी स्वस्थ हो जाएगा। परन्तु यदि उस समय चन्द्र स्वर प्रवाहित हो, तो समझना चाहिए कि रोगी की बीमारी में होगा।

English Translation – If a relative of the patient comes grumbling in hurry and asks about the future of patient’s health during the flow of breath through the right nostril, restoration of health can be predicted. But if it happens during the flow of breath through right nostril, improvement in health can be indicated.

जीवाकारं च वा धृत्वा जीवाकारं विलोक्य च।

जीवास्थो जीवितप्रश्न तस्य स्याज्जीवितं फलम् ।। 319 ।।

भावार्थ – जिस व्यक्ति का स्वर नियंत्रण में हो या उसका मन एकाग्रचित्त हो और वह सक्रिय स्वर की ओर से अपने जीवन के विषय में प्रश्न पूछे, तो उसका उत्तर शुभ फल देनेवाला समझना चाहिए।

English Translation – A person with stable breath or peaceful mind asks question about his life from the side of active breath, a positive answer can be given.

वामाचारे तथा दक्षप्रवेशे यत्र वाहने।

तत्रस्थ: पृच्छते दूतस्तस्य सिद्धिर्न संशय: ।। 320 ।।

भावार्थ – बाईं अथवा दाहिनी नाक से साँस लेते समय यदि कोई किसी के रोगी के सम्बन्ध में प्रश्न करे, तो समझना चाहिए कि बिना किसी सन्देह के रोगी स्वस्थ हो जाएगा।

English Translation – If someone asks about a patient’s health at the time of breathing in either through right nostril or left nostril, it can be predicted that the will recover fully without any doubt.

*****

6 टिप्‍पणियां:

  1. आचार्य जी! चकित करने वाली पोस्ट है... इतना अनमोल ज्ञान, आपके माध्यम से उपलब्ध हुआ है हमें!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सराहनीय प्रयास है आपका, बहुत आभार.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आचार्य जी की ज्ञानगंगा से हम भी सिंचित हो रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं

आपका मूल्यांकन – हमारा पथ-प्रदर्शक होंगा।