शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

शिवस्वरोदय-16

शिवस्वरोदय-16

आचार्य परशुराम राय

अनेन लक्षयेद्योगी चैकचित्तः समाहितः।

सर्वमेवविजानीयान्मार्गे वै चन्द्रसूर्ययोः।।54।।

अन्वय – एकचित्तः योगी चन्द्रसूर्ययोः मार्गे लक्षयेत् अनेन (सः) समाहितः

(भूत्वा) सर्वमेव विजानीयात्।

भावार्थ – एकाग्रचित्त होकर योगी चन्द्र और सूर्य नाड़ियों की गतिविधियों के द्वारा

सबकुछ जान लेता है।

English translation – A Yogi, who has controlled his mind by meditating on

Chandra Nadi and Surya Nadi, becomes omniscient.

ध्यायेत्तत्त्वं स्थिरे जीवे अस्थिरे न कदाचन।

इष्टसिद्धिर्भवेत्तस्य महालाभो जयस्तथा।।55।।

अन्वय – स्थिरे जीवे तत्त्वं ध्यायेत् कदाचन न (ध्यायेत्)। (अनेन) तस्य इष्टसिद्धिः महालाभः जयः तथा भवेत्।

भावार्थ – जब मन एकाग्र हो तो तत्त्व चिन्तन करना चाहिए। किन्तु जब मन अस्थिर हो तो ऐसा करना उचित नहीं है। जो ऐसा करता है उसे इष्ट-सिद्धि, हर प्रकार के लाभ और सर्वत्र विजय उपलब्ध होते हैं।

English Translation – One should do meditation when the mind is still. But when the mind is chaotic (disturbed) then meditation should not be done. One who follows these achieves the desired results in his life.

चन्द्रसूर्यसमभ्यासं ये कुर्वन्ति सदा नराः।

अतीतानागतज्ञानं तेषां हस्तगतं भवेत्।।56।।

अन्वय – ये नराः चन्द्रसूर्यसमभ्यासं कुर्वन्ति अतीतानागतज्ञानं तेषां हस्तगतं भवेत्।

भावार्थ – जो मनुष्य (साधक) अभ्यास करके चन्द्र और सूर्य नाडियों में सन्तुलन

बना लेते हैं, वे त्रिकालज्ञ हो जाते हैं।

English translation – If a man makes balance between Chandra Nadi and Surya Nadi by practicing meditation in this order, he becomes omniscient.

वामे चाSमृतरूपा स्याज्जगदाप्यायनं परम्।

दक्षिणे चरभागेन जगदुत्पादयेत्सदा।।57।।

अन्वय - वामे अमृतरूपा (इडा) चरभागेन जगत् परं अप्यायनं स्यात् दक्षिणे च (पिंगला) सदा जगत् उत्पादयेत्।

भावार्थ – बायीं ओर स्थित इडा नाडी अमृत प्रवाहित कर शरीर को शक्ति और पोषण प्रदान करती है तथा दाहिनी ओर स्थित पिंगला नाडी शरीर को विकसित करती है।

English Translation – When Ida Nadi flows it showers nectar and provides strength and nutrition to our body, but flow of Pingala Nadi develops it.

मध्यमा भवति क्रूरा दुष्टा सर्वत्र कर्मसु।

सर्वत्र शुभकार्येषु वामा भवति सिद्धिदा।।58।।

अन्वय – मध्यमा (सुषुम्ना) सर्वत्र कर्मषु दुष्टा क्रूरा भवति वामा (इडा च) शुभकार्येषु सर्वत्र सिद्धिदा भवति।

भावार्थ – मध्यमा अर्थात सुषुम्ना किसी भी काम के लिए सदा क्रूर और असफलता प्रदान करने वाली है (आध्यात्मिक साधना या उपासना आदि को छोड़कर)। अर्थात् उत्तम भाव से किया कार्य भी निष्फल होता है। जबकि इडा नाडी के प्रवाह काल में किये गये शुभकार्य सदा सिद्धिप्रद होते हैं।

English Translation - Flow of Sushumna is always disastrous for any work (other than spiritual practices), even when it is done in good spirit. However, any auspicious work done during the flow of Ida Nadi gives desired results.

निर्गमे तु शुभा वामा प्रवेशे दक्षिणा शुभा।

चन्द्रः समस्तु विज्ञेयो रविस्तु विषमः सदा।।59।।

अन्वय – निर्गमे वामा शुभा (भवति) प्रवेशे (च) दक्षिणा शुभा (भवति)। चन्द्रः तु समः रविः तु सदा विषमः विज्ञेयः।

भावार्थ – बाएँ स्वर के प्रवाह के समय घर से बाहर जाना शुभ होता है और दाहिने स्वर के प्रवाह काल में अपने घर में या किसी के घर में प्रवेश शुभ दायक होता है। चन्द्र स्वर को सदा सम और सूर्य स्वर को विषम समझना चाहिए। अर्थात् चन्द्र स्वर को स्थिर और सूर्य स्वर को चंचल या गतिशील मानना चाहिए।

English Translation – During the flow of Chandra Nadi one should prefer to go out of own or other’s house, whereas entrance to any house, whether own or others, one must prefer Surya Nadi. Chandra Nadi is always considered stable and Surya Nadi unstable.

चन्द्रः स्त्री पुरुषः सूर्यश्चन्द्रो गौरोSसितो रविः।

चन्द्रनाडी प्रवाहेण सौम्यकार्याणि कारयेत्।।60।।

अन्वय – यह श्लोक अन्वित क्रम में है। अतएव इसका अन्वय करना आवश्यक नहीं है।

भावार्थ – चन्द्र नाडी का प्रवाह स्त्री रूप या शक्ति स्वरूप तथा सूर्य नाडी का प्रवाह

पुरुष रूप या शिव स्वरूप माना जाता है। चन्द्र नाडी गौर तथा सूर्य नाडी

             श्याम वर्ण की मानी जाती है। चन्द्र नाडी के प्रवाह काल में सौम्य कार्य करना        उचित है।

English Translation – The flow of Chandra Nadi has feminine nature or energy body and the flow of Surya Nadi has of male nature, in other words it is called Purush or Shiva. The Chandra Nadi is said to be bright and Surya Nadi dark. For the work of peaceful nature one should prefer Chandra Nadi.

सूर्यनाडीप्रवाहेण रौद्रकर्माणि कारयेत्।

सुषुम्नायाः प्रवाहेण भुक्तिमुक्ति फलानि च।।61।।

अन्वय – यह श्लोक भी अन्वित क्रम में है, अतएव अन्वय आवश्यक नहीं है।

भावार्थ – सूर्य नाडी के प्रवाह काल में श्रमपूर्ण कठोर कार्य करना चाहिए और

सुषुम्ना के प्रवाह काल में इन्द्रिय सुख तथा मोक्ष प्रदान करने वाले कार्य

करना चाहिए।

English Translation - For any hard work we should prefer the flow of Surya Nadi (right nostril) and the work, which is pleasant to our senses or causes liberation from birth and death, should be performed during the flow of sushumna.

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17 टिप्‍पणियां:

  1. आपके पोस्ट के माध्यम से काफ़ी जानकारी मिल रही है. धन्यवाद...

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  2. बहुत उपयोगी और ज्ञानवर्धक आलेख।

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  3. आदरणीय परशुराम जी ,
    आपके लेख मैं हमेशा पढ़ता हूँ, इतनी ज्ञानवर्धक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आपका आभार प्रकट करता हूँ !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  4. बह्गुत उपयोगी जानकारी है। आप का ये सार्थक प्रयास हर जीवन के लिये उपयोगी है। धन्यवाद।

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  5. ज्ञानवर्द्धक आलेख है। केवल एक त्रुटि दिख रही है। दूसरे पैरे में,Meditation शब्द का अनुवाद "तत्व चिंतन" किया गया है। ध्यान में कोई चिंतन नहीं होता। ध्यान की अवस्था का अर्थ ही चिंतनमुक्त होना है। कम से कम,तत्व-चिंतन तो ध्यान में कतई संभव नहीं। हां,ध्यान लग जाए,तो तत्व-चिंतन ज़रूर संभव होने लगता है।

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  6. बहुत ही ज्ञानवर्द्धक आलेख । हमारे सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया के समक्ष उजागर करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद ।

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  7. अत्यंत उपयोगी जानकारी प्रदान कर आप जनहित का कार्य कर रहे हैं। आपके इस महती कार्य के लिए आभार।

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  8. @ कुमार राधारमण जी,

    विषय चर्चा में लाने के लिए आपका आभारी हूँ। इससे भ्रम की अवस्था में स्पष्टीकरण की संभावना विद्यमान रहती है।

    यहाँ पर medidation के शाब्दिक अनुवाद का कोई तात्पर्य नहीं है। ध्यान की अवस्था में हम चिंतन, जिसे सामान्य अर्थ में प्रयोग करते हैं वह, अथवा तत्व चर्चा नहीं करते। वास्तव में "तत्व-चिंतन" ध्यान की ही अवस्था है जिसका स्पष्टीकरण भगवान शिव ने स्वयं ही शिव स्वरोदय में किया है।

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  9. बहुत उपयोगी और ज्ञानवर्धक आलेख।

    आभार।

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  10. हमारी सांस्कृतिक सम्पदा को दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद ।

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