शुक्रवार, 25 दिसंबर 2009

त्याग-पत्र : भाग 10

सच में समय के पंख बहुत तेज़ चलते हैं। गाँव की गोरी रामदुलारी अब पटना विश्वविद्यालय की शान थी। देश के प्रसिद्द हिन्दी आलोचकों में से एक सहाय बाबू के निर्देशन में उसका पीएच. डी. भी पूरा होने वाला था। उधर रुचिरा के मार्गदर्शन में समीर ने भी स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में अच्छे अंक प्राप्त किए थे। अब पढ़िए आगे !!

वुमन'स कॉलेज, पटना के नेतृत्व में आयोजित किसमस एवं वर्षांत समारोह में रामदुलारी भी विशेष आमंत्रितों में शामिल थी। शहर के चुनिन्दा गण्य-मान्य नागरिक क्रिसमस नाईट की शोभा बढ़ा रहे थे। कड़ाके की ठण्ड के बावजूद विश्वविद्यालय के नए-पुराने छात्रों का जोश देखते ही बनता था। हालांकि पटना शहर इसाई बहुल नही है, लेकिन क्रिसमस का जोश यहाँ दुनिया के किसी हिस्से से कम भी नहीं है। शायद यही तो खासियत है, क्रिसमस की, जिसे सब मनाते हैं। आज न कोई हिंदू होता है, न कोई मुसलमान...., न सिक्ख, ना इसाई..... सभी बस प्रभु इशु का जन्मदिन मनाने में अपने हृदय का सारा उदगार निकाल कर रख देते हैं। शायद ये पटना शहर की भी खासियत है कि यह हर रंग को बड़ी ही स्वाभाविकता के साथ अपनाता है।

कोहरे से आच्छादित हो रही रात्री के प्रथम प्रहर की धुंध को चीरती हुई जैसे ही किसी गाड़ी की गरगराहट और रौशनी जैसे ही मद्धिम पड़ती थी, गेट पर तैनात रात्री-प्रहरी बैजनाथ के दस्तानों से ढके हाथ यंत्रवत आगे बढ़ते और आगंतुक के प्रवेश के साथ ही पुनः गेट के साथ अपने स्थान पर लौट आते। खून जमा देने वाली सर्दी ने उसे मुंह को गलेबंद से ढंकने को मजबूर जरूर कर दिया था लेकिन वह दायें हाथ को अपने माथे से लगा आगंतुकों का स्वागत करना नही भूलता। प्रवेश द्वार से थोड़ी दूर पर ही स्वागत द्वार पर तीन छात्राओं के साथ अंग्रेज़ी विभाग की अध्यक्षा रेणुका वर्मा सभी अतिथियों को गुलाब का फूल देने में तत्पर थीं।

ऑडिटोरियम को दुल्हन की तरह सजाया गया था। बिजली के छोटे-छोटे बल्ब की रंगीनियाँ कोहरे भरी रात में भी इन्द्रधनुष का भ्रम उत्पन्न कर रहे थे। मंच पर बने विशालकाय क्रिसमस ट्री पर बिजली की सजावट से लिखा था, 'मेरी क्रिसमस'। मद्धम रौशनी वाले बल्ब से गुलजार ऑडिटोरियम के मंच के ठीक नीचे लगा हुआ बड़ा सा अलाव प्रभु इशु के जन्म-समय को बिल्कुल जीवंत बना रहा था।

अलाव के पास ही पहली पंक्ति की कुर्सियों पर वुमन'स कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ विमला महाजन के साथ ही विराजमान थे प्रफेसर गोविन्द मित्रा, प्रफेसर भृकुटीनाथ, डॉ अक्षरा तिवारी, प्रफेसर राधा बल्लभ सहाय, डॉ विनीत चन्द्र, पटना शहर के मेयर, सैंट कैथोलिक की सिस्टर अरोमा, कई उच्चाधिकारी और कई विशिष्ट नागरिक। प्रोफेसर सहाय के ठीक पीछे वाली कुर्सी पर बैठी थी रामदुलारी और उसके दायें प्रकाश एवं बायीं ओर डॉ. रुचिरा के बगल वाली कुर्सी समीर के लिए थी।

समारोह की शुरुआत संस्थान की प्राचार्या डॉ विमला के स्वागत भाषण से हुई। फिर सिस्टर अरोमा ने क्रिसमस के महत्व से सभा को रू-ब-रू कराया। आगे की कार्रवाई के लिए माइक डॉ रुचिरा ने थाम लिया। मेयर साहब ने जैसे ही क्रिसमस केक पर प्लास्टिक की छुरी चलाई, पूरा भवन करतल ध्वनि और 'हैप्पी क्रिसमस-मेरी क्रिसमस' के समवेत निनाद से गूंज उठा। तभी मंच के पीछे से अतिथियों पर चाकलेट, गुब्बारे और फूल बरसने लगे। सबकी नजरें स्टेज की ओर। अरे ये क्या.... सीक्रेट संता तो खुल कर उपहार बाँट रहा था। लाल लिबास पर चोटी वाली लाल टोपी के नीचे लम्बी सुनहली दाढी और आंखों पर गोल चश्मा लगाए, संता स्टेज से लेकर नीचे तक खूब कलाबाजी और करतब के साथ उछल कर लोगों को प्यार का तोहफा दे रहा था। लोग समझ नही पाये कि आख़िर यह है कौन ? फिर सीक्रेट संता ने जैसे ही रुचिरा के हाथ से माइक लेकर 'जिंगल बेल...' गाना शुरू किया तब रुचिरा की आँखें फटी की फटी रह गयी। वह अब समझी कि उसके बाजू वाली कुर्सी अभी तक खाली क्यूँ थी। फिर रुचिरा ने संता की टोपी जैसे ही खीचा, एक बार फिर जोरदार ताली। लेकिन सहसा उसे विश्वास नही हो रहा था कि अमूमन गंभीर सा दिखने वाला समीर इतना अच्छा स्वांग भी कर सकता है।

समारोह में प्रकाश ने मुकेश के गाने 'मुबारक हो सबको समां ये सुहाना' पर जम कर तालियाँ बटोरी। बाद में रामदुलारी ने भी 'दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिये.....' गा कर महफ़िल चुराने में कोई कसर नही छोड़ी। फिर श्रोताओं की फरमाईश पर दोनों ने एक युगल गीत, 'कौने दिशा में लेके चला रे बटोहिया....' गा कर पुरी सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया। फिर शुरू हुआ नृत्य का दौर। सब ने जम के ठुमके लगाए लेकिन 'झुमका गिरा रे...' पर रामदुलारी का सोलो परफार्मेंस ने एक बार फिर सावित कर दिया कि विधा जो भी हो वह सब पे मीर है।

देर रात तक चल रहे कार्य-क्रम की रंगीनियाँ पूरे शबाब पर थी। लोगों में केक बांटा जा रहा था कि तभी एक भद्र पुरूष पर मदिरा देवी ने कृपा दिखानी शुरू कर दी। डॉ रुचिरा पाण्डेय की वाक्-कला से बेचारे इतने अभिभूत हुए कि उन्हें अपने हाथों केक खिलाने पार आमदा हो गए। शिष्टाचारवश रुचिरा ने मुंह के बदले अपने हाथ आगे कर दिए लेकिन सज्जन तो एकदम पसीजे हुए थे। रुचिरा जब तक कुछ समझ पाती उसके गालों पर केक मले जा चुके थे। छिटकती हुई रुचिरा के मुंह से निकल पड़ा, 'इडिअट '। फिर तो उनकी रक्तिम आंखों में सुरा-शक्ति साक्षात उतर आयीं। वह तो समीर बीच में आ चुका था वरना उन्होंने तो रुचिरा को झपट ही लिया था। फिर प्रकाश कंधे से पकड़ कर अलग ले गया तभी स्थिति कुछ सामान्य हो पायी। विमला मैडम, प्रो सहाय और कुछ अन्य लोग भी वहाँ पहुँच गए। विमला मैडम ने घटना पर खेद प्रकट करते हुए रुचिरा से माफी माँगी। समीर ने अपना रुमाल देते हुए रुचिरा को चेहरा साफ करने का संकेत किया।

कड़ाके की ठण्ड में चेहरा एवं कपड़ों पर गिरे केक को साफ़ कर अधभींगे कपड़ों में ही रुचिरा समीर, रामदुलारी और प्रकाश के साथ रात्री-भोज से पहले ही वहाँ से रुखसत हो गयी। सब का मन कसैला हो गया था। फाटक खोलते हुए गेट पर तैनात सुरक्षा-प्रहरी ने पुकारा, "रामदुलारी बबुनी, कैसन हो ? अभी चौकीदार के चेहरे पर मफलर नही था। देखते ही रामदुलारी चहक कर बोली, "अरे बैजू काका...! आप ? आप यहाँ कब से ?" "पिछले हफ्ते ही ज्वाइन किया हूँ बबुनी। और सब तो ठीक है न.... ?" "हाँ काका। अभी चलती हूँ फिर कभी मिलूंगी।" कहते हुए रामदुलारी आगे बढ़ गयी। रुचिरा और समीर पहले ही गेट पार कर उसका इंतिजार कर रहे थे। हाँ, प्रकाश उसके साथ था। सभी समीर की कार होकर चल पड़े। लेकिन महिलाओं के समान अधिकार और सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई लड़ने वाली 'युवा-मंडली' के मन में कौन से प्रश्न कौंध रहे थे, यह उनके चेहरे पर अक्षरसः दिख रहा था।
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आगे क्या हुआ ? पढ़िए अगले हफ्ते इसी ब्लॉग पर !! अभी, 'मेरी क्रिसमस ' !!!

त्याग पत्र के पड़ाव

भाग ॥१॥, ॥२॥. ॥३॥, ॥४॥, ॥५॥, ॥६॥, ॥७॥, ॥८॥, ॥९॥, ॥१०॥, ॥११॥, ॥१२॥,॥१३॥, ॥१४॥, ॥१५॥, ॥१६॥, ॥१७॥, ॥१८॥, ॥१९॥, ॥२०॥, ॥२१॥, ॥२२॥, ॥२३॥, ॥२४॥, ॥२५॥, ॥२६॥, ॥२७॥, ॥२८॥, ॥२९॥, ॥३०॥, ॥३१॥, ॥३२॥, ॥३३॥, ॥३४॥, ॥३५॥, ||36||, ||37||, ॥ 38॥



7 टिप्‍पणियां:

  1. पढ़ रहे हैं...


    क्रिसमस एवं नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

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  2. बहुत सुंदर श्रखला चल रही है, अगली कडी का इंतजार

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  3. अच्छी लगी,कहानी अपने उद्देश्य में आगे बढ़ रही है।

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  4. क़ाबिले-तारीफ़ है। आपको नए साल की मुबारकबाद।

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  5. बहुत सुंदर लगा यह अंक । अब अगली कड़ी का इंतजार है ।

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  6. पढी हैं और पढ रहे हैं । आपको भी क्रिसमस और नये साल की शुभकामनायें धन्यवाद्

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