शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

शिव स्वरोदय - शरीर में स्थित नाडियां

शिव स्वरोदय - शरीर में स्थित नाडियां

आचार्य परशुरामराय

प्रस्तुत अंक में शरीर में स्थित नाडियों के विषय में शिवस्वरोदय में वर्णित तथ्य दिए जा रहे हैं।

देहमध्ये स्थिता नाड्यो बहुरूपाः सुविस्तरात्।

ज्ञातव्याश्च बुधैर्नित्यं स्वदेहज्ञानहेतवे।।31।।

अन्वय – देहमध्ये स्थिताः ना़ड्यः सुविस्तरात् बहुरूपाः। बुधैः स्वदेहज्ञानहेतवे नित्यं ज्ञातव्याः।

भावार्थ - मनुष्य के शरीर में अनेक नाड़ियों का जाल बिछा हुआ है। बुद्धिमान लोगों को अपने शरीर को अच्छी तरह जानने के लिए इनके विषय में अवश्य जानना चाहिए।

English Translation – Many nerves are spread in the body. Wise persons should know about them. It enable to understand our body well.

नाभिस्थानककन्दोर्ध्वमंकुरा       इव      निर्गताः।

द्विसप्ततिसहस्त्राणि देहमध्ये व्यवस्थिताः।।32।।

अन्वय – नाभिस्थानककन्दोर्ध्वम् अंकुरा इव निर्गताः व्यवस्थिताः (नाड्यः) देहमध्ये द्विसप्ततिसहस्त्राणि।

भावार्थ – शरीर में नाभि केंद्र से ऊपर की ओर अंकुर की तरह निकली हुई हैं और पूरे शरीर में व्यवस्थित ढंग से फैली हुई हैं।

English Translation – These nerves raised from navel centre like sprout and spread through out our body in well arranged manner. However, here they are known as energy channels

नाडीस्था     कुण्डली     शक्तिर्भुजङ्गाकारशायिनी।

ततो दशोर्ध्वगा नाड्यो दशैवाधः प्रतिष्ठिताः।।33।।

अन्वय - नाडीस्था भुजङ्गाकारशायिनी कुण्डलीशक्तिः। ततो दश उर्ध्वगा नाड्यः दश एव अधः प्रतिष्ठिताः।

भावार्थ – इन नाड़ियों में सर्पाकार कुण्डलिनी शक्ति सोती हुई निवास करती है। वहां से दस नाड़ियां ऊपर की ओर गयी हैं और दस नीचे की ओर।

English Translation – Kundalini Shakti, the power which controls functions of our body and whole universe as well, resides in the shape of serpent in these energy channels in the dormant stage. However, its abode is Muladhar Chakra. There from ten energy channels goes upwards and ten downwards in our body.

द्वे द्वे तिर्यग्गते नाड्यो चतुर्विंशति सङ्ख्यया।

प्रधाना  दशनाड्यस्तु   दशवायुप्रवाहिकाः।।34।।

अन्वय – द्वे द्वे तिर्यग्गते नाड्यः सङ्ख्यया चतुर्विशति, (तेषु) दशवायुप्रवाहिकाः दशनाड्यस्तु प्रधानाः।

भावार्थ – दो-दो नाड़ियाँ शरीर के दोनों ओर तिरछी गयी हैं। इस प्रकार दस ऊपर, दस नीचे और चार शरीर के दोनों तिरछी जाने वाली नाड़ियाँ संख्या में चौबीस हैं। किन्तु उनमें दस नाडियाँ मुख्य हैं जिनसे होकर दस प्राण हमारे शरीर में निरन्तर प्रवाहित होते रहते हैं।

English Translation - Two pairs of energy channels go transversally towards ears. Thus, there are twenty four main energy channels in our body. Among them there are ten, which are more important and through them pranic energy flows.

तिर्यगूर्ध्वास्तथाSधःस्था        वायुदेहसमन्विताः।

चक्रवत्संस्थिता देहे सर्वाः प्राणसमाश्रिताः।।35।।

अन्वय - तिर्यग्-ऊर्ध्वाः तथा अधः देहे वायुसमन्विताः चक्रवत् सर्वाः (नाड्यः) देहे प्राणसमाश्रिताः संस्थिताः।

भावार्थ – ऊपर और नीचे विपरीत कोणों से निकलने वाली ये नाड़ियाँ शरीर में जहाँ आपस में मिलती हैं वहाँ ये चक्र का आकार बना लेती हैं। किन्तु इनका नियंत्रण प्राण शक्ति से ही होता है।

English Translation– Upwards, down wards and transversal running these channels cross each other. These crossing points are called centers and controlled by pranic energy.

तासां   मध्ये  दश  श्रेष्ठा  दशानां  तिस्र  उत्तमाः।

इडा च पिङ्गला चैव सषुम्ना च तृतीयका।।36।।

अन्वय – तासां मध्ये दश (नाड्यः) श्रेष्ठाः, दशानाम् (अपि) तिस्रः उत्तमाः – इडा

च पिङ्गला चैव सुषुम्ना च तृतीयका।

भावार्थ – इन चौबीस नाडियों में दस श्रेष्ठ हैं और उनमें भी तीन सर्वोत्तम हैं –

इडा, पिंगला और सुषुम्ना।

English Translation – As stated above there are ten important energy channels out of twenty four and out of ten, three energy channels are the most important and they are Ida, Pingala and Sushumna.

गांधारी   हस्तिजिह्वा  च  पूषा  चैव   यशस्विनी।

अलम्बुषा कुहूश्चैव शङ्खिनी दशमी तथा।।37।।

अन्वय – गांधारी, हस्तिजिह्वा च पूषा यशस्विनी चैव अलम्बुषा, कुहूः शङ्खिनी

चैव दशमी तथा।

भावार्थ – उक्त तीन नाड़ियों के अलावा सात नाड़ियाँ हैं – गांधारी, हस्तिजिह्वा,

पूषा, यशस्विनी, अलम्बुषा, कुहू और शंखिनी।

English Translation – Other seven energy channels are Gandhari, Hastijihva, Pusha, Yashaswini, Alambusha, Kuhu and Shankhini.

अगले अंक में नाड़ियों के स्थान के बारे में चर्चा की जाएगी।

(चित्र :: आभार गूगल सर्च)

20 टिप्‍पणियां:

  1. ये ज्ञान सौंपकर आप मानव जगत का उपकार कर रहे हैं।
    भारतीय एकता के लक्ष्य का साधन हिंदी भाषा का प्रचार है!
    पक्षियों का प्रवास-१

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  2. आपका महती कार्य ब्लाग जगत और साहित्य जगत के लिए धरोहर है। आपका यह कार्य हमेशा स्मरण किया जाएगा।

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  3. 2.5/10


    बाजार में इससे सम्बंधित किताबें अटी पडी हैं. जितना चाहें उतना पढ़ें. बेहतर होगा कि इस ज्ञान से जुडी बातों के लिए एक विशेष ब्लॉग बनाया जाए.

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  4. इस धरोहर को सहेज लिया है। ग्यान सागर निरन्तर बहता रहे। शुभकामनायें।

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  5. कोटि कोटि आभार आपका इस सुन्दर,कल्याणकारी ज्ञानप्रसार के लिए..
    अतिसुखकर लगा यह सब जानना..

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  6. बहुत ही बढ़िया सारगर्वित जानकारी के लिए आभार.

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  7. हर बार की तरह ही यह अंक भी सरस, रोचक और ज्ञानवर्धक रहा।

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  8. इन दिनों यह विषय बहुत प्रचारित/प्रसारित हो रहा है...आचार्य जी ने जो जानकारी दी वह पूरक सिद्ध हुई. आभार!

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  9. आम आदमी अपने अंतस् से ही नहीं,शरीर तक से कितना अनभिज्ञ रहता है!

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  10. @हरीश प्रकाश गुप्त जी @निर्मला कपिला जी
    आपके द्वारा दिए विशेष टिपण्णी के लिए धन्यवाद!

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  11. @रंजना जी @सम्वेदना के स्वर और @मनोज कुमार जी आपके दिए इन सुंदर शब्दों के लिए धन्यवाद!

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  12. @शिक्षामित्र जी @डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी और @महेन्द्र मिश्र जी
    आपके द्वारा दिए ऊंदा टिपण्णी के लिए धन्यवाद!

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  13. @शिखा वार्ष्णेय जी @अनामिका की सदायें और @बूझो तो जानें आप सभी को इस पोस्ट के प्रति अपनी इच्छा प्रकट करने और टिपण्णी के लिए धन्यवाद!

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  14. आपका यह कार्य हमेशा स्मरण किया जाएगा।

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  15. इतनी ज्ञान वर्धक जानकारी के लिए धन्यवाद ! अगर हम इसे अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए संभाल सकें तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी !
    हमें आपके पोस्ट का इंतजार रहता है!
    सादर,
    ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  16. सुन्दर पोस्ट है, धन्यवाद.

    --भारतीय शास्त्रीय वर्णन --आधुनिक शरीर -विग्यान के अत्यधिक निकट है---एलोपथिक शरीर विग्यान में---सुषुम्ना =स्पाइनल कोर्ड, इन्गला-पिन्गला =स्पाइनल कोर्ड के दोनों ओर दो ओटोनोमस प्रणाली की नर्व्स’ २४ मुख्य नाडियां=( =१२-१२ दोनोंओर)मुख्य क्रेनिअल नर्व्स। व चक्र= ओटोनोमस प्रणाली के गुच्छ( प्लेक्सस).....

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