रविवार, 1 नवंबर 2009

किमाश्चर्यम... ??

-- करण समस्तीपुरी

महाभारत का प्रसंग था। यक्ष-युद्धिष्ठिर संवाद चल रहा था। यक्ष महाराज के एक से एक उलझे हुए प्रश्न का धर्मराज युद्धिष्ठिर सुलझे हुए उत्तर दे रहे थे। एक प्रश्न समाप्त हुआ। अगला प्रश्न.... किमाश्चर्यम... ? अर्थात आश्चर्य क्या है ? लगे युद्धिष्ठिर बगले झाँकने। तभी मास्टर काका ने काकी को आवाज़ लगाई। पतिव्रता काकी ने विनम्रता से कहा, 'चावल चुन रही हूँ।' मैं ने सोचा शायद युद्धिष्ठिर को किमाश्चर्यम का उत्तर मिल गया। चावल से एकाध कंकर-तिनके चुनने में घंटो लग जाते हैं। काकी जी तो चावल ही चुन रही हैं। फिर पता नही कब तक काका जी का हुकुम बजायेंगी। किंतु युद्धिष्ठिर मेरी तरह कुशाग्र बुद्धि होते तब तो। बेचारे ढूंढ़ते रहे उत्तर। लेकिन भगवान की कृपा.... विज्ञान में स्नातक काका जी जोर से चिल्लाये, 'अरे भगवान जल्दी करो. देखो पानी नीचे गिर गया।' मुझे लगा कि युद्धिष्ठिर को अब तो जवाब मिल गया। पानी-पत्थर या कुछ भी, आज तक मैं ने ऊपर गिरते हुए नहीं देखा। लेकिन धैर्यवान युद्धिष्ठिर महराज अभी तक प्रतीक्षा मे थे। तभी काका के मित्र नयनसुखजी एक हाथ से छतरी और दुसरे से लूंगी संभाले तशरीफ लाये। अस्त व्यस्त नयनसुखजी को देखते ही काका ने धडाक से सवाल दाग दिया, "अरे मियाँ इस तरह.... ? बाहर बारिश हो रही है क्या... ??" अब आश्चार्य के मारे मेरी हंसी निकल गयी बारिश अन्दर तो होती नही है... लेकिन युद्धिष्ठिर महाराज थे कि अभी भी इंतज़ार मे. नयनसुखजी छाता को मोड़ कर एक ओर कोने मे रखते हुए बोले, "अरे क्या बताएं यार ! यह लड़की तो एकदम से मेरे माथे का हेडेक हो गयी है। इसपर तो यक्ष महाराज की भी हंसी निकलते निकलते रही। [अब भला पैरों मे तो हेडेक होता नही...] लेकिन धीरोदात्त युद्धिष्ठिर अभी भी शांतचित्त। फिर काका जी ने पूछा, 'अबे कौन लड़की... ?' जवाब मे नयनसुखजी ने कहा, 'अजी वही, मेरी भतीजी...एक आँख से कानी जो है...? मैंने इतना कुछ प्रीप्लान कर रखा था.... [भैय्या ! दो आँख से कानी तो होगी नही और प्लान तो प्री ही होता है। आज तक किसी ने पोस्ट प्लान किया है क्या... ?] लेकिन सारी मिहनत पे पानी फिर गया। सभी लोग सकते में। किंतु युद्धिष्ठिर अभी शांत। अन्य प्रश्नों के धड़-धड़ उत्तर देने वाले युद्धिष्ठिर को निरुत्तर देख यक्ष महाराज बोले,
"हे धर्मराज ! आपने सुना ? कलियुग मे लोग बहुत पढ़े लिखे होंगे। उच्च डिग्री धारक। किंतु वे छोटी-छोटी बातों में बड़े-बड़े ब्लंडर मिस्टेक करेंगे। यही सब से बड़ा आश्चर्य है। 'इति आश्चर्यम' !! "

आंच

06-05-10 करण आंच पर है लक्षणा शक्ति
17-06-10 करण आंच पर हाइकु
22-07-10 करण आंच 27 : आंच पर आरज़ू
05-08-10 करण आंच - 29 पर मौन बने.....
13-01-11 करण आंच-52 :: ग़ज़ल - बड़ा ही जानलेवा है...
10-03-11 करण आंच – 59 : खुशबू बसंत की
22-09-11 करण आँच - 88 : रामेश्वर दयाल की ’चित्रकूट’
06-10-11 करण आँच – 90 : थिरक-थिरक उठते संबोधन
28-01-10 परशुराम एक चौपाल कवि कर्म पर
04-02-10 परशुराम फिर सजी चौपाल : गुप्त के नवगीत पर परशुराम राय की समीक्षा
11-02-10 परशुराम चौपाल : आंच पर ब्लेसिंग
18-02-10 परशुराम कथा जनस्याभिनवा वधूरिव
25-03-10 परशुराम चौपाल : आंच पर कवि-कर्म और आलोचक धर्म
22-04-10 परशुराम आंच-13 :: भीष्म उठ निर्णय सुनाओ
29-04-10 परशुराम आंच-14 :: बरसात का एक दिन
13-05-10 परशुराम आंच-१६
20-05-10 परशुराम आँच-१७ :: ‘कैसे मन मुस्काए?’
27-05-10 परशुराम आँच 18 : 'बौराए हैं बाज फिरंगी'
03-06-10 परशुराम आँच - २०
10-06-10 परशुराम आंच - 21
08-07-10 परशुराम आँच-25 :: गीत का कायिक विवेचन
16-09-10 परशुराम आँच-35 :: अभिलाषा की तीव्रता
23-09-10 परशुराम आभार! (आंच ३६)
30-09-10 परशुराम आँच-37चक्रव्यूह से आगे
18-11-10 परशुराम आंच-४४ (समीक्षा) पर ज्ञानन्द ‘मर्मज्ञ’ का गीत “ये शहर अब सो रहा है”
25-11-10 परशुराम आँच-45 (समीक्षा)–पर जन्मगाथा गीत की
23-12-10 परशुराम आँच-49 ‘मवाद’ पद का गुण दोष निरूपण
30-12-10 परशुराम आँच-50 राजीव कुमार की कविता “न जाने क्यों?”
27-01-11 परशुराम आँच-53 :: आंच ने पूरा किया एक साल :: समीक्षा की पद्धतियाँ।
10-02-11 परशुराम आँच–55 :: नींद थी एक रोज जल्दी खुल गयी
03-03-11 परशुराम आँच-58 :: प्रेम से तुमने देखा जो प्रिय
28-04-11 परशुराम आँच-66 - प्रायोजित है
26-05-11 परशुराम आंच-70 :: आलोचना और आलोचना-धर्मिता
09-06-11 परशुराम आँच – 72 : आशीष जी द्वारा रचित कविता प्लावन
27-10-11 परशुराम आँच - 93 : पुस्तक परिचय - पुस्तक परिचय आचार्य किशो...
08-04-12 परशुराम आँच-106 (कविता की भाषा-7)
08-08-12 परशुराम आँच – 116 – चौंको मत
04-09-12 परशुराम आँच –119
23-06-10 मनोज आंच (23) पर नदिया डूबी जाए
02-09-10 मनोज आंच (33) पर करण समस्तीपुरी की कविता “साँझ भई फिर जल गयी बाती”
14-10-10 मनोज आंच-39 (समीक्षा) पर श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना ‘किरण’ की कविता क्या जग का उद्धार न होगा!
16-12-10 मनोज आंच-४८ (समीक्षा) पर इक नज़र जिंदगी...
17-02-11 मनोज आँच-56 :: कल रात ख्वाब में
15-09-11 मनोज आंच पर गदर की चिनगारियाँ
13-04-12 मनोज आंच-107 : रमपतिया की याद में गिरिजा जी की असाधारण ...
05-07-12 मनोज “शोर” का मतलब कुछ कह देना नहीं है
12-09-12 मनोज आंच-120 : चांद और ढिबरी
05-10-12 मनोज आंच-121 : माँ और भादो
21-01-10 रमेश झा आज की चौपाल साहित्यालोचन पर
09-09-10 रमेश झा संबंध विस्‍तर हो गए हैं
02-06-11 रमेश झा आंच-71 :: कविता का उजाला
12-01-12 सलिल आंच-104 : ग़ज़ल (जंजाल आते हैं)
12-08-12 सलिल आँच- 117 : केतकी का सुवास पूरे वातावरण में खुशबू भ...
25-02-10 हरीश चौपाल : आंच पर देसिल बयना
04-03-10 हरीश चौपाल : आंच पर फिर 'रो मत मिक्की'
11-03-10 हरीश चौपाल : आंच पर है "किस अधर का गीत...."
18-03-10 हरीश चौपाल : आंच पर है 'भाषा’
08-04-10 हरीश आंच पहुंची आँगन तक
15-04-10 हरीश आंच पर ‘फिदायीन’
01-07-10 हरीश आँच-24
15-07-10 हरीश आँच-26
29-07-10 हरीश आँच-28 :: पर 'मेरा आकाश'
12-08-10 हरीश ऑंच – 30 :: अरुण राय की कविता 'कील पर टंगी बाबू जी की कमीज'
19-08-10 हरीश आँच – 31 पर तेरा जूता तेरे सिर
26-08-10 हरीश ऑंच – 32 : संगीता स्वरूप जी की कविता 'चक्रव्यूह'
07-10-10 हरीश आँच-38 :: हरीश प्रकाश गुप्त की लघुकथा “प्रतिबिम्ब” की समीक्षा
21-10-10 हरीश आँच-40 (समीक्षा) पर अरुण राय की कविता ‘गोबर’
28-10-10 हरीश समीक्षा आँच-41- तन सावित्री मन नचिकेता
04-11-10 हरीश आँच-42 (समीक्षा) :: स्वप्न लहरियों का अद्भुत तिलिस्मी संसार
11-11-10 हरीश आँच-43 (समीक्षा) पर उसका दिनकर तो हमेशा के लिए अस्त हो गया
02-12-10 हरीश आँच-46 (समीक्षा) :: माँ की संदूकची
09-12-10 हरीश आँच-47 (समीक्षा) पर - मवाद
06-01-11 हरीश आँच-51 : ‘मेरा गला घोट दो माँ’
20-01-11 हरीश आँच-53- धागे जीवन संघर्ष के
03-02-11 हरीश आँच-54 :: ‘शिकायतें, जो रहती नहीं’
24-02-11 हरीश आँच-57- “तुम” में जीवन के रंग
17-03-11 हरीश आँच-60 - मजनूँ कहीं का
24-03-11 हरीश आँच-61 – आजी की बरसी
31-03-11 हरीश आँच – 62 :: कोई बात तो जरूर होगी
07-04-11 हरीश आँच-62 – बंजारे बादल
14-04-11 हरीश आँच-63 - विश्व विटप की डाली पर
21-04-11 हरीश आंच पर - सफ़े ज़िन्दगी के
05-05-11 हरीश आँच पर खण्डित विश्वास
12-05-11 हरीश आँच-68- सिस्टम के अन्दरः अन्ना हजारे
19-05-11 हरीश आँच-69- हम आँधी में उड़ते पत्ते
14-07-11 हरीश आँच-77 .....आभासी दुनियाँ
21-07-11 हरीश आँच-78 .....मन तो चाहे अम्बर छूना...
28-07-11 हरीश आँच-78 ..... कविताओं में ढूँढ रहा हूँ .....
25-08-11 हरीश आँच-84 ­- 11 साल का मेंहदीवाला
01-09-11 हरीश आँच-85­- यादें
29-09-11 हरीश आँच- (89) पर : शैशव
13-10-11 हरीश आँच - 91 –पर ‘वेदना’
20-10-11 हरीश आँच-92 – चुप्पी ओढ़ परिन्दे सोए .......
03-11-11 हरीश आँच-94 - प्रभुसत्ता निर्भर है कबाड़ी पर
10-11-11 हरीश आँच-95 - जिन्दगी कहाँ कहाँ....
17-11-11 हरीश आँच-96- टेढ़े-मेढ़े उल्टे-सीधे....रिश्ते......
24-11-11 हरीश समीक्षा आँच-97- तू उस पार दिव्य आलोकित
01-12-11 हरीश आंच–98 : कविता की संरचना – मेरी दृष्टि में
08-12-11 हरीश आँच-99 - कविता की संरचना – मेरी दृष्टि में - अंक...
15-12-11 हरीश आँच-100 – काव्य की भाषा - 3
22-12-11 हरीश आँच-101 काव्य की भाषा – 4
29-12-11 हरीश आँच-102 काव्य की भाषा – 5
05-01-12 हरीश आँच – 103 काव्य की भाषा – 6
02-02-12 हरीश आंच-105 : “आज ...... बसंत चहुँ ओर छाया है ....... ...
05-05-12 हरीश आँच- 108 - रविकर की रसीली जलेबियाँ - रक्त-कोष ...
10-05-12 हरीश आँच- 109 – नेह भर सींचो
05-06-12 हरीश आँच – 112- हन्टर बरसाते दिन मई और जून के
09-06-12 हरीश आँच – 113 – दफ़्तर के अंध महासागर में
13-06-12 हरीश आँच – 114 – सोनागाछी (कहानी)
01-04-10 हो.नि.शर्मा ऑंच पर 'बुढ़ापा'
16-08-12 परशुराम आँच – 118 - पहिए
18-05-12 हरीश आँच – 111 पर – बन जाना