गुरुवार, 4 नवंबर 2010

आँच-42 (समीक्षा) :: स्वप्न लहरियों का अद्भुत तिलिस्मी संसार

आँच-42 (समीक्षा)

स्वप्न लहरियों का अद्भुत तिलिस्मी संसार

हरीश प्रकाश गुप्त

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डोरोथी जी के ब्लाग से अभी हाल में ही परिचय हुआ। बहुत सी कविताएं पढ़ने को मिलीं। वे निंरतर लिख रहीं हैं। भाव प्रधान होने के कारण उनकी कविताएं बहुत सशक्त है। उनकी अधिकांश कविताएं जीवन के यथार्थ को प्रस्तुत करते हुए प्रश्न के साथ शुरू होती हैं, फिर आशा की किरणों में लिपटे उजास से उन प्रश्नों को दिशा प्रदान करती हुई समापन की ओर अग्रसर हो जाती हैं। उनकी काव्याभिव्यक्ति में भाषागत कुछ बहुत त्रुटियाँ अवश्य दिखतीं हैं। तथापि, हमारे जीवन का मूल तत्व, वास्तव में, काव्यमय और संगीतमय है और यह तत्व भाषिक आग्रहों से पूर्णतया मुक्त है। भाषा तो अभिव्यक्ति का एक माध्यम भर है। उनकी ऐसी ही एक भाव प्रधान कविता है स्वप्न लहरियों का अद्भुत तिलिस्मी संसार जिसे आँच के इस अंक में समीक्षा के लिए लिया गया है।

जीवन एक ओर यथार्थ और दिनानुदिन के सत्य का आईना है जिसमें संघर्ष, व्यथाएं, असमर्थताएं, टूटन, हताशा, निराशा और उदासी है। यह यथार्थ जीवन को नीरसता के आवरण से ढक लेता है। लेकिन जीवन का जो मूलतत्व है वह सकारात्मक है, आशाजनक है और संगीतमय है। यह तत्व कठिन से कठिन और विपरीतगामी परिस्थितियों में भी सरसता खोज लेता है, या यों कहें कि कठिनतर होती जाती परिस्थितियों में यह तीव्रतर होते हुए अपने गुणधर्म के अनुरूप प्रस्फुटित होता है और अपना माध्यम खोज लेता है। यह माध्यम भावनाओं के कल्पना संसार की निष्पत्ति है। कवयित्री जिन्हें स्वप्न लहरियाँ कहकर व्यंजित करती है वह संगीतमय प्रकृति के सौन्दर्य से आप्लावित है। तिलिस्मी इसलिए क्योंकि इसमें हमारे स्मृतिपटल - मनभित्तियों – पर गहरे से अंकित यथार्थ जनित उदासीनताओं को क्षण भर में मिटाने की अद्भुत क्षमता विद्यमान है। यह कल्पना लोक हमें पल भर में हमारी अपूरित अपेक्षाओं और स्वप्नों को पूरा होते देखने की सुखद अनुभूति देता है, दुष्कर परिस्थितियों से उबरने की राह दिखाता है, जिनके पूरे होने की आशा हम खो चुके होते हैं। स्वप्नों का यह संसार हमें भौतिकता से दूर अपनी दुनिया में ले जाता है और वहाँ हमारी सारी व्यथाएं विस्मृत हो जाती हैं। हमारी अपूरित अपेक्षाएं और अधूरे स्वप्न जो अचेतन में पूरी सामर्थ्य के साथ अस्तित्वमान होते हैं, वह कारक होते हैं जो प्रकट होने के लिए उपायों की खोज में रहते हैं और जैसे ही उन्हें अवसर मिलता है ये अधूरे सपने पूर्णता के साथ, अपेक्षाओं के सापेक्ष लयमय होकर सभी अवरोधों को तोड़कर हमारे मन मस्तिष्क पर अधिकार कर लेते हैं। कभी-कभी विचारों से उत्पन्न अवरोध आशा की इन किरणों को अपनी जटिलताओं – मकड़जाल – में उलझा देते हैं। तब ऐसा प्रतीत होता है कि ये भी विचलित हो चलीं हैं। लेकिन जब हम उम्मीदें छोड़ चुके होते हैं तब ये आशाएं, अपनी तीव्रता में, बिना विचलित हुए अपने पथ पर अडिग रहते हुए झिलमिलाते प्रकाशस्तंभ की भाँति आकर्षक रुप ले हमारा पथ आलोकित कर जाती है ।

कविता को यदि भाव और शिल्प के दृष्टिकोण से देखें तो डोरोथी की यह कविता कठिन यथार्थ के अनुभव के बीच गहरे अर्थ के साथ आशाओं का उजास समेटे हुए हे। कविता में भावों का गांभीर्य है, क्रमबद्धता है लेकिन कसाव की कमी शिल्प को कमजोर करती है। हाँलाकि कवयित्री में संवेदना, संभावना और क्षमता प्रखर रूप में विद्यमान है और यह उनकी लगभग समस्त रचनाओं से प्रकट भी है।

कविता में अर्थ की दृष्टि से पृथक्करण चिह्न (/) प्रयोग में लाए गए हैं, वे अत्यधिक हैं और कहीं-कहीं तो अर्थ में अवरोध उत्पन्न करते हैं, तथापि कहीं कहीं पर ये अपरिहार्य भी हैं। कविता में लिंग संबन्धी कुछ त्रुटियाँ हैं जो टंकण त्रुटि प्रतीत होती हैं। इसके अतिरिक्त, कविता में कुछ पद (शब्द) ऐसे प्रयोग हुए हैं जो प्रांजलता में बाधक हैं। चूँकि कविता एक संश्लिष्ट अभिव्यक्ति है, अतः शब्दाधिक्य अखरता है। जैसे यदि दूसरे पैरा में जब तक / बारम्बार में बारम्बार तथा फिर भी / कभी कभार में फिर भी पद हटा दिए जाएँ तो यहाँ अर्थ और प्रवाह अधिक स्पष्ट हो जाता है। इसी प्रकार अंत में मकड़जाल से के स्थान पर मकड़जाल में प्रयोग किया गया होता तो अधिक उपयुक्त होता। प्रारम्भ से छठवीं पंक्ति या बची हो सामर्थ्य में अर्थ विपरीतगामी हो जाता है। इसमें का प्रयोग करते हुए या बची हो सामर्थ्य होना चाहिए तभी अर्थ स्पष्ट होता है। यह कवयित्री की रचनामूलक भूल नहीं हो सकती। इसे टंकण त्रुटि ही मानना चाहिए।

30 टिप्‍पणियां:

  1. The idea formed by going through the excellent thread bare examination of the ORIGINAL POST as per the cannon
    of grammatical yardstick of Hindi literature is found in rarest of the rare cases.Though the emotional expression does not require any restriction yet it must be expressed as far as possible within the standard parameter of any language. However,I am very much impressed and will myself be much more cautious in future while publishing my post in my blog. Thanks & GOOD MORNING.

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  2. प्रेम से करना "गजानन-लक्ष्मी" आराधना।
    आज होनी चाहिए "माँ शारदे" की साधना।।
    --
    आप खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
    दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

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  3. डोरोथी जी की कविताएँ,पढ़ती रहती हूँ
    आपने बड़ी सुन्दरता से उनकी रचनाओं का सटीक विश्लेषण किया है..
    कविताओं को और अच्छी तरह समझने में मदद मिलेगी...शुक्रिया

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  4. यह मेरा सौभाग्य है कि मेरी रचना आप के ब्लाग के आँच-42 (समीक्षा) के लिए चुनी गई. मैं समीक्षा में अपनी रचना में निहित संवेदनाजगत की गहन विवेचना से अभिभूत हूं. व्याकरण और शिल्प संयोजन संबंधी त्रुटियों की ओर मेरा ध्यान आकृष्ट कराने के लिए दिल से आभारी हूं. आगे से इन सब पर सायास ध्यान देने का प्रयास करूंगी. रचना सराहने और अपना स्नेहाशीष देकर उत्साहवर्द्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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  5. बेहद सशक्त समीक्षा।
    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।

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  6. भाव प्रधान कविता पर सटीक वक्तव्य।

    आभार,

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  7. आंच हिंदी ब्लॉग्गिंग में समीक्षा का सबसे सशक्त मंच बन गया है.. यहाँ आंच पर डाली गई कविता उछ कोटि की होती हैं और समीक्षा सभी मानदंडों को पूरा करती हैं..या कविता कि पूरक बन काम करती हैं... डोरथी जी की कविता तो बह्दिया है ही.. गुप्त जी की समीक्षा उत्तम है.. और अंत में डोरथी जी, गुप्त जी और मनोज जी को सपरिवार दीपावली की शुभकामनाएं।

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  8. @ प्रेम सरोवर जी,

    प्रतिक्रिया के लिए आपका आभारी हूँ।
    धन्यवाद

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  9. @ शास्त्री जी,
    @ रश्मि जी,
    @ निर्मला जी,

    समीक्षा पर उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभारी हूँ।

    ज्योति पर्व के मंगल अवसर पर आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं।

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  10. @ डोरोथी जी,

    आपकी कविताएँ वास्तव में भाव प्रधान हैं एवं संवेदनशील हैं। आपकी रचना ने ही मुझे कुछ लिखने के लिए भावभूमि प्रदान की है। समीक्षा के प्रति सहज, सरल एवं सकारात्मक भाव के लिए आपका आभारी हूँ।

    ज्योति पर्व के मंगल अवसर पर आपको परिवार सहित हार्दिक शुभकामनाएं।

    हरीश

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  11. @ अरुण जी,

    यह आपकी सहृदयता है आँच के प्रति।

    आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभारी हूँ।

    ज्योति पर्व के मंगल अवसर पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं।

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  12. दीवाली के शुभ अवसर पर हार्दिक ढेरो शुभकामनाये और बधाई .

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  13. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  14. एक अच्छी कविता की अच्छी समीक्षा हुई है। एक निवेदन यह है कि समीक्षा इस प्रकार लिखी जाए जिससे नकारात्मक तत्व बीच-बीच में ही कहीं समाविष्ट हो जाएं ताकि पाठक अन्त में अधिकतम सकारात्मक भाव लेकर जाए।

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  15. @ महेन्द्र जी,

    प्रोत्साहन केलिए आपका आभारी हूँ।

    ज्योति पर्व के मंगल अवसर पर आपको परिवार सहित हार्दिक शुभकामनाएं।

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  16. @ कुमार राधारमण जी,

    सुझाव के लिए आभार। आपका सुझाव भविष्य में कार्य के लिए मुझे सहायक साबित होगा।

    ज्योति पर्व के मंगल अवसर पर आपको परिवार सहित हार्दिक शुभकामनाएं।

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  17. बहुत अच्छी समीक्षा करते हैं गुप्ता जी आप. कुछ हद तक मैं भी राधारमण जी की बात से सहमत हू...लेकिन ये तभी और वहीँ तक संभव है जहाँ तक लेखक को कोई आपात्ति ना हो.

    शुक्रिया इस समीक्षा को पेश करने के लिए.

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  18. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !

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  19. “नन्हें दीपों की माला से स्वर्ण रश्मियों का विस्तार -
    बिना भेद के स्वर्ण रश्मियां आया बांटन ये त्यौहार !
    निश्छल निर्मल पावन मन ,में भाव जगाती दीपशिखाएं ,
    बिना भेद अरु राग-द्वेष के सबके मन करती उजियार !! “

    हैप्पी दीवाली-सुकुमार गीतकार राकेश खण्डेलवाल

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  20. आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं

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  21. आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं

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  22. हरीश जी,
    सर्वप्रथम आपको और आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं। आपकी समीक्षा हम सभी के लिए मार्गदर्शक का काम करेगी। साधुवाद।

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  23. 'असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय ' यानी कि असत्य की ओर नहीं सत्‍य की ओर, अंधकार नहीं प्रकाश की ओर, मृत्यु नहीं अमृतत्व की ओर बढ़ो ।

    दीप-पर्व की आपको ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं ! आपका अशोक बजाज रायपुर

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  24. अपने सभी पाठकों को इस पोस्ट पर आने तथा प्रतिक्रिया देकर प्रोत्साहित करने के लिए मैं सभी का आभारी हूँ।

    आज दीपावली है। प्रकाश पर्व। अज्ञान के अंधकार को हरने, उसे ज्ञान से प्रकाशित करने तथा रिद्धि -सिद्धि, सुख, सम्पत्ति से जीवन को आप्लावित करने की कामना का त्यौहार।

    ईश्वर से कामना है कि यह दीपोत्सव आपके जीवन में सभी मनोकामनाएं पूर्ण करे।

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  25. आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को दीपावली पर्व की ढेरों मंगलकामनाएँ!

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  26. बहुत अच्छी समीक्षा।

    दीपक न सिर्फ़ अपने आसपास प्रकाश फैलाता है, बल्कि दूसरे दीपक को भी प्रकाशित करने में सहायक होता है।

    जोत से जोत जगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो!

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  27. बेहद सशक्त समीक्षा।
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  28. हरीश प्रकाश गुप्त जी,

    इस ज्योति पर्व का उजास
    जगमगाता रहे आप में जीवन भर
    दीपमालिका की अनगिन पांती
    आलोकित करे पथ आपका पल पल
    मंगलमय कल्याणकारी हो आगामी वर्ष
    सुख समृद्धि शांति उल्लास की
    आशीष वृष्टि करे आप पर, आपके प्रियजनों पर

    आपको सपरिवार दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं.
    सादर
    डोरोथी.

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आपका मूल्यांकन – हमारा पथ-प्रदर्शक होंगा।