शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

शिवस्वरोदय-18

शिवस्वरोदय-18

आचार्य परशुराम राय

आदौ   चन्द्रः   सिते   पक्षे   भास्करो   हि     सितेतरे।

प्रतिपत्तो हि दिनान्याहुस्त्रिणित्रिणि कृतोदयः।।62।।

अन्वयः सिते पक्षे आदौ चन्द्रः सितेतरे हि भास्करः।

प्रतिपत्तो त्रिणि-त्रिणि दिनानि कृतोदयः आहुः।

भावार्थ- शुक्ल पक्ष में प्रथम तीन दिन सूर्योदय के समय चन्द्र स्वर प्रवाहित होता है और कृष्ण पक्ष में सूर्य स्वर और तीन-तीन दिन पर इनके उदय का क्रम बदलता रहता है। इस प्रकार स्वरोदय काल का क्रम समझना चाहिए।

English Translation- In the beginning of bright fortnight first three days Chandra Swar flows, i.e. breath flows through left nostril, and first three days in dark fortnight Surya swara flows through right nostril. Thereafter every three days both swaras change their order.

सार्धद्विघटिके ज्ञेयः शुक्ले कृष्णे शशी रविः।

वहत्यैकदिनेनैव यथा षष्टिघटी क्रमात्।।63।।

अन्वयः शुक्ले शशी कृष्णे रविः षष्टिघटीक्रमात्

सार्धद्विघटिके एक दिनेन एव वहति (इति) ज्ञेतः।

भावार्थः पिछले श्लोक में बताए गए क्रम से शुक्ल पक्ष में चन्द्र स्वर और कृष्ण पक्ष में सूर्य स्वर प्रतिदिन क्रम से ढाई-ढाई घटी अर्थात एक-एक घंटे साठ घटियों में प्रवाहित होते हैं यदि उनमें किसी प्रकार का अवरोध न किया जाए। घटी के हिसाब से साठ घटी का दिन-रात होता है। इस प्रकार ढाई घटी का एक घंटा होता है।

English Translation: As stated in previous verse, Chandra Swara and Surya swara flow day and night in bright and dark fortnight and change their order after every one hour unless they are changed by physical effort knowingly or otherwise. According to lunar system the period of day and night are calculated in Ghatis and this day-night period is equal to sixty Ghatis. Thus two and half Ghatis make one hour.

वहेयुस्तद्घटीमध्ये  पञ्चतत्त्वानि  निर्देशयेत्।

प्रतिपत्तो दिनान्याहुर्विपरीते विवर्जयेत्।।64।।

अन्वय :- तदघटीमध्ये पंचतत्त्वानि वहेयुः।

प्रतिपत्तो दिनानि निर्देशयेत् विपरीते (तु) विवर्जयेत् (इति) आहुः।

भावार्थः प्रत्येक नाड़ी के एक घंटे के प्रवाह काल में पाँचो तत्त्वों- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का उदय होता है। यदि उपर्युक्त श्लोकों में बताए गए क्रम से प्रातःकाल स्वरों का क्रम न हो तो उन्हें परिवर्तित कर ठीक कर लेना चाहिए, अन्यथा कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

English Translation: During one hour flow of swaras five tattvas- earth, water, fire, air and ether- also appear in every swera flow. If flow of swaras in the morning is not in the order as stated in the previous vesses, we should correct than by applying physical effort. Otherwise we should avoid to undertake any auspicious work.

शुक्लपक्षे   भवेद्वामा   कृष्णपक्षे   च   दक्षिणा।

जानीयात्प्रतिपत्पूर्वं योगी तद्यतमानसः।।65।।

अन्यव :- शुक्लपक्षे वामाभवेद् कृष्णपक्षे च दक्षिणा

प्रतिपत्पूर्वं तद् मानसः योगी जानीयात्।

भावार्थः- शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को इड़ा तथा कृष्ण-पक्ष की प्रतिपदा को पिंगला नाड़ी चलनी चाहिए। तब योगी को दत्तचित्त होकर कार्य करना चाहिए। उसमें उसे सफलता मिलती है।

English Translation: On the first day of bright fortnight ida Nadi flows but on the first day of the dark fortnight it is Pinda to flow. Then it is auspicious for yoga to undertake any work to perform.

शशाङ्कं     वारयेद्रात्रौ     दिवा      वारयेत्भास्करम्।

इत्याभ्यासरतो नित्यं स योगी नात्र संशयः।।66।।

अन्वय :- (यः) रात्रौ शशाङ्कं वारयेत् दिवा (च) भास्करं वारयेत् सः योगी, न अत्रसंशयः।

भावार्थः- रात में चन्द्रनाड़ी और दिन में सूर्यनाड़ी को रोकने में जो सफल हो जाता है वह निस्सन्देह योगी है।

English Translation: A person who is competent to stop the flow of Chandra Nadi during night and surya Nadi during the day undoubtedly he is a yogi.

सूर्येण     बध्यते     सूर्यः     चन्द्रश्चन्द्रेण     बध्यते।

यो जानाति क्रियामेतां त्रैलोक्यं वशगं क्षणात्।।67।।

अन्यवः सूर्येण सूर्यः बध्यते चन्देण च चन्द्रः बध्यते,

यः एतां क्रियां जानाति(तस्य) त्रैलोक्यं क्षणात् वशगं (भवेत्)।

भावार्थ- सूर्यनाड़ी द्वारा अर्थात् पिंगला नाड़ी द्वारा सूर्य को अर्थात् शरीर में स्थित प्राण ऊर्जा को नियंत्रित किया जाता है तथा चन्द्र नाड़ी अर्थात् इड़ा नाड़ी द्वारा चन्द्रमा को वश में किया जा सकता है। यहाँ चन्द्रमा मन का संकेतक है। अर्थात् इडा द्वारा मन को नियंत्रित किया जाता है। इस क्रिया को जो जानता है और उसका अभ्यास करके दक्षता प्राप्त कर लेता है, वह तत्क्षण, तीनों लोकों का स्वामी बन जाता है।

English Translation- Sun can be controlled with the help of usry swara of pingala Nadi and Moon with the help of Chandra wara or ida Nadi. The person who knows this technique and masters it by practice, he becomes lord of the universe three lokas Here sun is the source of pranic energy, whereas moon is mind.

उदयं       चन्द्रमार्गेण      सूर्येणास्तमनं      यदि।

तदा ते गुणसंघाता विपरीतं तु विवर्जयेत्।।68।।

अन्वयः यदि चन्द्रमार्गेण उदयं सूर्येण (च) अस्तमनं (भवेत्)

तदा ते (नाड्यो) गुण संघाता, (परन्तु) विपरीतं विवर्जयेत्।

भावार्थ- यदि चन्द्र नाड़ी में स्वर का उदय हो और सूर्यनाड़ी में उसका समापन हो, तो ऐसी स्थिति में मिली सम्पति कल्याणकारी होती है। परन्तु यदि स्वरों का क्रम उल्टा हो, तो कोई लाभ नहीं मिलेगा। अतएव उसे छोड़ देना चाहिए।

English Translation- When in the beginning Swara flows through Chandra Nadi and it ends in the Surya Nadi. Then any achievement is beneficial, but flow of opposite Swaras is not like that! Therefore in the opposite situation of swaras any kind of properties or achievements should be avoided.

14 टिप्‍पणियां:

  1. Swaroday kal kram ke sambandh mein achhi jankari mili.Kamna hai Shivswaroday nit nai uchchaion ko sparsh karne ki disha mein apna ek mahatvapurn pratiman sthapit karne mein saphal hoga. Dhanyavad.

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  2. ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए आभार।

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति, राय जी!

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  4. अत्यंत उपयोगी पोस्ट। आपका महती कार्य ब्लाग जगत और साहित्य जगत के लिए धरोहर है। आपका यह सार्थक प्रयास हमेशा स्मरण किया जाएगा।

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  5. बहुत सुंदर व ज्ञानवर्धक आलेख।

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  6. उपयोगी और सार्थक प्रस्तुति।

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  7. बहुत ही ज्ञानवर्धक और सार्थक पोस्ट !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  8. बहुत ही अमूल्य ज्ञानवर्द्धक जानकारी दी है बढ़िया प्रयास है ... आभार

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति....ज्ञानवर्धक ।

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  10. हिंदी के साथ अंग्रेजी अनुवाद का ढंग निराला है ।
    यह प्रयोग मुझे बहुत पसंद है ।

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  11. कल्याणकारी व ज्ञानवर्धक इस सुन्दर आलेख के लिए बहुत बहुत आभार !!!!

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  12. aadarniy sir
    bahut hi gaynvardhak avam akut jankaariyyo ka khajana hai aapka blog.
    ek baat aur kahna chahati hun ki jaroorat padne par bachcho ke inse sambandhit parshno ka uttar dene ke liye aapka blog padh kar note kara deti hun.
    bahut bahut dhanyvaad .
    poonam

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